facebookmetapixel
Advertisement
वैश्विक अनिश्चितता के बावजूद रफ्तार पकड़ेगा देश का टू-व्हीलर निर्यात, हीरो-बजाज और TVS ने साफ की स्थितिUpcoming IPO: रेलवे के लिए उपकरण बनाने वाली कंपनी का IPO 30 जुलाई को खुलेगा, जानें डिटेल्सदिल्ली में आज छाए रहेंगे बादल, पर देश के कई राज्यों में भारी बारिश का अलर्ट; असम में बाढ़ से 66 की मौतअमेरिका-ईरान जंग में नया मोड़: 13 दिनों की बमबारी के बाद थमे एयरस्ट्राइक, क्या रुकेगी 5 महीने पुरानी जंग?छात्रों के विरोध के आगे झुकी सरकार! कैसे PM मोदी के 12 साल के कार्यकाल में इस्तीफा देने वाले दूसरे केंद्रीय मंत्री बने प्रधानपश्चिम एशिया संकट व तेल की बढ़ती कीमतों के बीच अगले हफ्ते कैसा रहेगा शेयर बाजार और कमोडिटी मार्केट का हाल?नीट पेपर लीक, परीक्षा रद्द, आंदोलन और अब शिक्षा मंत्री का इस्तीफा…..3 मई से लेकर अब तक क्या-क्या हुआ?शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने दिया इस्तीफा, खुद अपने पोस्ट में लेटर जारी करके दी जानकारीफ्लैट खरीदने के बाद पुराने मेंटेनेंस बकाया का आ गया बिल? जानिए क्या कहता है कानून और क्या करें नए खरीदार360% का मोटा डिविडेंड! IT सेक्टर की दिग्गज कंपनी का निवेशकों को तोहफा, रिकॉर्ड डेट फिक्स

विदेशी ग्राहकों को सेवाओं पर GST वैध: बंबई हाईकोर्ट

Advertisement
Last Updated- June 07, 2023 | 10:52 PM IST
HC upholds GST rules on taxing intermediary services for clients abroad
Illustration by Ajay Mohanty

बंबई उच्च न्यायालय ने विदेशी ग्राहकों को मुहैया कराई जाने वाली मध्यवर्ती सेवाओं पर जीएसटी कानून के उपबंधों को संवैधानिक रूप से वैध करार दिया है।

बहरहाल अदालत ने इस बारे में टिप्पणी नहीं की कि मध्यवर्ती सेवाएं मुहैया कराने वालों पर किस प्रकार का जीएसटी – केंद्रीय वस्तु एवं सेवा कर (CGST), राज्य जीएसटी (SGST) या समन्वित जीएसटी (IGST) लगेगा।

मध्यवर्ती सेवा मुहैया कराने वालों में एजेंट, ब्रोकर, भारत के बाहर के ग्राहकों के लिए बिचौलिए की भूमिका निभाने वाले आदि आते हैं। लिहाजा मूल मुद्दा यह है कि भारत के बाहर उपयोग होने वाली सेवाओं पर किस प्रकार का कर – IGST, CGST या SGST लगेगा।

अभी भारत में इन सेवाओं पर IGST के अधिनियम के तहत कर लगाया जाता है और उन पर SGST और CGST लगाया जाता है। धारा 13 (8) (बी) के उपबंधों ने इन सेवाओं को निर्यात नहीं मानकर अपवाद माना है जबकि इन सेवाओं का उपभोग देश के बाहर किया जाता है। इससे शुद्ध निर्यात सेवा मुहैया करवाने वालों की तरह मध्यवर्ती सेवा मुहैया कराने वालों को शून्य कर की सुविधा नहीं मिल पाती है।

लिहाजा इस उपबंध का अर्थ यह है कि यदि मध्यवर्ती सेवाएं देश के बाहर सेवाएं मुहैया करवाई जाती हैं तो ऐसे में जिस क्षेत्र में आपूर्तिकर्ता पंजीकृत है, उसमें सेवा मुहैया कराना माना जाएगा।

Advertisement
First Published - June 7, 2023 | 10:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement