भारत के विनिर्माण क्षेत्र का पर्चेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स (पीएमआई) सितंबर महीने में 3 माह के निचले स्तर पर आ गया है। हालांकि वैश्विक व्यवधानों और विकसित देशों में मंदी के डर के बावजूद इसमें तेजी अभी भी बरकरार है।
सितंबर में पीएमआई घटकर 55.1 पर आ गया, जो अगस्त में 56.2 था। एसऐंडपी ग्लोबल के सर्वे से पता चलता है कि विदेशी और घरेलू ग्राहकों की ओर से मांग ज्यादा होने की वजह से पीएमआई इस स्तर पर है।
पीएमआई अगर 50 अंक से ऊपर रहता है तो विनिर्माण गतिविधियों में विस्तार और इससे कम संकुचन के संकेत देता है।
सर्वे में कहा गया है, ‘विनिर्माण उद्योग के सभी तीन व्यापक क्षेत्रों में नए ऑर्डर, अंतरराष्ट्रीय बिक्री और उत्पादन में वृद्धि हुई है। सबसे ज्यादा मजबूत वृद्धि दर पूंजीगत वस्तुओं के क्षेत्र में रही है।’
अगस्त महीने में खुदरा महंगाई दर 7 प्रतिशत बढ़ी थी, जो जुलाई में 6.71 प्रतिशत थी। महंगाई दर रिजर्व बैंक द्वारा तय ऊपरी सीमा से ऊपर बनी हुई है। लगातार आठवें महीने में महंगाई दर रिजर्व बैंक की ऊपरी सीमा से ज्यादा है। सर्वे में कहा गया है कि वस्तुओं के विनिर्माताओं को सितंबर में महंगाई का दबाव कम रहने का लाभ मिला है। महंगाई पर काबू पाने के लिए रिजर्व बैंक ने पहले ही प्रमुख ब्याज दर में बढ़ोतरी की है। मई से लेकर अब तक रीपो रेट में 190 आधार अंक की बढ़ोतरी हो चुकी है।
सर्वे में कहा गया है, ‘वस्तुओं के उत्पादकों ने सितंबर महीने में महंगाई का दबाव कम रहने का लाभ उठाया है क्योंकि इनपुट लागत में सितंबर 2020 के बाद सबसे सुस्त बढ़ोतरी हुई है। करीब 8 प्रतिशत कंपनियों ने खरीद लागत अधिक बताई, जबकि 91 प्रतिशत ने बदलाव के संकेत दिए।’
एसऐंडपी ग्लोबल में इकनॉमिक्स एसोसिएट डायरेक्टर पॉलियाना डी लीमा ने कहा कि कीमत का दबाव उल्लेखनीय रूप से कम रहा है, जिससे कारोबारियों को लाभ मिला है। उन्होंने कहा, ‘पिछले 2 साल की तुलना में इनपुट लागत में वृद्धि सबसे सुस्त रही है क्योंकि आपूर्तिकर्ताओं का स्टॉक सुधरा है। कच्चे माल वैश्विक मांग कमजोर रहने और मंदी के जोखिम के चलते ऐसा हुआ है। इसी के मुताबिक भारतीय कंपनियों ने बिक्री मूल्य में बढ़ोतरी सीमित रखी और कुल मिलाकर महंगाई दर 7 माह के निचले स्तर पर आ गई है।’
सर्वे में कहा गया है कि बिक्री की जरूरतों को पूरी करने के लिए भारत के विनिर्माताओं ने सितंबर महीने में अपना भंडारण बढ़ाया है क्योंकि फरवरी महीने से तैयार माल का स्टॉक तेजी से कम हुआ है। सर्वे में कहा गया है कि नए काम में बढ़ोतरी और उत्पादन में बढ़ोतरी से सितंबर महीने में नौकरियों के सृजन में तेजी आई है। तीन महीने में रोजगार की दर तेजी से बढ़ी है।
वैश्विक व्यवधानों को देखते हुए रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को वित्त वर्ष 23 के लिए वृद्धि अनुमान घटाकर 7 प्रतिशत कर दिया है, जबकि पहले 7.2 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
रिजर्व बैंक के गवर्नर ने अपने नीतिगत बयान में कहा था कि भूराजनीतिक तनाव बढ़ने, वैश्विक वित्तीय स्थिति में सख्ती और कुल मांग में विदेशी मांग की हिस्सेदारी कम रहने की वजह से वृद्धि दर नीचे रहने का जोखिम है।