facebookmetapixel
Advertisement
विकसित भारत के लिए युवाओं को कौशल और डिजिटल ट्रेनिंग देने पर जोरहोर्मुज में जंग के बीच नाविकों के सामने दो विकल्प, सुरक्षित रहें या ज्यादा कमाएंPM मोदी से मिले 20 स्पेस स्टार्टअप के CEO, निजी अंतरिक्ष क्षेत्र को बढ़ावा देने पर जोरबांग्लादेश के पीएम का भारत दौरा अटका, ब्रिक्स सम्मेलन में शामिल होने पर भी संशयउदारीकरण के 35 साल: ​1991 के बाद टेलीविजन ने कैसे बदला भारतीय मीडियाEPFO का जिला स्तर पर विस्तार प्लान, रोजगार योजना की रियल टाइम निगरानी होगीभारतीय बैंकों की डॉलर बॉन्ड में दौड़ तेज, आरबीआई की सस्ती स्वैप विंडो का उठा रहे फायदासौर परियोजनाओं की अटकी डील सुलझाएगा मंत्रालय, डिस्कॉम से PPA पर बातचीतपरमाणु बिजली के लिए पारदर्शी शुल्क ढांचा चाहता है उद्योग, 8 रुपये प्रति यूनिट की सीमा की मांगछोटी कंपनियों पर म्युचुअल फंड्स का बड़ा दांव, एंकर निवेश के बाद भी लंबी अवधि तक बने रहते हैं

रुपये की गिरावट से बढ़ेगा जेनेरिक दवाओं का निर्यात, लेकिन API लागत बढ़ाएगी चुनौती

Advertisement

फॉर्मूलेशन बनाने के लिए भारत अपनी बल्क ड्रग या एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआई) का लगभग 60-70 प्रतिशत आयात भी करता है

Last Updated- December 05, 2025 | 11:01 AM IST
medicine
Representational Image

दवा क्षेत्र को रुपये की गिरावट से लाभ होने वाला है। भारत हर साल 30 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की दवाओं और फार्मास्युटिकल उत्पादों का निर्यात करता है और जेनेरिक दवाओं का शीर्ष आपूर्तिकर्ता है। हालांकि फॉर्मूलेशन बनाने के लिए भारत अपनी बल्क ड्रग या एक्टिव फार्मास्यूटिकल इंग्रेडिएंट (एपीआई) का लगभग 60-70 प्रतिशत आयात भी करता है।

कैपिटलाइन के आंकड़ों से पता चलता है कि सन फार्मास्यूटिकल इंडस्ट्रीज (197 करोड़ डॉलर), डॉ रेड्डीज लैबोरेटरीज (186.5 करोड़ डॉलर) और जाइडस लाइफसाइंसेज (123.8 अरब डॉलर) जैसी कंपनियों को उनके फायदे का बड़ा हिस्सा निर्यात से मिला है।

उद्योग के एक आंतरिक व्यक्ति ने नाम सार्वजनिक न करने की इच्छा जताते हुए कहा कि रुपये में 5 प्रतिशत गिरावट के कारण प्रमुख निर्यातकों को 7 से 8 प्रतिशत वृद्धि की उम्मीद है। हालांकि बढ़ते इनपुट लागत के कारण निर्यात से होने वाला लाभ बेअसर हो जाएगा। भारत हर साल करीब 10 अरब डॉलर के एपीआई और इंटरमीडिएटरीज का आयात करता है और इस पर मुद्रा अवमूल्यन का असर पड़ेगा।

एक फॉर्मा एसोसिएशन के प्रमुख ने कहा, ‘अमेरिका या अन्य विनियमित बाजारों में निर्यात के मामले में ज्यादातर कंपनियां अपने एपीआई का उत्पादन करती हैं। इसके बावजूद कुछ केमिकल इंटरमीडिएटरीज का आयात होता है। बहरहाल भारत की दवा फर्में सस्ते और कॉमन एपीआई का आयात करती हैं, लेकिन इसका असर पड़ेगा।’

 

Advertisement
First Published - December 5, 2025 | 11:01 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement