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यूपीआई से एग्रीगेटर को नहीं मिला कुछ

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Last Updated- December 11, 2022 | 4:25 PM IST

वित्त मंत्रालय के बयान की प्रतिक्रिया में आज उद्योग के प्रतिनिधियों ने कहा कि पेमेंट एग्रीगेटरों ने यूनाइटेड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) को लोकप्रिय बनाया, लेकिन उससे बमुश्किल कोई कमाई हुई। वित्त मंत्रालय ने रविवार को एक बयान में कहा है कि सरकार की इन सेवाओं पर कोई शुल्क लगाने की योजना नहीं है। रविवार को मंत्रालय ने ट्विटर पर लिखा, ‘सेवा प्रदाताओं की लागत की रिकवरी की संबंधी चिंता का समाधान अन्य साधनों से किया जाएगा।’ वित्त मंत्रालय ने भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के चर्चा पत्र की प्रतिक्रिया में यह बयान जारी किया है, जिसमें सुझाव दिया गया है कि यूपीआई भुगतान पर विभिन्न धनराशि ब्रैकेट के मुताबिक शुल्क लगाया जा सकता है।
इस उद्योग के संगठन पेमेंट काउंसिल आफ इंडिया (पीसीआई) के चेयरमैन और इन्फीबीम एवेन्यूज के कार्यकारी निदेशक ने कहा कि पेमेंट एग्रीगेटरों को डिजिटल भुगतान, खासकर यूपीआई को बढ़ावा देने और उसे लोकप्रिय बनाने, प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) टर्मिनल स्थापित करने, क्यूआर कोड देने में 25,000 करोड़ रुपये से ज्यादा नुकसान उठाना पड़ा है। उन्होंने कहा,  ‘वित्त मंत्रालय द्वारा दी गई सभी सहायता केवल बैंकों को मिली है, (किसी बैंक के पास यूपीआई का एकल अंक में भी कारोबार नहीं होता) किसी भी पेमेंट एग्रीगेटर या सुविधा प्रदाता को कुछ भी नहीं मिला है।’

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First Published - August 22, 2022 | 11:15 PM IST

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