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IT शेयरों में गिरावट जारी, फिर भी मालिक क्यों नहीं बेच रहे हिस्सेदारी? बीएस मंथन में एक्सपर्ट्स ने बताई वजह

भारत मंडपम में आयोजित बीएस मंथन में विशेषज्ञों ने कहा - एआई पर भारी खर्च से बदला वैश्विक निवेश का रुख, भारत के लिए लंबी अवधि की ग्रोथ सबसे बड़ा सवाल

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देवव्रत वाजपेयी   
Last Updated- February 24, 2026 | 2:33 PM IST

अमेरिका के शेयर बाजार में पिछले कुछ सालों से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का बहुत बड़ा असर रहा है। बड़ी-बड़ी टेक कंपनियां AI पर भारी पैसा खर्च कर रही हैं। लेकिन अब सवाल उठने लगा है कि क्या उन्हें इस निवेश से सही मुनाफा मिलेगा?

अमेरिका में क्या हो रहा है?

जेफरीज के क्रिस्टोफर वुड ने दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित BS Manthan कार्यक्रम में कहा कि AI का दौर करीब तीन साल पहले शुरू हुआ, जब माइक्रोसॉफ्ट ने 2023 में ओपनएआई में निवेश किया। इसके बाद बड़ी टेक कंपनियों ने कंपटीशन के कारण AI पर भारी खर्च शुरू कर दिया।

इस साल चार बड़ी टेक कंपनियां मिलकर करीब 620 अरब डॉलर AI पर खर्च करने वाली हैं। इसी वजह से ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों के शेयर बाजार में तेजी आई है, क्योंकि वहां की कंपनियां सेमीकंडक्टर बनाती हैं, जिनकी AI में बड़ी जरूरत होती है।

लेकिन अब बाजार में यह चिंता बढ़ रही है कि इतनी बड़ी पूंजी खर्च करने के बाद क्या कंपनियों को सही रिटर्न मिलेगा? अगर बाजार को लगे कि कंपनियों ने जरूरत से ज्यादा खर्च कर दिया है और अचानक AI पर खर्च कम हो गया, तो बाजार में गिरावट आ सकती है।

वुड का मानना है कि अभी भारत “रिवर्स AI ट्रेड” की स्थिति में है। मतलब, जब तक अमेरिका में AI पर खर्च तेज रहेगा, तब तक भारत का बाजार पीछे रह सकता है। लेकिन अगर AI का जोश ठंडा पड़ा, तो भारत फिर से बेहतर प्रदर्शन कर सकता है।

भारत के लिए क्या मायने?

कोटक म्युचुअल फंड के नीलेश शाह का कहना है कि भारत में AI की कहानी अभी शुरू ही हुई है। उन्होंने कहा कि दुनिया की बड़ी AI कंपनियां कहती हैं कि AI की वजह से सॉफ्टवेयर की जरूरत कम हो सकती है। लेकिन भारतीय IT कंपनियों का काम सिर्फ कोडिंग करना बस नहीं है। उनका काम क्लाइंट से बातचीत, डिजाइन, सलाह और कई तरह की सेवाएं देना भी है।

शाह का मानना है कि भारत बड़े भाषा मॉडल बनाने में शायद बहुत आगे न हो, लेकिन भारत इन मॉडलों का इस्तेमाल करके छोटे और काम के समाधान बना सकता है। कई छोटे भारतीय स्टार्टअप्स भी AI के क्षेत्र में अच्छा काम कर रहे हैं।

IT शेयरों में गिरावट

उन्होंने कहा कि शेयर बहुत गिरे हैं, लेकिन न तो किसी कंपनी के मालिक ने और न ही किसी बड़े अधिकारी ने अपने शेयर बेचे हैं। आम तौर पर जब अंदर के लोग शेयर बेचते हैं, तो माना जाता है कि कंपनी में कुछ गड़बड़ है। यहां ऐसा नहीं हुआ है। शाह के मुताबिक, शेयर की कीमत इस बात पर निर्भर करती है कि आगे चलकर कंपनी कितनी तेजी से बढ़ेगी। अगर लोगों को लगे कि भविष्य में बढ़त धीमी होगी, तो शेयर 30 से 50 प्रतिशत तक गिर या बढ़ सकते हैं। उन्होंने कहा कि अभी के कारोबार पर ज्यादा असर नहीं है। असली चिंता लंबे समय की विकास दर को लेकर है। उन्होंने यह भी कहा कि AI के क्षेत्र में भारत से कुछ छोटी अच्छी कंपनियां निकल सकती हैं। लेकिन बड़ा सवाल यह है कि क्या भारतीय आईटी कंपनियां इस नई तकनीक से फायदा उठाएंगी या खुद नुकसान में चली जाएंगी।

वहीं, क्रिस्टोफर वुड ने कहा कि अगर अचानक AI का जोश ठंडा पड़ गया, तो देखना होगा कि भारत का बाजार दुनिया के मुकाबले कैसा प्रदर्शन करता है।

फंड मैनेजमेंट में AI की भूमिका

नीलेश शाह ने कहा कि आने वाले समय में अच्छा फंड मैनेजर कौन होगा, इसमें किस्मत भी अहम होगी। क्योंकि निवेशक और फंड मैनेजर, दोनों के पास लगभग एक जैसे साधन होंगे। उन्होंने कहा कि आगे वही लोग सफल होंगे जो AI का सही इस्तेमाल करना जानते होंगे। शाह ने बताया कि आज AI की ताकत बहुत ज्यादा है। इसलिए उनकी कंपनी ने निवेश से जुड़े काम में इसका उपयोग शुरू किया है। इससे पुराने आंकड़ों को बेहतर समझने और नए रुझान पकड़ने में मदद मिलती है। उन्होंने हंसते हुए कहा, ‘मेरी नौकरी बचेगी या नहीं, यह पक्का नहीं है, लेकिन हम कोशिश कर रहे हैं।’

विदेशी निवेशकों की निकासी

क्रिस्टोफर वुड के मुताबिक, विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार से काफी पैसा निकाल लिया है। उन्होंने कहा कि कई सालों तक विदेशी निवेशक भारत में ज्यादा निवेश किए हुए थे, क्योंकि उभरते बाजारों में भारत अच्छा प्रदर्शन कर रहा था। लेकिन अब AI के बढ़ते असर ने निवेश का रुख बदल दिया है। ताइवान और दक्षिण कोरिया जैसे देशों में सेमीकंडक्टर कंपनियों को AI पर बढ़ते खर्च का सीधा फायदा मिल रहा है। इसलिए वैश्विक फंड मैनेजर वहां ज्यादा पैसा लगा रहे हैं। 2025 की शुरुआत में कुछ चिंताएं जरूर थीं, लेकिन AI पर खर्च बढ़ता रहा और सेमीकंडक्टर शेयरों में तेज उछाल आया। इसका फायदा उन बाजारों को मिला। भारत को AI के हार्डवेयर कारोबार से सीधे जुड़ा नहीं माना जाता, इसलिए यहां बिकवाली देखी गई। साथ ही, चीन के शेयर बाजार में दोबारा दिलचस्पी बढ़ने से भी विदेशी निवेशकों ने भारत में अपनी हिस्सेदारी घटा दी।

First Published : February 24, 2026 | 2:26 PM IST