facebookmetapixel
JioBlackRock MF ने लॉन्च किए 2 नए डेट फंड, ₹500 से SIP शुरू; इन फंड्स में क्या है खास?Titan Share: ऑल टाइम हाई पर टाटा का जूलरी स्टॉक, अब आगे क्या करें निवेशक; जानें ब्रोकरेज की रायQ3 नतीजों से पहले चुनिंदा शेयरों की लिस्ट तैयार: Airtel से HCL Tech तक, ब्रोकरेज ने बताए टॉप पिकBudget 2026: बजट से पहले सुस्त रहा है बाजार, इस बार बदलेगी कहानी; निवेशक किन सेक्टर्स पर रखें नजर?LIC के शेयर में गिरावट का संकेत! डेली चार्ट पर बना ‘डेथ क्रॉस’500% टैरिफ का अल्टीमेटम! ट्रंप ने भारत को सीधे निशाने पर लियाAmagi Media Labs IPO: 13 जनवरी से खुलेगा ₹1,789 करोड़ का इश्यू, प्राइस बैंड तय; चेक करें जरुरी डिटेल्स$180 मिलियन के शेयर सौदे पर सेबी की सख्ती, BofA पर गोपनीय जानकारी लीक करने का आरोपसोने को पछाड़कर आगे निकली चांदी, 12 साल के निचले स्तर पर पहुंचा गोल्ड-सिल्वर रेशियोStock To Buy: हाई से 40% नीचे मिल रहा आईटी स्टॉक, ब्रोकरेज ने कहा- खरीद लें; 71% तक चढ़ सकता है शेयर

बजट विद बीएस: द फाइन प्रिंट- राजकोषीय कुशलता के साथ वृद्धि पर जोर

‘बजट विद बीएस: द फाइन प्रिंट’ कार्यक्रम में वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के संपादकीय निदेशक ए के भट्टाचार्य के साथ वि​भिन्न मुद्दों पर चर्चा की।

Last Updated- July 31, 2024 | 10:05 PM IST
Budget without BS: The fine print – emphasis on growth with fiscal efficiency बजट विद बीएस: द फाइन प्रिंट- राजकोषीय कुशलता के साथ वृद्धि पर जोर

मुंबई में बुधवार को आयोजित ‘बजट विद बीएस: द फाइन प्रिंट’ कार्यक्रम में वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने बिज़नेस स्टैंडर्ड के संपादकीय निदेशक ए के भट्टाचार्य के साथ वि​भिन्न मुद्दों पर चर्चा की। सोमनाथन ने बजट से जुड़े सवालों के जवाब दिए और रोजगार योजना, पूंजीगत लाभ इंडेक्सेशन तथा राजकोषीय रोडमैप पर सरकार के दृ​ष्टिकोण के बारे में विस्तार से बताया।

रक्षा बजट कम करना

इसमें मामूली कमी की गई है। इसे चार अलग-अलग मदों में बांटा गया है और पूंजी परिव्यय की मांगों में कुछ बदलाव हुआ है। हमारी थल सेना, नौसेना, वायु सेना के लिए अलग-अलग मांगें होती थीं जिसे अब एक कर दिया गया है। ऐसे में नॉमिनल रा​शि में खास बदलाव नहीं हुआ है और वह लगभग सपाट रहा है। कुल व्यय बढ़ा है इसलिए हो सकता है प्रतिशत के लिहाज से इसमें कुछ कमी दिखे।

कर आधार को बढ़ाना स्रोत पर कर संग्रह, स्रोत पर कर कटौती को लेकर समय-समय पर कई कदम उठाए गए हैं और वे सफल रहे हैं। एक दशक पहले व्य​क्तिगत आयकर दाताओं की संख्या करीब 3 करोड़ थी जो अब बढ़कर करीब 8.2 करोड़ हो गई है। बड़ी समस्या यह है कि लोग रिटर्न भर रहे हैं, खास तौर पर पेशेवर लोग, मगर हमारा मानना है कि वे अपनी आय कम दिखाते हैं।

ऐसा भी नहीं है कि सारे पेशेवर ऐसा करते हैं। यही वजह है कि हमने बजट में खर्च वाले आइटम्स में स्रोत पर कर संग्रह (टीसीएस) का विस्तार किया है, जिसे करदाता रिटर्न भरकर रिफंड ले सकते हैं। लेकिन अगर आप अपनी महंगी खरीदारी के अनुरूप रिटर्न दाखिल नहीं कर रहे हैं तो यह आपको रिटर्न दाखिल करने के लिए प्रेरित करेगा या फिर वसूला गया टीसीएस नहीं मिलेगा।

पूंजीगत लाभ इंडेक्सेशन

जरूरी नहीं है कि इंडेक्सेशन हटाने से नुकसान होगा। इसमें कर की दर को 20 फीसदी से घटाकर 12.5 फीसदी किया गया है। ऐसे में कई मामलों में यह लाभकारी होगा। जहां तक ​​उन लोगों का सवाल है जो इसे निवेश के रूप में उपयोग नहीं करते हैं, उन्हें पूंजीगत लाभ आय को फिर से निवेश करने का अवसर होता है और उस पर कोई कर नहीं लगता है।

रोजगार को बढ़ावा देना

देश में रोजगार को बढ़ावा देने के लिए राजकोषीय प्रोत्साहन केंद्र सरकार के दायरे में हैं। इस बारे में सभी की सहमति है कि रोजगार को लेकर हमें कुछ करने की जरूरत है। यह आसान नहीं है। व्यापक आर्थिक स्थिरता और निवेश के लिए बेहतर माहौल बनाए रखने के अलावा सरकार और क्या कर सकती है?

विनिवेश के रुख में बदलाव

यह पोर्टफोलियो को उसी तरह से देखना है जैसे निवेशक देखते हैं। मेरे पास कुछ शेयरों का सेट है जो हम रखते हैं या कुछ सार्वजनिक उपक्रम में नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी है। हम अ​धिकतम रिटर्न चाहते हैं। हमारा जोर मूल्य सृजन रणनीति पर है। लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि निजीकरण नहीं होगा।

सीमा शुल्क की समीक्षा

आत्मनिर्भर भारत इसका मूल सिद्धांत है। मोबाइल पर शुल्क 20 फीसदी से घटाकर 15 फीसदी किया गया है। 2018 के चरणबद्ध विनिर्माण कार्यक्रम के तहत पहले शुल्क में इजाफा किया गया था।

First Published - July 31, 2024 | 10:01 PM IST

संबंधित पोस्ट