facebookmetapixel
मजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआईभारत कोकिंग कोल का आईपीओ शुक्रवार को पेश होगा, ₹1,069 करोड़ जुटाने की तैयारीAI इम्पैक्ट समिट में ग्लोबल साउथ पर फोकस, खुद को AI सर्विस सप्लायर के रूप में पेश करेगा भारत

PSU सेक्टर के बैंकों के तीन क्षेत्रों में डिजिटल बदलाव जारी, Deloitte India ने बताया कैसे बदल रहे काम के तरीके

शीषर्क ‘Deloitte's PoV on Public Sector Banks’ के अध्ययन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 100 से अधिक नेतृत्वकर्ताओं का अध्ययन किया गया।

Last Updated- April 22, 2024 | 9:51 PM IST
Government banks are eyeing new markets to increase deposits, many attractive schemes are being made for opening accounts जमा बढ़ाने के लिए सरकारी बैंकों की नए बाजारों पर नजर, खाते खोलने के लिए बना रहे कई आकर्षक योजना

भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ प्रबंधन के आधे नेतृत्व को अपने बैंकों में तेजी से बदलाव लाने के लिए डिजिटल क्षमता का निर्माण करने की जरूरत है। यह जानकारी डेलॉयट इंडिया के अध्ययन में दी गई है।

शीषर्क ‘डेलॉयट् पीओवी ऑन पब्लिक सेक्टर बैंक्स’ के अध्ययन में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के 100 से अधिक नेतृत्वकर्ताओं का अध्ययन किया गया। इस अध्ययन के अनुसार बैंकों में तेजी से डिजिटल बदलाव जारी है और सभी स्तर के नेतृत्वकर्ताओं को डिजिटल बदलाव लागू करने के लिए इसे स्वीकारने की आवश्यकता है।

अध्ययन के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के तीन क्षेत्रों में डिजिटल बदलाव हो रहा है। पहला, सेवाओं और उत्पादों को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने के तौर-तरीके में।

दूसरा, संचालन और सेवाओं के सरलीकरण में। तीसरा, साइबर सुरक्षा और उद्यमिता जोखिम के संबंध में। हालांकि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का जोर वित्तीय समावेशन जैसे सामाजिक उत्तरदायित्व पर भी होता है।

रिपोर्ट के अनुसार, ‘सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रहे हैं और बदलाव के अनुसार काम करने के तरीके व प्रकिया को बेहतर कर रहे हैं। इसमें सबसे जटिल मुद्दा यह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक कहीं अधिक व्यापक व विविधीकृत संचालन व कारोबार करते हैं।

बैंकों के वरिष्ठ प्रबंधन में आमतौर पर मुख्य कार्याधिकारी, सहायक कार्याधिकारी, मुख्य वित्तीय अधिकारी और अन्य वरिष्ठ कार्यकारी अधिकारीगण शामिल हैं। मध्यम स्तर में ब्रांच मैनेजर, डिवीजनल मैनेजर, जनरल मैनेजर आदि शामिल हैं। कनिष्ठ स्तर पर प्रोबेशनरी अधिकारी, क्लर्क व अन्य शामिल होते हैं।

डेलॉयट इंडिया की ह्यूमन कैपिटल कंसल्टिंग की साझेदार दीप्ति अग्रवाल ने कहा कि इन बैंकों में वरिष्ठ प्रबंधन आमतौर पर संचालन गतिविधियों पर अधिक नजर रखता है और नई डिजिटल रुझानों किस तरह से लागू किया जा रहा है।

First Published - April 22, 2024 | 9:51 PM IST

संबंधित पोस्ट