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भूराजनीति पर कड़ी प्रतिक्रिया जताते हैं बाजार, फिर आगे बढ़ जाते हैं: जिम रोजर्स

उन्होंने बताया कि वह भारत में निवेश के नए अवसरों की तलाश करेंगे क्योंकि देश का भविष्य लगातार संभावनाशील हो रहा है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- March 05, 2026 | 9:21 PM IST

दुनिया भर के वित्तीय बाजार पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक घटनाक्रम से जूझ रहे हैं। ऐसे में रोजर्स होल्डिंग्स के चेयरमैन जिम रोजर्स से पुनीत वाधवा ने टेलीफोन पर बातचीत की। उन्होंने बताया कि वह भारत में निवेश के नए अवसरों की तलाश करेंगे क्योंकि देश का भविष्य लगातार संभावनाशील हो रहा है। उनसे बातचीत के अंश:

मौजूदा भूराजनीतिक टकराव और वित्तीय बाजारों पर उनके असर के बारे में आपका क्या नजरिया है? क्या इस बार ​स्थिति कुछ अलग है और आपको कब तक बाजार ठीक होने की उम्मीद है?

हमने हाल के वर्षों में कई भूराजनीतिक संघर्ष देखे हैं जिन्होंने बाजार की धारणा को प्रभावित किया है। मुझे नहीं लगता कि यह स्थिति मौलिक रूप से अलग है। बाजार अक्सर इस तरह के घटनाक्रम पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हैं, लेकिन आखइरकार वे एडजस्ट हो जाते हैं और आगे बढ़ जाते हैं।

तथापि, अमेरिकी बाजार पिछले एक साल में तेजी से ऊपर गए थे और इसलिए गिरावट तो आनी है। मैंने अमेरिका में सब कुछ बेच दिया है क्योंकि मुझे अगले एक साल में (अमेरिकी बाजारों में) बड़ी गिरावट की आशंका लग रही है। अधिकांश बाजारों को आमतौर पर गिरावट का कारण मिल जाता है, लेकिन गिरावट का मुख्य कारण यह है कि लंबे समय तक बढ़ते जाने से शेयरों की कीमतें बहुत ज्यादा हो जाती हैं।

अनिश्चितता को देखते हुए निवेशकों को बाजारों से दूर रहना चाहिए या निवेश का यह सही समय है?

हर किसी को अपने निवेश संबंधी निर्णय खुद लेने होते हैं। व्यक्तिगत रूप से, फिलहाल मैंने अमेरिकी डॉलर रखने का विकल्प चुना है। बहुत से लोग अभी भी अमेरिकी डॉलर को सुरक्षित जगह मानते हैं, हालांकि मैं सहमत नहीं हूं कि क्या वाकई ऐसा है, लेकिन उसे लेकर धारणा मजबूत बनी हुई है।

क्या सोना और चांदी का सबसे अच्छा दौर खत्म हो गया है?

मेरे पास चांदी है। मैंने हाल में पिछले सप्ताह और भी खरीदी है। अगर कीमतें और गिरती हैं, तो मुझे उम्मीद है कि मैं और अधिक खरीदूंगा। सोने और चांदी पर मेरा नजरिया लंबी अवधि का है। मैं उन्हें खरीदता हूं और उन्हें अलग रख देता हूं, इस उम्मीद में कि एक दिन मेरे बच्चों के पास ये होंगे। मुश्किल समय में सुरक्षा के लिए हर किसी के पास कुछ सोना और चांदी होना चाहिए।

सोना और चांदी दोनों 2025 में बढ़े थे। लेकिन मुझे नहीं पता कि तेजी कब तक चलेगी। मैं बाजार के समय का अनुमान लगाने में अच्छा नहीं हूं और मैं सोने-चांदी की तेजी का अंदाज लगाने की कोशिश भी नहीं करता हूं। मेरा नजरिया केवल उन्हें लंबी अवधि के लिए अपने पास रखना है।

एआई थीम पर आपके क्या विचार हैं? आपकी राय में निवेशक एआई पर कंपनियों के भारी खर्च पर रिटर्न को लेकर कब सवाल उठाना शुरू कर सकते हैं?

अतीत में हमने कई परिवर्तनकारी प्रौद्योगिकियों को देखा है – बिजली, रेलवे, ऑटोमोबाइल और अन्य। एआई एक ऐसा ही विकास है और निश्चित रूप से दुनिया को बदल देगा। अगर आप जानते हैं कि कौन सी एआई कंपनियां सफल होंगी, तो आपको निवेश करना चाहिए। लेकिन निवेश से पहले आपको वास्तव में प्रौद्योगिकी और इससे जुड़े लोगों के बारे में जानना होगा।

भारतीय बाजारों पर आपका क्या नजरिया है?

मैंने वर्षों से भारत में निवेश के आकर्षक अवसर देखे हैं। आज जो बात सबसे अलग है, वह यह है कि दिल्ली में कुछ बदला हुआ लग रहा है। ऐसा लगता है कि भारतीय नीति निर्माताओं ने अब यह मान लिया है कि सफलता और समृद्धि सकारात्मक चीजें हैं। मानसिकता में यह बदलाव उत्साहजनक है और मैं इससे बहुत प्रभावित हूं।

कच्चे तेल पर आपका क्या नजरिया है? क्या मौजूदा भूराजनीतिक घटनाक्रम को देखते हुए यह फिर से 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर सकता है?

मैं निश्चित रूप से कच्चे तेल को बेचने की सलाह नहीं दूंगा। तेल अभी भी अपने सर्वा​धिक ऊंचे स्तर से काफी नीचे है और दुनिया में पहले से पता भंडार धीरे-धीरे खत्म हो रहे हैं। इस वजह से, तेल का दीर्घावधि भविष्य अच्छा है। अगर भूराजनीतिक हालात ऐसे ही बने रहे तो यह निश्चित रूप से फिर से 100 डॉलर को पार कर सकता है।

First Published : March 5, 2026 | 9:18 PM IST