facebookmetapixel
Advertisement
RBI MPC: EMI बढ़ेगी या मिलेगी राहत? RBI की मीटिंग से क्या हैं उम्मीदेंITC Share Price: Q1 नतीजों के बाद शेयर में आई रफ्तार, 4% उछला स्टॉक; ब्रोकरेज ने बढ़ाया टारगेट प्राइसजुलाई में ज्यादा बारिश का असर, खरीफ रकबा में कमी घटकर 3% से भी कमTechnical Picks: अगले 3-4 हफ्तों में ये 3 शेयर करा सकते हैं मोटी कमाई, 21% तक तेजी की उम्मीदMaruti की 50% मार्केट शेयर पर नजर, Brezza और EV पर बड़ा दांव; ब्रोकरेज बोले- 20% तक आ सकती है तेजीकमजोर नहीं, देर से संभला मॉनसून! अगस्त-सितंबर की बारिश बदल सकती है पूरे साल की तस्वीरManufacturing PMI: जुलाई में मैन्युफैक्चरिंग PMI गिरकर 53.5 पर, करीब 5 साल के निचले स्तर पर पहुंची फैक्ट्री गतिविधियांManipal Health Enterprises IPO Allotment: आज जारी होगा शेयर अलॉटमेंट, ऐसे करें स्टेटस चेक; जानें लेटेस्ट GMP और लिस्टिंग की उम्मीद2030 के बाद Tata Steel का कच्चा माल कहां से आएगा? कंपनी ने खोला पूरा प्लान, शेयर पर कितना है टारगेटअलविदा ग्लास्गो, अब अहमदाबाद की बारी… भारत को मिली राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी की बैटन

जून में भी कम रही काम की मांग

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 3:06 AM IST

लगातार दूसरे महीने मनरेगा योजना के तहत काम की मांग 2020 की तुलना में कम रही, जो इस साल के लिए असाधारण वर्ष था।
ताजा आंकड़ों से पता चलता है कि करीब 3.51 करोड़ परिवारों ने मनरेगा के तहत जून, 2021 में काम की मांग की, जो 2020 में इस माह के दौरान काम की मांग की तुलना में करीब 21.48 प्रतिशत कम है।
मई, 2021 में 2.76 करोड़ परिवारों ने इस योजना के तहत काम की मांग की थी, जो पिछले साल के समान महीने की तुलना में 26.01 प्रतिशत कम था।
लेकिन मई महीने में मांग में कमी मुोख्य रूप से कोरोना के मामले बढऩे की वजह से आई, क्योकि दूसरी लहर ने गांवों को बुरी तरह चपेट में ले लिया था।
जून, 2021 में लगातार दूसरे महीने काम की मांग में कमी इसलिए भी हो सकती है क्योंकि कोरोना के मामले घटने के कारण विस्थापित श्रमिक शहरों की ओर काम पर लौटने लगे थे और कोविड संबंधी प्रतिबंध धीरे धीरे खत्म किए जा रहे थे।
मनरेगा संघर्ष मोर्चा से जुड़े देवमाल्य नंदी ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, ‘पिछले साल की तुलना में मनरेगा में काम की मांग में हम 15-20 प्रतिशत कमी की उम्मीद कर रहे हैं क्योंकि बड़ी संख्या में लोग शहरों में अपने नियमित कामकाज पर फिर से वापस लौट आए और यह मांग के आंकड़ों में नजर आ रहा है।’ हालांकि नंदी का कहना है कि मनरेगा पर काम की मांग के आंकड़े कम करके दिखाए हुए हो सकते हैं, जो संभवत: मांग का सही अनुमान न हो और जमीनी स्तर पर काम की जरूरत हो।
बहरहाल मनरेगा में काम की मांग के हिसाब से वर्ष 2020 असाधारण साल था, क्योंकि देशव्यापी लॉकडाउन लगााय गया था और बड़े पैमाने पर विस्थापित होकर लोग शहरों से ग्रामीण इलाकों में पहुंचे थे। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि मांग के विश्लेषण का बेहतर तरीका यह हो सकता है कि इसकी तुलना एक सामान्य साल से की जाए।

Advertisement
First Published - July 1, 2021 | 11:50 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement