भारत को अपनी डेटा सेंटर नीति के ढांचे में ग्रीन एनर्जी के हिस्सों को शामिल करना होगा, क्योंकि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) प्रणाली में तेजी से बढ़ोतरी की वजह से देश की डिजिटल फुटप्रिंट लगातार बढ़ रहा है। इससे ज्यादा स्टोरेज क्षेत्र की मांग पैदा हो रही है। विशेषज्ञों ने यह जानकारी दी है।
दो दिवसीय कार्यक्रम ‘बीएस मंथन समिट’ के दौरान पैनल डिस्कशन में यूसी बर्कले के गोल्डमैन स्कूल ऑफ पब्लिक पॉलिसी के इंडिया एनर्जी ऐंड क्लाइमेट सेंटर के कंट्री डायरेक्टर मोहित भार्गव, एक्मे सोलर के मुख्य कार्य अधिकारी निखिल धींगड़ा और योट्टा डेटा सर्विसेज के सह-संस्थापक, प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्य अधिकारी सुनील गुप्ता जैसे विशेषज्ञों ने कहा कि देश के स्टोरेज बाजार की पर्यावरण अनुकूल क्षमता और दक्षता बढ़ाने के लिए संपूर्ण ‘ग्रीन’ डेटा सेंटर नीति की जरूरत है।
भार्गव ने कहा, ‘राष्ट्रीय डेटा सेंटर नीति में हमें ‘ग्रीन’ शब्द जोड़ने की जरूरत है। भारत ऐसा स्थान है, जहां असल में सबसे अधिक स्तर वाले ग्रीन डेटा सेंटर हो सकते हैं। इसलिए राष्ट्रीय ग्रीन डेटा सेंटर नीति सच में काफी जरूरी कदम और संदेश हो सकती है।’ उन्होंने यह भी कहा कि भारत दूसरे देशों के मुकाबले कम कीमत पर ग्रीन एनर्जी का उत्पादन कर सकता है।
एक्मे सोलर के प्रमुख धींगड़ा ने नवीकरण ऊर्जा उत्पादन और आपूर्ति करने में देश की प्रतिस्पर्धी क्षमता के बारे में भार्गव के विचारों को दोहराया और कहा कि ज्यादातर उत्पादित बिजली उससे सस्ती होती है, जिसे राज्य विद्युत बोर्ड पेशकश कर पाते है।
धींगड़ा ने कहा, ‘बिजली के मामले में भारत काफी प्रतिस्पर्धी है और नवीकरण ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से दूसरे स्रोतों से आगे है। राज्य विद्युत बोर्ड जो आपूर्ति करते हैं, उससे सस्ती है। ज्यादातर डेटा सेंटर ने नवीकरण ऊर्जा परिचालकों के साथ गठजोड़ किया है। इसलिए नवीकरण (ऊर्जा) चौबीसों घंटे अतिरिक्त मांग पूरी करने के लिए हरदम तैयार है।’
देश में सबसे बड़े डेटा सेंटर, ग्राफिक्स प्रोसेसिंग यूनिट (जीपीयू) और एआई सर्वर होस्टिंग क्षमता वाली कंपनियों में शुमार योट्टा के प्रमुख गुप्ता ने भी इस बात पर सहमति जताई और कहा कि सभी सरकारी नीतियों में बिजली उपयोग की दक्षता और दूसरे मानदंडों के आधार पर प्रोत्साहन दिए जाते हैं।
गुप्ता ने कहा, ‘चाहे केंद्र सरकार की नीतियां हो या राज्य सरकार की, वे कई प्रोत्साहनों को बिजली इस्तेमाल की दक्षता और पर्यावरण अनुकूलता के आधार पर जोड़ रही हैं। इसलिए सरकार का यही तरीका है। हालांकि हमें वित्तीय प्रोत्साहनों की जरूरत नहीं है, लेकिन सरकार कह रही है कि अगर हम कोई वित्तीय प्रोत्साहन देते हैं, तो हम उसे इस बात से जोड़ेंगे कि आप कितने सुव्यवस्थित और पर्यावरण अनुकूल हैं।