अर्थव्यवस्था

RBI डिप्टी गवर्नर का विजन: पूंजी निवेश और ग्राहक सुरक्षा से ही होगा ‘विकसित भारत’ का सपना पूरा

आरबीआई डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे. के अनुसार, भारत के विकास का अगला चरण उत्पादक पूंजी निवेश, बेहतर ग्राहक सुरक्षा और समावेशी वित्तीय समावेशन पर आधारित होगा

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- March 03, 2026 | 10:08 PM IST

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के डिप्टी गवर्नर स्वामीनाथन जे ने कहा कि भारत की आर्थिक वृद्धि का अगला चरण उत्पादक क्षेत्रों में पूंजी निवेश पर निर्भर करेगा, जिससे रोजगार के सृजन के साथ सार्थक वित्तीय समावेशन होगा और लोग और छोटे उद्यम धन का सुरक्षित उपयोग कर सकेंगे। इसमें सिर्फ धन मिलना ही नहीं, बल्कि ग्राहकों की बेहतर सुरक्षा भी शामिल है। 

स्वामीनाथन ने 27 फरवरी को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट (आईआईएम), जम्मू में तीसरे अंतर्राष्ट्रीय फाइनैंस ऐंड अकाउंटिंग कॉन्फ्रेंस (आईएफएसी) को संबोधित करते हुए यह कहा। भाषण की प्रति 3 मार्च को रिजर्व बैंक की वेबसाइट पर अपलोड की गई ।

उन्होंने कहा, ‘विकसित भारत 2047 की यात्रा एक सामूहिक प्रयास है। इसके लिए मजबूत संस्थानों की आवश्यकता होगी जो चक्रीय हिसाब से वृद्धि को समर्थन कर सकें। साथ ही इससे समावेशन, नवोन्मेष से तालमेल बिठाने वाली ग्राहक सुरक्षा की भी आवश्यक है। 2047 की आकांक्षा धीरे-धीरे लाखों लोगों के लिए एक जीवंत वास्तविकता बन जाएगी।

इसके अलावा स्वामीनाथन ने कहा कि वृद्धि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) और प्रति व्यक्ति जीडीपी के आंकड़ों से कहीं अधिक दैनिक जीवन की गुणवत्ता का मसला है, जिसमें बेहतर नौकरियां, अच्छे मकान, सुरक्षित वित्तीय विकल्प और झटके लगने पर लचीलापन शामिल है। 

उन्होंने कहा, ‘यह इस बारे में है कि क्या विकास वास्तविक, व्यापक आधार वाला और समावेशी लगता है।’

 उन्होंने कहा, ‘इस परिवर्तन में फाइनैंस को एक महत्त्वपूर्ण भूमिका निभानी होगी। इसे बचत जुटाने, पूंजी आवंटित करने और जोखिम का प्रबंधन करने की आवश्यकता होगी। अगर यहअच्छे तरीके से किया जाता है तो इससे देश के उद्यमों और परिवारों को लाभ होगा।’

उन्होंने यह भी कहा कि फाइनैंस में नेतृत्व केवल बुद्धिमत्ता का मसला नहीं, बल्कि निर्णय और अनुशासन का मसला है।  स्वामीनाथन ने कहा, ‘यह इस बारे में है कि आप पुरस्कृत करने के लिए किसे चुनते हैं। आप किससे सवाल करना चुनते हैं, और आप शुरुआती तौर पर क्या ठीक करना चुनते हैं।’ उन्होंने कहा कि वित्त में आंकड़ों की जरूरत है, लेकिन आंकड़ों में ईमानदारी भी जरूरी है। 

First Published : March 3, 2026 | 10:08 PM IST