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PMMSY का लक्ष्य फेल: भारत का समुद्री उत्पाद निर्यात ₹1 लाख करोड़ का था टारगेट, सिर्फ ₹62 हजार करोड़ पर अटका

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भारत सरकार का एक लाख करोड़ रुपये का समुद्री निर्यात लक्ष्य वित्त वर्ष 2025 में पूरा नहीं हो सका, क्योंकि वैश्विक मंदी और गुणवत्ता मानकों ने निर्यातकों को परेशान किया।

Last Updated- July 05, 2025 | 1:37 PM IST
Fish Market
प्रतीकात्मक तस्वीर | फोटो क्रेडिट: Pixabay

भारत का समुद्री उत्पादों का निर्यात वित्त वर्ष 2025 में सरकार के महत्वाकांक्षी लक्ष्य से काफी पीछे रह गया। केंद्र सरकार की प्रमुख योजना, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के तहत 2024-25 तक 1 लाख करोड़ रुपये के निर्यात का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन इस साल निर्यात केवल 62,625.09 करोड़ रुपये तक पहुंच सका। यह लक्ष्य से 37,374.91 करोड़ रुपये कम है। एक्सपर्ट्स ने इसके लिए वैश्विक आर्थिक मंदी, सख्त गुणवत्ता मानक, बुनियादी ढांचे की कमी, नीतिगत कमियां और उत्पादों की विविधता की कमी को जिम्मेदार ठहराया है।

2018-19 में समुद्री निर्यात का आधार मूल्य 46,613.03 करोड़ रुपये था, जिसे दोगुना करने का लक्ष्य PMMSY ने रखा था। केंद्रीय मत्स्य पालन मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अगस्त 2024 में संसद में कहा था कि सरकार 2024-25 तक 1 लाख करोड़ रुपये का निर्यात हासिल करना चाहती है। हालांकि, वैश्विक बाजारों में मांग कम होने और अन्य चुनौतियों ने इस लक्ष्य को मुश्किल बना दिया। सेंट्रल मरीन फिशरीज रिसर्च इंस्टीट्यूट (CMFRI) के प्रिंसिपल साइंटिस्ट एस.एस. राजू ने बताया कि अमेरिका, यूरोपीय संघ और जापान जैसे प्रमुख आयातक देशों में महंगाई और कम खर्च ने निर्यात की मात्रा को प्रभावित किया।

Also Read: अमेरिकी शुल्क की आशंकाएं घटीं, अप्रैल में भारत का समुद्री उत्पादों का निर्यात 21% बढ़ा

चुनौतियों का पहाड़

निर्यात में कमी की एक बड़ी वजह सख्त गुणवत्ता मानक भी हैं। राजू के मुताबिक, एंटीबायोटिक अवशेष, ट्रेसबिलिटी और सर्टिफिकेशन की समस्याओं के कारण कई खेप को खारिज कर दिया गया या देरी हुई। इसके अलावा, बुनियादी ढांचे की कमी ने भी निर्यातकों को परेशान किया। कई तटीय राज्यों में बंदरगाह, प्रोसेसिंग यूनिट और कोल्ड चेन फैसिलिटी पूरी कैपिसिटी से काम नहीं कर रही हैं। अधिक माल ढुलाई लागत और कंटेनरों की कमी ने भी वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा को मुश्किल बनाया।

नीतिगत कमियां भी इस क्षेत्र को प्रभावित कर रही हैं। एक्वाकनेक्ट के संस्थापक राजामनोहर सोमसुंदरम ने बताया कि किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) योजना पारंपरिक खेती के लिए तो ठीक है, लेकिन जलीय कृषि के लिए इसकी क्रेडिट सीमा अपर्याप्त है। इसके अलावा, 66% निर्यात जमे हुए झींगे पर निर्भर है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव या बीमारियों का जोखिम बढ़ जाता है।

एक्सपर्ट्स का कहना है कि उत्पादों और निर्यात बाजारों में विविधता लाने की जरूरत है। सोमसुंदरम ने सुझाव दिया कि मध्य पूर्व और दक्षिण कोरिया जैसे कम टैप किए गए क्षेत्रों में मौके तलाशे जाएं और उच्च मूल्य वाली प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाए। इस बीच, अप्रैल 2025 में समुद्री निर्यात में 20.8% की बढ़ोतरी देखी गई, जब देश ने 4,981 करोड़ रुपये के उत्पाद निर्यात किए, जो पिछले साल की समान अवधि में 4,122 करोड़ रुपये थे।

हालांकि, अमेरिका द्वारा 9 जुलाई से संभावित जवाबी शुल्क लगाए जाने की आशंका ने चिंता बढ़ा दी है। राजू ने कहा कि अगर ये शुल्क लागू हुए, तो अमेरिकी उपभोक्ता आयात कम कर सकते हैं या अन्य आपूर्तिकर्ताओं की ओर रुख कर सकते हैं, जिससे अरबों डॉलर का यह क्षेत्र प्रभावित हो सकता है। सरकार ने FY25 के बजट में PMMSY के लिए 2,352 करोड़ रुपये आवंटित किए, जो मत्स्य पालन विभाग के कुल बजट का 89.8% है। मंत्रालय और MPEDA से इस बारे में कोई जवाब नहीं मिल सका।

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First Published - July 5, 2025 | 1:37 PM IST

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