प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
निजी क्षेत्र के 2 बैंकों में पिछले एक साल के दौरान धोखाधड़ी हुई है, हालांकि दोनों के मामले अलग-अलग प्रकृति के हैं। पिछले साल मार्च में इंडसइंड बैंक ने डेरिवेटिव बुक और माइक्रो लोन पोर्टफोलियो के अकाउंटिंग में हुई चूक के कारण लगभग 2,200 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी की सूचना दी थी। अब निजी क्षेत्र के आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने चंडीगढ़ में अपनी एक शाखा में सरकारी जमा से संबंधित 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का खुलासा किया है।
नोमूरा ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हालांकि यह मुद्दा स्थानीय प्रतीत होता है, लेकिन यह गवर्नेंस और शाखा-स्तर के नियंत्रणों को लेकर चिंता पैदा करता है।’ नोमुरा की रिपोर्ट में कहा गया है, ‘जमा से जुड़ी धोखाधड़ी में बैंक आमतौर पर जमाकर्ताओं की रक्षा करते हैं। पीऐंडएल के माध्यम से नुकसान चिह्नित होने के बाद इसके लिए उच्च/अक्सर पूर्ण प्रोविजनिंग होती है। ऐसे मामलों में रिकवरी आमतौर पर बात में होती है।’ नोमूरा ने कहा कि इस मसले में स्पष्टता का इंतजार है। मैक्वेरी ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘हमारा मानना है कि निवेशकों, नियामकों और सामान्य तौर पर बैंकिंग प्रणाली को गवर्नेंस और नियंत्रणों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता होगी। यह मुद्दे बहुत महत्त्वपूर्ण हैं।’
नोमूरा के अनुसार सामंजस्य के तहत 590 करोड़ रुपये राशि से कॉमन इक्विटी टियर-1 (सीईटी1) पर 19 बीपीएस का प्रभाव पड़ सकता है, जो दिसंबर 2025 तक 14.23 प्रतिशत था।
ब्रोकिंग फर्म आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने कहा है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक का हरियाणा में जमा 19,800 करोड़ रुपये है, जो बैंक में कुल जमा का 6.8 प्रतिशत है और राज्य सरकार के पैनल से बाहर निकाले जाने पर बैंक से 2,000 करोड़ रुपये की निकासी होगी।