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मुआवजा अनुमान से विपक्षी राज्य नाखुश

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:12 AM IST

विपक्षी दलों द्वारा शासित प्रमुख राज्यों ने केंद्र सरकार के जीएसटी में कमी को लेकर वित्त वर्ष 22 के अनुमान का कड़ा विरोध किया है। राज्यों का दावा है कि कम से कम 55,000 करोड़ रुपये कम अनुमान लगाया गया है। उन्होंने वित्त वर्ष 21 के लिए 65,000 करोड़ रुपये अतिरिक्त मुआवजे की भी मांग की है और तर्क दिया है कि अप्रैल-जनवरी के दौरान 10 महीने में राजस्व में वास्तविक वृद्धि दर नकारात्मक रही है, जबकि केंद्र सरकार ने पिछले साल 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया था।
एक राज्य के वित्त मंत्री ने कहा, ‘वित्त वर्ष 22 के लिए जीएसटी मुआवजे की जरूरत संबंधी केंद्र के अनुमान से हम सहमत नहीं हैं। उन्होंने मुआवजे की राशि का अनुमान कम से कम 55,000 करोड़ रुपये कम लगाया है और जल्द से जल्द इसकी समीक्षा की जानी चाहिए।’
उन्होंने कहा कि राज्य के अनुमान के मुताबिक वित्त वर्ष 22 में 3.23 लाख करोड़ रुपये मुआवजे की जरूरत होगी। उन्होंने कहा, ‘इसका मतलब है कि उधारी की जरूरत 1.58 लाख करोड़ रुपये नहीं, बल्कि 2.13 लाख करोड़ रुपये होगी, क्योंकि शेष राशि उपकर संग्रह से पूरी होने की उम्मीद की गई है।’ उन्होंने कहा कि इसके अलावा पिछले साल में राजस्व की कमी की इस साल कितनी भरपाई होनी है, यह भी अब तक साफ नहीं है।
शुक्रवार को केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने 1.58 लाख करोड़ रुपये बाजार उधारी का प्रस्ताव किया था, जिससे राज्यों को वस्तु एवं सेवा कर की वजह से आई राजस्व में कमी की भरपाई की जा सके। जीएसटी मुआवजा की जरूरत वित्त वर्ष 22 में बढ़कर 2.7 लाख करोड़ रुपये हो गई है, जिसमें से 1.1 लाख करोड़ रुपये मुआवजा उपकर संग्रह से आने का अनुमान है।
एक और राज्य के वित्त मंत्री ने कहा कि अप्रैल से जनवरी के दौरान वास्तविक वृद्धि दर, जिसके लिए उधारी ली गई थी, दरअसल -3 प्रतिशत थी, जबकि 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था। इससे केंद्र सरकार को राज्यों को पूर्ण मुआवजा देने के लिए 63,248 करोड़ रुपये अतिरिक्त उधारी लेने की जरूरत पड़ेगी क्योंकि पहले के साल में 7 प्रतिशत राजस्व वृद्धि का अनुमान सही नहीं है।
परिषद में छत्तीसगढ़ का प्रतिनिधित्व करने वाले राज्य के स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि ज्यादातर राज्य इस साल के लिए मुआवजे के अनुमान से असहमत थे। उन्होंने कहा, ‘7 प्रतिशत की वृद्धि नजीर कैसे बन सकती है, अगर हर समय गिरावट हो रही है।’
केरल के वित्त मंत्री केएन बालगोपाल ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा कि वित्त वर्ष 22 में 7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाना संभवत: सही नहीं होगा और इस अनुमान पर फिर से विचार करने की जरूरत है। उन्होंने कहा, ‘केरल में हम लोग कोविड-19 से जुड़े स्वास्थ्य संबंधी तमाम कल्याणकारी काम कर रहे हैं। केंद्र सरकार इसमें मदद नहीं कर रही है। कम से कम केंद्र सरकार को जीएसटी मुआवजे की भरपाई राज्यों जरूर करनी चाहिए। हमें भुगतान किए जाने की जरूरत है। वित्त वर्ष 22 में 7 प्रतिशत वृद्धि की कल्पना करना सही नहीं है। परिषद और केंद्र सरकार को सुधारात्मक कदम उठाने की जरूरत है।’
बालगोपाल की यह परिषद की पहली बैठक थी। उन्होंने एक सप्ताह पहले ही केरल की नई सरकार में वित्त मंत्री का पदभार संभाला है।  वह 4 जून को राज्य का अपना पहला बजट पेश करने वाले हैं और उम्मीद की जा रही है कि उसमें कोविड से संबंधित कुछ प्रावधान होंगे। बालगोपाल ने कहा, ‘निश्चित रूप से कोविड-19 से जुड़े कुछ प्रावधान बजट में शामिल होंगे।’
पंजाब के वित्त मंत्री मनप्रीत सिंह बादल ने कहा, ‘हमें मुआवजे की गणना जीएसटी मुआवजा अधिनियम की धारा 7 में दिए गए तरीकों के मुताबिक करने की जरूरत है। इसके अलावा किसी दूसरे तरीके से की गई गणना मनमानी होगी। हम कर में 7 प्रतिशत वृद्धि मानकर नहीं चल सकते, जबकि पहले के साल का अनुमान वास्तविक राजस्व से कम रहा है।’  पिछले साल केंद्र सरकार ने जीएसटी मुआवजा की जरूरत 2.35 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया था, जिसमें से 1.1 लाख करोड़ रुपये उधारी और 70,000 करोड़ रुपये मुआवजा उपकर संग्रह से जुटाया गया। इस तरह से 55,000 करोड़ रुपये का अंतर बना रहा, जिसे सरकार ने समय के साथ भरपाई करने का वादा किया था।
इक्रा रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा, ‘हमारे आकलन के मुताबिक वित्त वर्ष 22 में जीएसटी जरूरत और जीएसटी मुआवजा संग्रह के बीच अंतर 1.65 लाख करोड़ रह सकती है, जो वित्त मंत्रालय द्वारा लगाए गए 1.58 लाख करोड़ रुपये के करीब बराबर है। बहरहाल पिछले साल का बकाया साफ नहीं किया गया है और इसकी भरपाई के लिए भी वित्तपोषण की जरूरत है।’

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First Published - May 30, 2021 | 11:09 PM IST

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