प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
बैंकों ने जमा ऋणपत्रों (सीडी) पर अपनी निर्भरता बढ़ा दी है। दरअसल, बैंकों के लिए जमा राशि में वृद्धि चुनौतीपूर्ण हो रही है और वे अर्थव्यवस्था में ऋण वृद्धि के साथ तालमेल स्थापित नहीं कर पा रहे हैं। भारतीय रिजर्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार ऋणदाताओं ने 15 फरवरी को समाप्त पखवाड़े में 1.34 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सीडी जारी किए। यह किसी भी पखवाड़े में अब तक का सबसे अधिक है। हालांकि कुल बकाया सीडी बढ़कर 6.62 लाख करोड़ रुपये के नए सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए हैं।
बैंकों की सीडी पर निर्भरता उस दौर में भी बढ़ी है जब उनकी सीडी दरें उच्च बनी हुई हैं। प्रमुख ऋणदाता एचडीएफसी बैंक और आईसीआईसीआई बैंक 6.8 प्रतिशत से कुछ अधिक पर अल्पकालिक धन जुटा रहे हैं। कई मध्यम आकार के निजी बैंकों और सरकारी बैंकों ने 7 प्रतिशत या उससे अधिक पर उधार लिया है जबकि उत्कर्ष स्मॉल फाइनैंस बैंक ने सीडी बाजार में 7.9 प्रतिशत जितनी ऊंची दरों पर प्रवेश किया है। विशेषज्ञों ने कहा कि भले ही रिजर्व बैंक ने प्रणाली में नकदी डाली है ताकि उनमें भविष्य में और तेजी नहीं आए। हालांकि अल्पकालिक दरें ऊंची बनी हुई हैं।
इसके अतिरिक्त उन्होंने कहा कि बैंक सीडी पर निर्भर रहना जारी रखेंगे। इसका कारण यह है कि ऋण वृद्धि वित्त वर्ष 26 के व्यावसायिक अंत की ओर और तेजी से बढ़ती है, जब तक कि वे लंबी अवधि के धन के लिए बॉन्ड बाजार में प्रवेश नहीं करते।
बीते समय एक लाख करोड़ रुपये से अधिक की सीडी 21 मार्च के पखवाड़े में जारी की गई थी। तब बैंकों और वित्तीय संस्थानों ने सीडी जारी कर 1.17 लाख करोड़ रुपये जुटाए थे। उस समय इंडसइंड बैंक ने सीडी मार्केट से जबरदस्त उधारी जुटाई थी। इंडसइंड बैंक ने डेरिवेटिव पोर्टफोलियो में विसंगतियां के खुलासे के बाद नकदी कवरेज अनुपात पर बढ़े दबाव के मद्देनजर सीडी मार्केट से अधिक उधारी जुटाई थी।
आंकड़ों से पता चलता है कि बैंकों ने इस साल जनवरी से लगभग 2.4 लाख करोड़ रुपये जारी किए हैं। बैंकों ने वर्ष 2025 में 12 लाख करोड़ रुपये से अधिक के सीडी जारी किए।
केयर रेटिंग्स के सीनियर डायरेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा, ‘सीडी की मात्रा में उछाल ऋण वृद्धि के अनुरूप जमा जुटाने में बैंकों के सामने आने वाली चुनौतियों को दर्शाता है। हालांकि 31 जनवरी को समाप्त पखवाड़े में निरपेक्ष रूप से ऋण और जमा वृद्धि मोटे तौर पर समान थी। जमा का एक हिस्सा सीआरआर और एसएलआर जैसी वैधानिक आवश्यकताओं के लिए अलग रखा जाता है। इससे उधार देने योग्य संसाधन सीमित हो जाते हैं। सालाना आधार पर जमा वृद्धि ऋण वृद्धि से लगभग 200 आधार अंक कम है और ऋण-जमा रेशियो पहले से ही ऊंचा होने के कारण बैंक बढ़ती ऋण मांग को पूरा करने के लिए तेजी से सीडी पर निर्भर हैं।’
रिजर्व बैंक के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि 31 जनवरी को समाप्त पखवाड़े में ऋण वृद्धि 14.6 प्रतिशत और जमा वृद्धि 12.5 प्रतिशत रही, जो ऋण – जमा वृद्धि के लगभग 200 आधार अंक के अंतर को दर्शाती है। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि पखवाड़े में ऋण में 3.41 लाख करोड़ रुपये या 1.7 प्रतिशत और जमा में 3.82 लाख करोड़ रुपये या 1.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।