प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (सीपीआई) पर आधारित खुदरा महंगाई दर अक्टूबर के 0.25 प्रतिशत के रिकॉर्ड निचले स्तर से बढ़कर नवंबर में 0.71 प्रतिशत हो गई। अनुकूल आधार प्रभाव कम होने और कुछ खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मौसमी वृद्धि के कारण खाद्य बास्केट में अवस्फीति कम होने के कारण ऐसा हुआ है।
राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) की ओर से शुक्रवार को जारी आंकड़ों के मुताबिक खाद्य वस्तुओं में अपस्फीति अक्टूबर में -5.02 प्रतिशत से घटकर नवंबर में -3.91 प्रतिशत हो गई, जिसकी वजह सब्जियों, अंडों, दालों, फलों और मांस और मछली की कीमतों में पिछले महीने की तुलना में वृद्धि थी।
इस बीच अनाज की महंगाई दर 50 महीने के निचले स्तर 0.1 प्रतिशत तक गिर गई। खाद्य तेल की कीमतें भी कम (7.87 प्रतिशत) हुई हैं, हालांकि अभी भी यह महंगा है।
केयर रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा का कहना है कि खरीफ में तिलहन की बुआई कम रहने और वैश्विक कीमतों में तेजी को देखते हुए खाद्य तेल की कीमतों पर नजर रखनी होगी। उन्होंने कहा, ‘कुल मिलाकर कृषि गतिविधियां बेहतर रहने और अनुकूल आधार के कारण खाद्य महंगाई दर मध्यम स्तर पर रहने की उम्मीद है। जलाशय का स्तर बेहतर रहने के कारण इस वर्ष रबी की बुआई में भी मदद मिलेगी।’
इक्रा रेटिंग्स में मुख्य अर्थशास्त्री अदिति नायर ने कहा कि खाद्य और पेय पदार्थ श्रेणी में 12 उपखंडों में से 8 में से कई में नवंबर में तेजी आई है। उन्होंने कहा, ‘खाद्य और बेवरिज की श्रेणी में सब्जियों, दालों और मसालों का 24 प्रतिशत भार है और इनकी कीमतें काफी हद तक मौजूदा वर्ष में अपस्फीति के क्षेत्र में हैं। इन खंडों के रुझान ने खाद्य महंगाई दर के आंकड़ों पर दबाव डाला है।’
ग्रामीण इलाकों में खुदरा कीमतें वापस महंगाई के क्षेत्र में आ गईं। एनएसओ ने नवंबर में सीपीआई (ग्रामीण) में 0.10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की, जबकि पिछले महीने में -0.25 प्रतिशत थी।
दूसरी ओर शहरी महंगाई दर उसी समय अवधि के दौरान 0.88 प्रतिशत से बढ़कर 1.4 प्रतिशत हो गई। हालांकि, खाद्य कीमतें ग्रामीण (-4.05 प्रतिशत) और शहरी (-3.6 प्रतिशत) दोनों क्षेत्रों में अवस्फीति में रहीं।