भारत में औद्योगिक उत्पादन की रफ्तार जनवरी में कुछ धीमी पड़ गई। जनवरी 2025 में औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) 4.8 प्रतिशत बढ़ा। यह बाजार के अनुमान 6 प्रतिशत से कम है। इससे पहले दिसंबर में IIP की वृद्धि 8 प्रतिशत रही थी। एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत मई 2026 से IIP का नया बेस ईयर लागू कर सकता है। अभी इसका बेस ईयर 2012 है, जिसे बदलकर वित्त वर्ष 2023 किया जा सकता है।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग की रिपोर्ट के मुताबिक उपयोग के आधार पर देखें तो इंफ्रास्ट्रक्चर और निर्माण से जुड़े क्षेत्रों में 13.7 प्रतिशत की बढ़त दर्ज की गई। वहीं कंज्यूमर ड्यूरेबल यानी टिकाऊ सामान (जैसे टीवी, फ्रिज, वॉशिंग मशीन) का उत्पादन 6.3 प्रतिशत बढ़ा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में कमजोरी भी देखने को मिली। कंज्यूमर नॉन-ड्यूरेबल सामान (जैसे रोजमर्रा की चीजें) का उत्पादन 2.7 प्रतिशत घट गया, जबकि प्राइमरी गुड्स में वृद्धि केवल 3.1 प्रतिशत रही।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, जिसका IIP में लगभग 78 प्रतिशत हिस्सा है, जनवरी में 4.8 प्रतिशत बढ़ा। यह पिछले महीने की 8.4 प्रतिशत वृद्धि से कम है। इसके अलावा माइनिंग सेक्टर 4.3 प्रतिशत और बिजली उत्पादन 5.1 प्रतिशत बढ़ा।
रिपोर्ट के अनुसार कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक्स, बेसिक मेटल, मोटर वाहन, नॉन-मेटालिक मिनरल और तंबाकू जैसे उद्योगों में अच्छी बढ़त देखी गई। वहीं कपड़ा, फार्मा, रबर और प्लास्टिक, लेदर और पेय पदार्थ जैसे क्षेत्रों में उत्पादन कमजोर रहा।
एंटीक स्टॉक ब्रोकिंग का कहना है कि आने वाले समय में औद्योगिक वृद्धि बनी रह सकती है। सेवा क्षेत्र में तेजी, जीएसटी में बदलाव, ब्याज दरों में राहत और अच्छी रबी फसल से अर्थव्यवस्था को सहारा मिल सकता है। हालांकि रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि वैश्विक तनाव, बाजार में उतार-चढ़ाव और कमोडिटी कीमतों में बदलाव आगे चलकर जोखिम बन सकते हैं।