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Fiscal deficit: राजकोषीय घाटे में 25.3 फीसदी की गिरावट

राजकोषीय घाटा, जो सरकार के व्यय और राजस्व का अंतर होता है, यह 2022-23 में जीडीपी का 6.4 प्रतिशत था।

Last Updated- July 31, 2023 | 10:25 PM IST
fiscal deficit

चालू वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में केंद्र सरकार का राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit) 4.5 लाख करोड़ रुपये रहा, जो बजट अनुमान का 25.3 प्रतिशत है। लेखा महानियंत्रक (CGA) की ओर से जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली है। पिछले साल की समान अवधि के दौरान राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 21.2 प्रतिशत था।

अप्रैल-जून 2023 के दौरान ज्यादा राजकोषीय घाटे की वजह पूंजीगत व्यय और राज्यों को त्वरित कर हस्तांतरण है। विशेषज्ञों का कहना है कि गैर कर राजस्व में तेज बढ़ोतरी से इसकी भरपाई हो सकती है।

लाभांश और मुनाफे से गैर कर राजस्व 105 प्रतिशत बढ़ा

सीजीए के मुताबिक वित्त वर्ष के पहले तीन महीने के दौरान कुल गैर कर राजस्व 1,54,968 करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 51.4 प्रतिशत रहा है, जो पिछले साल की समान अवधि के दौरान 23.1 प्रतिशत था। लाभांश और मुनाफे से गैर कर राजस्व 105 प्रतिशत बढ़ा है, और इसमें 91,000 करोड़ रुपये जुड़े हैं।

इक्रा लिमिटेड में मुख्य अर्थशास्त्री और हेड-रिसर्स ऐंड आउटरीच अदिति नायर ने कहा, ‘बजट अनुमान की तुलना में लाभांश के मद में रिजर्व बैंक से 874.2 अरब रुपये अतिरिक्त हस्तांतरण की वजह से इस बढ़ोतरी की भरपाई में कुछ मदद मिल सकती है, जो व्यय बढ़ने की वजह से हुआ है।’

अप्रैल-जून 2023 के दौरान कर राजस्व 4,33,620 करोड़ या बजट अनुमान का 18.6 प्रतिशत रहा है, जो पिछले साल की पहली तिमाही में 26.1 प्रतिशत था।

सरकार के व्यय और राजस्व का अंतर होता है राजकोषीय घाटा

राजकोषीय घाटा, जो सरकार के व्यय और राजस्व का अंतर होता है, यह 2022-23 में जीडीपी का 6.4 प्रतिशत था। केंद्रीय बजट के दौरान सरकार ने कहा था कि इसे 2023-24 में घटाकर सकल घरेलू उत्पाद के 5.9 प्रतिशत तक लाया जाएगा।

पहली तिमाही में केद्र सरकार का कुल व्यय 10.5 लाख करोड़ रुपये या बजट अनुमान का 23.3 प्रतिशत रहा है, जो एक साल पहले बजट अनुमान का 24 प्रतिशत था।

केंद्र सरकार ने राज्यों को कर हस्तांतरण के मद में 3.09 लाख करोड़ रुपये जुलाई तक दिए हैं, जो चालू वित्त वर्ष के दौरान 10.21 लाख करोड़ रुपये दिया जाना है।

First Published - July 31, 2023 | 10:25 PM IST

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