facebookmetapixel
वित्त मंत्रालय का बड़ा कदम: तंबाकू-सिगरेट पर 1 फरवरी से बढ़ेगा शुल्कAuto Sales December: कारों की बिक्री ने भरा फर्राटा, ऑटो कंपनियों ने बेच डालें 4 लाख से ज्यादा वाहनकंपस इंडिया अब ट्रैवल रिटेल में तलाश रही मौके, GCC पर बरकरार रहेगा फोकसलैब में तैयार हीरे की बढ़ रही चमक, टाइटन की एंट्री और बढ़ती फंडिंग से सेक्टर को मिला बड़ा बूस्टMCA ने कंपनी निदेशकों के KYC नियमों में दी बड़ी राहत, अब हर साल नहीं बल्कि 3 साल में एक बार करना होगा अपडेटहाइपरसर्विस के असर से ओला इलेक्ट्रिक की मांग और बाजार हिस्सेदारी में तेजी, दिसंबर में 9,020 स्कूटरों का हुआ रजिस्ट्रेशनदिसंबर 2025 में इलेक्ट्रिक दोपहिया बाजार में उछाल, TVS टॉप पर; बजाज–एथर के बीच मुकाबला तेजव्हीकल रजिस्ट्रेशन में नया रिकॉर्ड: 2025 में 2.8 करोड़ के पार बिक्री, EVs और SUV की दमदार रफ्तारEditorial: गिग कर्मियों की हड़ताल ने क्यों क्विक कॉमर्स के बिजनेस मॉडल पर खड़े किए बड़े सवालभारत का झींगा उद्योग ट्रंप शुल्क की चुनौती को बेअसर करने को तैयार

उधारी जुटाएं राज्य, सुझाए दो विकल्प

Last Updated- December 15, 2022 | 2:55 AM IST

केंद्र ने आज राज्यों से कहा कि चालू वित्त वर्ष में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के तहत मुआवजे में आई कमी की भरपाई के लिए वे बाजार से 2.35 लाख करोड़ रुपये तक उधार ले सकते हैं और इसे चुकाने की जिम्मेदारी राज्यों की नहीं होगी। इसके लिए हानिकारक एवं विलासितापूर्ण वस्तुओं पर 30 जून, 2022 की तय मियाद के बाद भी उपकर वसूला जाता रहेगा और उपकर से जुटी रकम का इस्तेमाल कर्ज चुकाने में किया जाएगा।
जीएसटी परिषद की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि उधारी में मदद के लिए केंद्र भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से बात करेगा ताकि राज्य उधारी के लिए हड़बड़ी न करें। अगर सभी राज्य बाजार में पहुंच जाएंगे तो बॉन्ड प्रतिफल एकाएक चढ़ जाएगा। वित्त सचिव ए बी पांडेय ने बताया कि बाजार से उधार लेने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों को दो विकल्प दिए हैं। पहले विकल्प के तहत राज्य तय फॉर्मूले के तहत मुआवजे में कमी की भरपाई के लिए 97,000 करोड़ रुपये उधार ले सकते हैं। दूसरे विकल्प के तहत राज्य 2.35 लाख करोड़ रुपये उधार ले सकते हैं।
पांडेय ने बताया कि वित्त वर्ष 2020-21 में मुआवजा उपकर के मद में केवल 65,000 करोड़ रुपये जुटने का अनुमान है, जबकि 3 लाख करोड़ रुपये की जरूरत है। मगर कानूनन केवल 1.62 लाख करोड़ रुपये बतौर मुआवजा देने हैं और इस तरह 97,000 करोड़ रुपये कम पड़ जाएंगे। अगर कोविड-19 का असर भी देखा गया तो करीब 3 लाख करोड़ रुपये की जरूरत होगी यानी 2.35 लाख करोड़ रुपये कम रहेंगे।
सीतारमण ने कहा कि अगले दो दिनों में केंद्र इन दोनों विकल्पों की जानकारी राज्यों को दे देगा और जीएसटी परिषद की अगली बैठक में राज्य बता देंगे कि उन्होंने कौन सा विकल्प चुना है। उन्होंने इस बात पर खास जोर दिया कि कर्ज का बोझ राज्यों पर नहीं आएगा क्योंकि उसे मुआवजा उपकर से चुकाया जाएगा। केंद्र और राज्यों के बीच तय समझौते के अनुसार अगर राज्यों के जीएसटी राजस्व में 2015-16 की तुलना में 14 प्रतिशत वृद्धि नहीं होती है तो उन्हें पांच साल तक मुआवजा दिया जाता रहेगा। पांडेय ने बताया कि चालू वित्त वर्ष के पहले चार महीनों में राज्यों को 1.5 लाख करोड़ रुपये की जरूरत थी मगर उन्हें मुआवजे की एक पाई भी नहीं मिली है।
दोपहिया पर जीएसटी घटाने पर चुप्पी : वित्त मंत्री ने यह बताने से इनकार कर दिया कि दोपहिया वाहनों पर जीएसटी दरें कब घटाई जाएंगी। उन्होंने कहा कि सीआईआई के एक सदस्य के सवाल के जवाब में उन्होंने जीएसटी दर घटाने पर विचार करने की बात कही थी। मगर यह उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता बल्कि जीएसटी परिषद इस पर फैसला करती है।

First Published - August 27, 2020 | 11:39 PM IST

संबंधित पोस्ट