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एमपीसी का मानना है कि मुद्रास्फीति रुझान स्थिर नहीं

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:01 AM IST

बीएस बातचीत
दूसरी मौद्रिक नीति समीक्षा (एमपीसी) बैठक के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास, डिप्टी गवर्नर माइकल पात्रा, एमके जैन और  टी रबि शंकर ने मीडिया के सवालों के जवाब दिए और विभिन्न मुद्दों पर अपने विचार व्यक्त किए। पेश हैं बातचीत के मुख्य अंश:

लगता है कि आरबीआई ने 10 वर्षीय बॉन्ड पर ध्यान केंद्रित किया है, जिसमें लंबी अवधि का बॉन्ड प्रतिफल चढ़ा है। इसलिए, बाद के जी-सैप में, क्या आरबीआई इन प्रतिफल को नीचे लाने पर जोर देगा?
दास: हमने सभी परिपक्वताओं में संपूर्ण प्रतिफल रुझान पर ध्यान केंद्रित किया है, यह सिर्फ 10-वर्षीय प्र्रतिफल नहीं है। यदि आप जी-सैप नीलामियों पर विचार करें, जो हमने की हैं, तो पता चयलेगा कि हमने सभी परिपक्वता वाले प्रोफाइल के बॉन्डों को इनमें शामिल किया। हमने प्रतिफल के क्रमबद्घ विकास के बारे में बात की है और हमने इस पर ध्यान केंद्रित किया। हमारे आगामी मार्गदर्शन, संचार और कार्यों से निष्कर्ष निकालना जरूरी है।

मुद्रास्फीति दर ने नीति को विस्तार प्रदान किया है। इसलिए आप किस तरह की गुंजाइश देख रहे हैं?
दास: 3 प्रतिशत की मुद्रास्फीति दर ने हमें गुंजाइश प्रदान की है। इसलिए इसने हमें तरलता परिचालन के संदर्भ में गति दी है। साथ ही इससे हमें व्यवस्था में नकदी डालने के कदम में भी सक्षम बनाया है।
वायदा प्रीमियम बाजार में आरबीआई की सोच क्या है?
पात्रा: वायदा प्रीमियम अनिवार्य रूप से बाजार परिणाम परिणाम है। पिछली बार जब वायदा चढ़ा था, जो यह इनविट में विदेशी निवेश की वजह से था। हमने इन परिणामों पर नजर रखी और वायदा को नियंत्रित करने के लिए समायोजन उपायों पर जोर दिया।

विदेशी मुद्रा भंडार की वजह से यह अनुमान लगाए गए हैं कि आपकी बैलेंस शीट पर इसका असर कैसा रहा और लाभांश भुगतान कैसा रहा?
दास: हमारो विदेशी मुद्रा परिचालन मुख्य रूप से विनिमय दर की स्थिरता बनाए रखने पर केंद्रित रहे हैं और इस संदर्भ में हम काफी सफल रहे हैं। अधिशेष स्थानांतरण के संदर्भ में, यह नीतिगत समस्या नहीं है, यह लेखांकन का मुद्दा है।
रबि शंकर: अधिशेष स्थानांतरण में वृद्घि पिछले साल की तुलना में इस साल काफी हद तक कम जोखिम पूंजी प्रावधान पर केंद्रित है, और ऐसा इसलिए है, क्योंकि पिछले साल (2019-20) बैलेंस शीट  वृद्घि 12.37 लाख करोड़ रुपये थी। इसलिए जोखिम के लिए प्रावधान वृद्घि काफी ज्यादा थी। इस साल (2020-21), बैलेंस शीट के आकार में वृद्घि करीब 3.6 लाख करोड़ रुपये थी, जो पूर्ववर्ती वर्ष के मुकाबले करीब एक-चौथाई की वृद्घि है।

मुद्रास्फीति को लेकर एमपीसी का रुख कैसा रहेगा?
दास: हमारा नजरिया अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना और टिकाऊ और निरंतर वृद्घि की संभावना तलाशना है।
पात्रा: कई एमपीसी विवरणों में, मुद्रास्फीति विश्लेषण किए गए और एमपीसी का मानना है कि इस बार मुद्रास्फीति स्थिर नहीं है। मांग में बदलाव के साथ मुद्रास्फीति स्थिर हो जाएगी। मौजूदा हालात में, हम यह देख रहे हैं कि मांग कमजोर है और मुद्रास्फीति में मांग का ज्यादा योगदान नहीं है और यह काफी हद तक आपूर्ति से संबंधित है। लेकिन हम मांग दबाव को लेकर सतर्क हैं।

जब मांग में तेजी आनी शुरू होगी तो क्या एमपीसी अनुकूल रुख से परहेज करेगी?
दास: हम हालात पर नजर रख रहे हैं। जैसे ही हालात बदलेंगे, एमपीसी अपना नजरिया व्यक्त करेगी। हम  वृद्घि, मुद्रास्फीति की गति पर ध्यान बनाए हुुए हैं। पिछले साल हमने अपनी अर्थव्यवस्था में कमी दर्ज की और इस साल वृद्घि में कमी की है। इसलिए इस समय ध्यान वृद्घि पर केंद्रित है। वृृद्घि पर ध्यान बरकरार रहेेगा,, और एमपीसी आकलन के अनुसाार मुद्र्रास्फीति 5.1 प्रतिशत रहेग, जो 2-6 प्रतिशत के दायरे  में अंदर है।

मई के शुरू में घोषित राहत उपायों  के संदर्भ में आपकी क्या प्रतिक्रिया है?
दास: हम हालात पर लगातार नजर रख रहे हैं और जब भी हम दबाव के संकेत देखेंगे, हम राहत  मुहैया कराने के लिए हस्तक्षेप करेंगे।

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First Published - June 4, 2021 | 11:51 PM IST

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