प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र उद्यमों (सीपीएसई) का वित्त वर्ष 25 में शोध व विकास (आरऐंडडी) पर खर्च बढ़ा। बीते माह जारी सार्वजनिक उद्यम के वित्त वर्ष 2024-25 के सर्वेक्षण के मुताबिक सीपीएसई का शोध व विकास पर वित्त वर्ष 2024-25 में खर्च सालाना आधार पर 25.62 प्रतिशत बढ़कर 9,691 करोड़ रुपये हो गया जबकि यह खर्च वित्त वर्ष 2023-24 में 7,715 करोड़ रुपये था।
वित्त वर्ष 25 में शोध व विकास पर सर्वाधिक खर्च रक्षा उत्पादन ने किया। रक्षा उत्पादन का शोध व विकास के लिए परिव्यय 4,684 करोड़ रुपये था। यह सभी समूहों पर हुए खर्च का करीब 48 प्रतिशत अधिक है।
इसके बाद पेट्रोलियम (रिफाइनरी और मार्केटिंग) गतिविधियों का खर्च 1,492 करोड़ रुपये रहा। फिर भारी व मध्यम इंजीनियरिंग समूह ने इस साल में 750 करोड़ रुपये खर्च किया।
कच्चे तेल की कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में अनुसंधान एवं विकास पर 627 करोड़ रुपये खर्च किए और यह वित्त वर्ष 2024 के 628 करोड़ रुपये से थोड़ा कम था। परिवहन और लॉजिस्टिक सेवाओं ने भी वित्त वर्ष 2025 में 472 करोड़ रुपये का अधिक व्यय दर्ज किया, जबकि वित्त वर्ष 2024 में यह 335 करोड़ रुपये था।
विद्युत पारेषण पर व्यय वित्त वर्ष 2024 के 220 करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2025 में 314 करोड़ रुपये हो गया। अन्य क्षेत्रों में स्टील कंपनियों ने वित्त वर्ष 2025 में अनुसंधान एवं विकास पर 245 करोड़ रुपये खर्च किए जबकि यह वित्त वर्ष 2024 में 253 करोड़ रुपये था।
सार्वजनिक विकास उद्यमों (सीपीएसई) में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) वित्त वर्ष 2024-25 में अनुसंधान एवं विकास पर सबसे अधिक खर्च करने वाली कंपनी के रूप में उभरी। एचएएल ने 2,482 करोड़ रुपये का व्यय किया, जो कुल अनुसंधान एवं विकास व्यय का 26 प्रतिशत है। भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड (बीईएल) 1,472 करोड़ रुपये के अनुसंधान एवं विकास व्यय के साथ दूसरे स्थान पर रही, जो कुल व्यय का 15 प्रतिशत है।