facebookmetapixel
Advertisement
फर्जी कॉपीराइट दावों पर दिल्ली हाईकोर्ट ने मेटा से मांगा जवाबएयर इंडिया पायलट का मारिजुआना टेस्ट पॉजिटिव, पहली बार लाइसेंस रद्द नहीं होगात्योहारों से पहले रोजगार के मौके बढ़ेंगे, कंपनियां 15-20% ज्यादा अस्थायी कर्मचारी रखेंगीएआई से बदल रहा काम का तरीका, जीसीसी के 46% कर्मचारियों को नई स्किल्स की जरूरतकमोडिटी डेरिवेटिव में पोजीशन लिमिट और मार्जिन ढांचा आसान करेगा सेबीक्लोजिंग एक्शन सेशन में म्युचुअल फंड्स की कम भागीदारी, सेबी ने बुलाई बैठकभारत ने पहली बार रूस को भेजा पेट्रोल, 3.5 लाख बैरल की पहली खेप पहुंचीयूरिया और डीएपी की बिक्री घटी, जुलाई में उर्वरकों की उपलब्धता में हुई बड़ी बढ़ोतरीचंद्रशेखरन का टाटा संस छोड़ने का ऐलान, छह महीने के गतिरोध से निकला रास्ताUPI की लागत घटाने के लिए सरकार के सामने दो विकल्प, बड़े लेन-देन पर MDR की तैयारी

BS BFSI Summit: जमा हासिल करने के लिए गुणवत्तापूर्ण सेवाएं जरूरी

Advertisement

आईडीबीआई बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ राकेश शर्मा का कहना था कि बचत से जुड़ी आदतों में बदलाव आने से बैंक जमाओं पर असर दिख रहा है।

Last Updated- November 07, 2024 | 12:31 AM IST
banking laws

BS BFSI Summit: बिज़नेस स्टैंडर्ड के बीएफएसआई इनसाइट सम्मेलन में बुधवार को शिरकत करने पहुंचे देश के निजी बैंक के शीर्ष अधिकारियों ने जमाएं कम होने की चुनौतियों के बारे में खुलकर बात की। ‘बैंक जमा सही है?’ शीर्षक वाले पैनल में निजी बैंक उद्योग के शीर्ष अधिकारियों ने कहा कि जमा राशि हासिल करने के लिए केवल ब्याज दरें बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं हो सकता है। इसके बजाय पूरा जोर सहूलियत, सेवा डिलीवरी और ब्रांड की विश्वसनीयता पर होना चाहिए।

आईडीबीआई बैंक के प्रबंध निदेशक और सीईओ राकेश शर्मा का कहना था कि बचत से जुड़ी आदतों में बदलाव आने से बैंक जमाओं पर असर दिख रहा है। उन्होंने कहा, ‘वर्ष 2011-12 में बचत दर करीब 39 फीसदी थी लेकिन उपभोग और वैकल्पिक निवेश मौके बढ़ने से जमाओं में कमी आई है।’

शर्मा का कहना है कि बैंक जमा एक सुरक्षित निवेश है और ग्राहकों को अपनी जोखिम क्षमता का मूल्यांकन करने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा, ‘कम जमाओं का असर हमारे मुनाफे पर भी पड़ता है। हमें जमाओं का दायरा बढ़ाने के लिए नई योजनाओं की पेशकश करनी होगी।’

उन्होंने कहा, ‘हमें जिम्मेदार होकर क्रॉस सेलिंग करने की जरूरत है।’ हालांकि उन्होंने यह बात स्वीकार की कि भले ही जमाओं में कमी आई है लेकिन बैंकों से अब भी नकदी देने और कम जोखिम जैसे सकारात्मक पहलू जुड़े हैं। उन्होंने कहा, ‘लोगों को अपनी जोखिम लेने की क्षमता का मूल्यांकन करना होगा लेकिन मेरा मानना है कि अब भी बैंक जमाएं बेहतरीन विकल्प हैं।’

आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के सीईओ और प्रबंध निदेशक वी वैद्यनाथन ने कहा, ‘इस्तेमाल के लिहाज से जमाओं का मामला म्युचुअल फंड से अलग है। आप किस्त म्युचुअल फंड से नहीं चुका सकते हैं। इसमें तकनीक, सेवाएं, ब्रांड की पहचान सभी अहम कारक हैं।’ वैद्यनाथन के मुताबिक परिवारों की जमाओं में भले ही कमी आ सकती है लेकिन पूंजी बैंकिंग तंत्र के दायरे में है।

येस बैंक के सीईओ प्रशांत कुमार कहते हैं कि सरकार और कॉरपोरेट पक्ष दोनों ही तरह से व्यवस्थागत क्षमता में सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, ‘व्यवस्थागत स्तर पर क्षमता में व्यापक सुधार हुए हैं ऐसे में अब पूंजी, बैंकिंग तंत्र में ऐसे ही नहीं छोड़ी जाती है। कुछ फंड दूसरे परिसंपत्ति वर्ग में जा रहे हैं लेकिन इसके चलते बैंकों को कोई बुनियादी समस्या नहीं होती है।’

कुमार ने संभावित संरचनात्मक बदलाव के बारे में भी बात की है। उन्होंने कहा, ‘बड़ी कंपनियां बॉन्ड में निवेश करती हैं लेकिन इसमें बदलाव हो सकता है और बैंकों को परिसंपत्ति, देनदारियों और जोखिम का प्रबंधन करने पर जोर देने की जरूरत होगी।’

आरबीएल बैंक के एमडी और सीईओ आर सुब्रमण्यकुमार ने कहा कि जमाएं आकर्षित करने के लिए केवल ब्याज दरों का समायोजन ही काफी नहीं है बल्कि इसमें गुणवत्तापूर्ण सेवाओं की अहमियत है।

(साथ में प्रतीक शुक्ला)

Advertisement
First Published - November 7, 2024 | 12:31 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement