Sovereign gold bonds: अगर आप सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) में टैक्स बचाने और सोने में निवेश के लिए पैसा लगाते हैं, तो बजट 2026–27 की यह घोषणा आपके लिए बहुत अहम है। 1 फरवरी को बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर मिलने वाली कैपिटल गेन टैक्स छूट के नियम सख्त करने का एलान कर दिया। इससे सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड में निवेश करने वाले निवेशकों को बड़ा झटका लगा है। इस बदलाव के बाद अब हर निवेशक को टैक्स-फ्री मुनाफे का फायदा नहीं मिलेगा। यह लाभ अब चुनिंदा निवेशकों तक सीमित रहेगा।
बजट के मुताबिक, सिर्फ ‘इंडिविजुअल’ कैटेगरी के निवेशक ही सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर कैपिटल गेन टैक्स से मुक्त होंगे। वह भी तभी, जब उन्होंने आरबीआई के जरिए सरकार के ओरिजिनल इश्यू में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदा हो। अगर आपने आरबीआई के इश्यू में सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदा और उसे पूरे 8 साल (मैच्योरिटी तक) लगातार होल्ड किया, तो मैच्योरिटी पर होने वाला मुनाफा पहले की तरह पूरी तरह टैक्स-फ्री रहेगा।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, यह फैसला उन निवेशकों के लिए झटका है जो स्टॉक एक्सचेंज से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदकर मैच्योरिटी तक रखते थे और टैक्स छूट पाते थे। बजट 2026 के बाद ऐसा नहीं होगा। अगर आपने सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सेकेंडरी मार्केट (एक्सचेंज) से खरीदा है या मैच्योरिटी से पहले बेच दिया, तो अब कैपिटल गेन टैक्स देना होगा। यानी एक्सचेंज से खरीदे गए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड पर टैक्स-फ्री एग्जिट का रास्ता बंद हो गया है।
वेद जैन एंड एसोसिएट्स के पार्टनर अंकित जैन ने नए टैक्स बदलाव को समझाते हुए कहा, ”हाल के समय में सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के कारण निवेशक सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को एक सुरक्षित निवेश विकल्प के तौर पर तेजी से अपना रहे हैं। हालांकि, फाइनेंस बिल 2026 ने एक बड़ा बदलाव पेश किया है, जिसने स्टॉक एक्सचेंज से सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड खरीदने वाले निवेशकों के लिए गणित ही बदल दिया है।”
वित्त मंत्री ने साफ किया है कि यह नया नियम आरबीआई की तरफ से जारी सभी सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड सीरीज पर लागू होगा। इससे अलग-अलग ट्रांच को लेकर जो भ्रम था, वह भी खत्म होगा।
एक्सपर्ट्स मानते हैं कि सरकार चाहती है कि सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड शॉर्ट-टर्म ट्रेडिंग या टैक्स आर्बिट्राज का जरिया न बनें। सरकार सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को लॉन्ग-टर्म सेविंग इंस्ट्रूमेंट के तौर पर देखना चाहती है, न कि बार-बार खरीद-फरोख्त करके टैक्स बचाने के साधन के रूप में। इसी वजह से टैक्स छूट को सिर्फ ओरिजिनल और लंबे समय तक होल्ड करने वाले निवेशकों तक सीमित किया गया है।
किंग स्टब्ब एंड कसिवा, एडवोकेट्स एंड अटॉर्नीज़ के सीनियर पार्टनर राजेश शिवस्वामी ने कहा, ”कानूनी और टैक्स सलाह के नजरिये से यह कदम इस बात पर जोर देता है कि कैपिटल गेन टैक्स की छूट पाने के लिए सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड को मैच्योरिटी तक होल्ड करना जरूरी है। साथ ही यह सरकार की उस सोच को भी दर्शाता है। इसके तहत वह सॉवरेन इंस्ट्रूमेंट्स में स्थिर और लॉन्ग टर्म निवेश को बढ़ावा देना चाहती है।”