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सरकारी बॉन्ड यील्ड में गिरावट पर लगा ब्रेक, 6.60% से नीचे जाने की संभावना कम; ट्रेडर्स हुए सतर्क

आपूर्ति के दबाव के कारण बाजार की धारणा पर दबाव पड़ा है, जिससे ट्रेडर्स सतर्क हैं

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अंजलि कुमारी   
Last Updated- February 16, 2026 | 10:46 PM IST

फरवरी की मौद्रिक नीति की समीक्षा बैठक के बाद सरकारी बॉन्ड की यील्ड में नरमी आई थी, लेकिन चालू वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में यह ऊंचे स्तर पर रह सकती है। बॉन्ड स्विच से बाजार को थोड़ी राहत मिली है। आपूर्ति के दबाव के कारण बाजार की धारणा पर दबाव पड़ा है, जिससे ट्रेडर्स सतर्क हैं।

सरकार ने अपनी देनदारी प्रोफाइल को सरल बनाने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक के साथ 12 फरवरी को कनवर्जन/स्विच ऑपरेशन चलाया और सरकार ने 75,500 करोड़ रुपये से अधिक की फेस वैल्यू की 4 सिक्योरिटी वापस ली।

सरकार के 10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड बजट के बाद के 6.77 प्रतिशत के उच्च स्तर से करीब 11 आधार अंक कम हुई है। बहरहाल दरों में कटौती का चक्र करीब खात्मे की ओर होने और आगे और नकदी डाले जाने की संभावना न होने के कारण बाजार के हिस्सेदारों को उम्मीद है कि बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड की यील्ड तिमाही के आखिर तक 6.60 प्रतिशत के ऊपर रहेगी।

डीलरों ने कहा कि 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड बढ़ सकती है और अप्रैल में आपूर्ति शुरू होने पर संभावित रूप से 7 प्रतिशत के करीब जा सकती है। सोमवार को 10 साल के बेंचमार्क सरकारी बॉन्ड पर यील्ड 6.66 प्रतिशत पर बंद हुई, जबकि पिछली बंदी 6.68 प्रतिशत थी।

निजी क्षेत्र के बैंक के एक डीलर ने कहा, ‘शुद्ध उधारी के मामले में वास्तव में कोई बदलाव नहीं हुआ है। मांग और आपूर्ति का गणित पहले जैसा ही है। ऐसे में धारणा जहां थोड़ी सी सकारात्मक है, कुल मिलाकर बाजार के परिदृश्य में कोई बदलाव नहीं हुआ है। यील्ड बढ़ी हुई रह सकती हैं। निकट अवधि के हिसाब से  10 साल के बेंचमार्क बॉन्ड की यील्ड 6.60 से 6.75 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है और 6.65 प्रतिशत के नीचे जाने की संभावना बहुत कम है।’

आने वाले वित्त वर्ष 2027 में शुद्ध बाजार उधारी अनुमानित रूप से 11.7 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। कम अवधि के पेपर को लंबी अवधि के सरकारी सिक्टोरिटीज में बदलने के बावजूद यील्ड मनोनैज्ञानिक रूप से महत्त्वपूर्ण 6.60 प्रतिशत से नीचे नहीं आई। इस बदलाव की घोषणा के आसपास मुनाफावसूली के कारण शुरुआती गिरावट रही, लेकिन जल्दी ही स्थिति बदल गई।

इस समय की स्थितियों के मुताबिक महंगाई दर बढऩे की स्थिति में अगली नीतिगत कार्रवाई में दर में बढ़़ोतरी की संभावना अधिक है।  

एक प्राइमरी डीलरशिप के एक डीलर ने कहा, ‘आगे यील्ड गिरने की संभावना नहीं है, क्योंकि नीतिगत दर में कटौती का चक्र अब खत्म हो गया है और नकदी के अधिक समर्थन की उम्मीद नहीं है।’ उन्होंने आगे कहा कि इस अवस्था में बायबैक ऑक्शन से ही एकमात्र राहत आ सकती है।

First Published : February 16, 2026 | 10:46 PM IST