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केंद्र-राज्य टैक्स बंटवारे को लेकर पीयूष गोयल का बड़ा बयान

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‘‘कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे कुछ राज्य हैं जो कहते हैं कि उन्हें उनके द्वारा चुकाए गए करों की राशि वापस मिलनी चाहिए। इससे बड़ी कोई ‘छोटी सोच’ नहीं हो सकती।"

Last Updated- February 09, 2025 | 6:14 PM IST
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केंद्रीय वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने कहा है कि कुछ राज्यों द्वारा केंद्रीय कोष में उनके कर योगदान के अनुपात में केंद्रीय धन की मांग करना ‘छोटी सोच’ और ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ है। गोयल ने शनिवार को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का मानना ​​है कि अगर देश को समृद्ध बनाना है, तो पूर्वोत्तर के आठ राज्यों और बिहार, पश्चिम बंगाल, ओडिशा और झारखंड जैसे पूर्वी भारतीय राज्यों का विकास होना चाहिए। उन्होंने कहा कि पिछले 11 साल में मोदी सरकार का महाभारत के अर्जुन की तरह से ध्यान पूर्वोत्तर और पूर्वी राज्यों पर रहा है।

गोयल ने कहा, ‘‘यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ राज्य और कुछ नेता…मैं इसका राजनीतिकरण नहीं करना चाहता, लेकिन महाराष्ट्र के कुछ नेता कहते थे…पहले की सरकार के नेता जो ढाई साल तक सत्ता में रहे, वे मुंबई और महाराष्ट्र द्वारा चुकाए गए कर का हिसाब लगाते थे और मांग करते थे कि उन्हें उतनी राशि (केंद्रीय निधि) वापस मिलनी चाहिए।’’ गोयल का इशारा पूर्ववर्ती उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महा विकास अघाड़ी सरकार की ओर था। उन्होंने कहा, ‘‘कर्नाटक, तमिलनाडु, तेलंगाना जैसे कुछ राज्य हैं जो कहते हैं कि उन्हें उनके द्वारा चुकाए गए करों की राशि वापस मिलनी चाहिए। इससे बड़ी कोई ‘छोटी सोच’ नहीं हो सकती। इससे ज्यादा ‘दुर्भाग्यपूर्ण’ कुछ नहीं हो सकता।’’

उन्होंने कहा, लेकिन अब चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि महाराष्ट्र में मौजूदा भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार पूर्वोत्तर भारत के प्रति बहुत संवेदनशील है। गोयल ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार पिछले 11 साल से पूर्वोत्तर भारत को प्राथमिकता देते हुए ‘एक्ट ईस्ट’ और ‘लुक ईस्ट’ नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के तहत पूर्वोत्तर राज्यों की राजधानियों को रेलवे से जोड़ा जा रहा है और राजमार्गों का एक नेटवर्क बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी 65 से अधिक बार पूर्वोत्तर का दौरा कर चुके हैं। उन्होंने लोगों से इस क्षेत्र की सुंदरता और संस्कृति को देखने के लिए कम से कम एक बार यहां आने का आग्रह किया।

(एजेंसी इनपुट के साथ)

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First Published - February 9, 2025 | 6:14 PM IST

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