दुनिया के बाजार में भारत के प्रदर्शन के मामले में ‘कड़वी सच्चाई’ यह है कि अगर अचानक ही वाकई एआई की कहानी फेल हो जाती है, तो क्या भारत दुनिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा
जेफरीज में इक्विटी रणनीति के वैश्विक प्रमुख क्रिस्टोफर वुड ने मंगलवार को कहा कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से जुड़े सौदों पर, खासकर अमेरिका में, इस साल सवाल खड़े हो सकते हैं। इन करारों का अमेरिकी शेयर बाजार पर खासा असर रहा है। कोटक म्युचुअल फंड के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह के अनुसार भारत की ‘एआई स्टोरी’ अभी भी सामने आ रही है। वुड का मानना है कि शेयर बाजार की नजर में जब तक एआई से संबंधित पूंजीगत खर्च बढ़ रहा है, भारतीय बाजार कमजोर प्रदर्शन करते रहेंगे। नई दिल्ली में बिजनेस स्टैंडर्ड मंथन समिट में वुड ने कहा कि एआई का चक्र लगभग तीन साल पहले तब शुरू हुआ था, जब माइक्रोसॉफ्ट ने 2023 में ओपनएआई में निवेश किया था। तब बड़ी तकनीकी कंपनियों (हाइपरस्केलरों ) ने ओपनएआई से पैदा हुए प्रतिस्पर्धी खतरे को लेकर कदम उठाए थे।
वुड ने कहा, ‘मेरे विचार में यह वह साल है जब अमेरिकी शेयर बाजार सवाल उठाना शुरू करेंगे कि क्या इन तकनीकी कंपनियों को अपने निवेश पर कोई रिटर्न मिल रहा है। हमने यह प्रक्रिया कैलेंडर वर्ष 2026 की पहली तिमाही के परिणाम सत्र में शुरू की थी, जिसमें बाजार का सवाल था कि क्या इन कंपनियों को पर्याप्त रिटर्न मिलेगा क्योंकि उनके बिजनेस मॉडल हलके से भारी होते गए हैं।’
चार दिग्गज तकनीकी कंपनियों ने इस साल एआई में पूंजीगत निवेश के तौर पर 620 अरब डॉलर खर्च करने का अनुमान जताया है, जिससे एआई शेयरों में तेजी आ रही है, खासकर दक्षिण कोरिया और ताइवान में। इसके बावजूद, वुड का मानना है कि एआई खर्च पर रिटर्न को लेकर जितने ज्यादा सवाल उठेंगे, उतनी ही अधिक चिंताएं डेटा सेंटर में संभावित अधिक क्षमता को लेकर होंगी।
वुड ने कहा, ‘लेकिन जिस दिन बाजार को एहसास होगा कि उन्होंने (एआई पर) ज्यादा खर्च कर दिया है और पूंजीगत खर्च में अचानक भारी गिरावट आए, तो भारत फिर से बेहतर प्रदर्शन करना शुरू कर सकता है। फिलहाल तो भारत वैश्विक एआई ट्रेड से उलट दिशा में है।’
शाह ने कहा, ‘जब हम ग्लोबल एआई कंपनियों की बात सुनते हैं, तो वे कहती हैं कि सॉफ्टवेयर खत्म हो गया है क्योंकि एआई उसकी कॉपी कर सकता है जिसे करने में प्रोग्रामरों को सालों लग गए। लेकिन जब हम भारतीय आईटी कंपनियां के पास जाते हैं तो वे कहती हैं कि प्रोग्रामिंग उनके काम का सिर्फ पांचवां हिस्सा है। इसमें क्लाइंट इंटरैक्शन, डिजाइनिंग और कम्युनिकेशन के अलावा दूसरी चीजें भी हैं।’
भारत की आगामी राह के बारे में शाह का मानना है कि लार्ज लैंग्वेज मॉडल में भारत के दिग्गज बनने की उम्मीद कम है। उन्होंने कहा, ‘हमारा सबसे अच्छा दांव एलएलएम का इस्तेमाल करके ऐप्लीकेशन या स्मॉल लैंग्वेज मॉडल (एसएलएम) बनाना है, जो दुनिया को सॉल्युशन देते हैं। भारत में सिर्फ बड़ी लिस्टेड कंपनियां ही नहीं, बल्कि छोटे स्टार्टअप भी एआई के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।’
शाह ने कहा कि भारतीय आईटी शेयरों में भारी बिकवाली समझ से बाहर है, क्योंकि इस उद्योग के पास अनिश्चितता का सामना करने के लिए जो भी टूल्स हैं, वे इस समय काम नहीं कर रहे हैं। आईटी शेयरों में भारी गिरावट के बावजूद, शाह ने कहा कि एक भी (आईटी) मालिक या वरिष्ठ कर्मचारी, जिसके पास (ईएसपीओ) है, ने अपनी पोजीशन नहीं बेची है। वुड के मुताबिक दुनिया के बाजार में भारत के प्रदर्शन के मामले में ‘कड़वी सच्चाई’ यह है कि अगर अचानक ही वाकई एआई की कहानी फेल हो जाती है, तो क्या भारत दुनिया में सबसे अच्छा प्रदर्शन करेगा।
फंड प्रबंधन पर शाह का मानना है कि भविष्य में अच्छा फंड मैनेजर कौन होगा, यह तय करने में किस्मत अहम रोल निभाएगी क्योंकि निवेशकों और फंड प्रबंधकों के पास वही/एक जैसे टूल्स हो सकते हैं जिनका इस्तेमाल ऐसेट एलोकेशन के लिए किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि आगे चलकर, फंड प्रबंधन को ऐसे लोग लीड करेंगे जो सॉल्युशन देने के लिए एआई का इस्तेमाल कर सकें।