केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी बिज़नेस स्टैंडर्ड मंथन 2026 में अपनी बात रखते हुए
केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि संपत्ति मुद्रीकरण के बड़े लक्ष्य के साथ सरकार राजमार्ग निर्माण में बिल्ट ऑपरेट ट्रांसफर (बीओटी) मॉडल पर जोर देगी, जिसमें निजी डेवलपर राजमार्ग बनाने में धन लगाते हैं। मंत्री ने बीएस मंथन में कहा, ‘हम बीओटी को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दे रहे हैं। इंजीनियरिंग-खरीद-निर्माण (ईपीसी) का हमारा अनुभव अच्छा नहीं रहा है।’
उन्होंने कहा कि ईपीसी मॉडल में कॉन्ट्रैक्टर की सिर्फ 5 साल के रखरखाव की जिम्मेदारी होती है लेकिन मंत्रालय ने पाया है कि इस अवधि के बाद सड़क की गुणवत्ता अच्छी नहीं रह जाती है। मंत्री ने कहा, ‘ऐसे में हम सिर्फ ऐसे मॉडल से सड़कें बना रहे हैं, जहां कॉन्ट्रैक्टर की 10-15 साल की जिम्मेदारी हो और अगर गुणवत्ता अच्छी नहीं हुई तो हम उनकी बैंक गारंटी जब्त कर लेंगे।’
गडकरी ने कहा कि सरकार के पास पहले से ही 7 बीओटी परियोजनाएं कतार में हैं, जिनकी लागत 60,000 करोड़ रुपये है और हम उम्मीद करते हैं कि इसमें निजी क्षेत्र से भारी निवेश आएगा। उन्होंने कहा कि इस मॉडल में रखरखाव की जिम्मेदारी निवेशक और कॉन्ट्रैक्टर की होती है, जिससे उनकी जवाबदेही अधिक हो जाती है।
राजमार्गों का निर्माण कई मॉडल से होता है। ईपीसी और हाईब्रिड एन्युटी मॉडल (एचएएम) में पूरा धन सरकार मुहैया कराती है। वहीं बीओटी में निजी क्षेत्र धन मुहैया कराता है। मंत्री ने कहा कि धन जुटाने में कोई दिक्कत नहीं है। वित्त वर्ष 2026-30 के लिए संपत्ति मुद्रीकरण योजना में राजमार्ग, मल्टीमोडल लॉजिस्टिक्स पार्कों और रोपवे से सबसे ज्यादा 4.42 लाख करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। संपत्ति मुद्रीकरण योजना में सार्वजनिक निजी हिस्सेदारी के माध्यम से नई संपत्तियों का सृजन और चल रही बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में निजी पूंजी लाना शामिल है।
मंत्री ने कहा, ‘हमारा बजट 3.2 लाख करोड़ रुपये का है और मैंने मुद्रीकरण के लिए पहले ही 12 से 15 लाख करोड़ रुपये के राजमार्गों को तैयार कर लिया है।’
सरकार इस समय राजमार्ग के ठेकों की बोली के ढांचे को हर तरह से दुरुस्त कर रही है, जिसमें निवेश आकर्षित करना और विवादों की संभावना को कम करना शामिल है।
उन्होंने कहा, ‘हमने कंसेशन एग्रीमेंट का नया मॉडल तैयार किया है, जिसमें परियोजना ईपीसी या हाइब्रिड एन्युटी पर हो सकती है, लेकिन 15 साल के रखरखाव की गारंटी होगी और इसकी जिम्मेदारी कॉन्ट्रैक्टर की होगी।’
उन्होंने कहा कि सरकार खर्च में तेजी लाने के साथ राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता पर ध्यान देगी। मंत्री ने कहा, ‘समस्या यह है कि हमें सड़क की गुणवत्ता से समझौता किए बिना खर्च की रफ्ता बढ़ानी होगी।’ उन्होंने कहा कि आमतौर पर जमीन अधिग्रहण और अंतर विभागीय मंजूरी में देरी होती है।
गडकरी ने कहा कि भारत का वाहन क्षेत्र अगले 5 साल में दुनिया का सबसे बड़ा क्षेत्र बन जाएगा। उन्होंने कहा, ‘हमारा वाहन उद्योग अर्थव्यवस्था के लिए एक संपदा है। जब मैंने मंत्री के रूप में कार्यभार ग्रहण किया, तो हम दुनिया में सातवें स्थान पर थे। अभी कुछ महीने पहले जापान को पीछे छोड़कर तीसरे स्थान पर आ गए हैं। सबसे बड़ा बाजार अमेरिका है, जिसका उद्योग 79 लाख करोड़ रुपये का है, उसके बाद चीन 49 लाख करोड़ रुपये के साथ दूसरे स्थान पर है और अब भारत 23 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। मेरा मिशन और लक्ष्य अगले 5 साल में भारत को पहले स्थान पर लाना है।’
मंत्री ने कहा कि वैकल्पिक ईंधन वाहन उद्योग की वृद्धि में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। लीथियम ऑयन बैटरी की लागत 150 डॉलर प्रति किलोवॉट से घटकर 50 डॉलर प्रति किलोवॉट रह गई है। उन्होंने कहा, ‘मेरे खयाल से 6 महीने के भीतर पेट्रोल, डीजल और इलेक्ट्रिक वाहन की कीमत एक समान हो जाएगी।’
मंत्री ने उम्मीद जताई कि वाहनों की संख्या बढ़ने के साथ ईवी की लागत में कमी आएगी। मंत्री ने राजमार्ग विकास और गवर्नेंस में नई तकनीकों को शामिल करने के अपने विभाग के एजेंडे के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, ‘नए शोध, नवोन्मेष और तकनीक समाज और देश के विकास के हित में है क्योंकि यह लागत के हिसाब से बेहतर और पर्यावरण के अनुकूल हैं।’