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क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों को भी मिले लघु वित्त बैंकों की तरह काम करने की अनुमति

Last Updated- December 11, 2022 | 8:18 PM IST

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) रिसर्च ने एक रिपोर्ट में कहा है कि क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों (आरआरबी) को सहकारी बैंकों की तरह लघु वित्त बैंकों (एसएफबी) के रूप में काम करने या एसएफबी बनने के लिए लाइसेंस का विकल्प दिया जाना चाहिए।
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘बैंकिंग क्षेत्र में तेजी से हो रहे बदलाव को देखते हुए और वृद्धि को गति देने के लिए सितंबर 2018 में शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) को एसएफबी में बदलने की स्वैच्छिक योजना पेश की गई थी। आरआरबी को भी सहकारी बैंकों की तर्ज पर एसएफबी की तरह काम करने की अनुमति दी जा सकती है या आरआरबी को एसएफबी बनने के लिए ऑन टैप लाइसेंस की अनुमति दी जा सकती है।’
दरअसल कुछ बड़े आरआरबी आकार में एसएफबी से भी बड़े हैं, जो बाजार में काम कर रहे हैं। कारोबार के आकार के हिसाब से भारत का सबसे बड़ा आरआरबी बड़ौदा यूपी बैंक (72,015 करोड़ रुपये) है, जो सबसे बड़े एसएफबी (एयू एसएफबी) से बड़ा है, जिसके कारोबार का कुल आकार (जमा और अग्रिम) मार्च 2021 के आंकड़ों के मुताबिक 70,588 करोड़ रुपये है।
शोध रिपोर्ट में आरआरबी, सहकारी बैंकों और यहां तक कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के नियमों में एकरूपता की वकालत की गई है। साथ ही आरआरबी के लिए कुछ नियमों में समय के हिसाब से बदलाव किए जाने की जरूरत है। इस समय आरआरबी हाइब्रिड रेगुलेशन में आता है। एसबीआई रिसर्च रिपोर्ट में कहा गया है, ‘हमारा मानना है कि आउटकम आधारित नियमन को कानून आधारित नियमन से स्पष्ट रूप से अलग करने की जरूरत है।’
वित्त वर्ष 21 के आंकड़ों के मुताबिक इस समय 42 आरआरबी हैं, जिनका प्रायोजन 12 अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों द्वारा किया जाता है। देश के 26 राज्यों और 3 केंद्र शासित प्रदेशों में इनकी 21,856 शाखाएं हैं, जहां 28.3 करोड़ जमाकर्ता और 2.6 करोड़ कर्ज लेने वाले हैं। 

First Published - April 1, 2022 | 11:37 PM IST

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