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महंगे ताप बिजली समझौते रद्द करेगी बीएसईएस, खरीदेगी अक्षय ऊर्जा

Last Updated- December 12, 2022 | 2:41 AM IST

दिल्ली की बिजली वितरण कंपनी (डिस्कॉम) रिलायंस इन्फ्रा प्रवर्तित बीएसईएस लिमिटेड 6 और ताप बिजली इकाइयों के साथ हुए दीर्घावधि बिजली खरीद समझौतों को रद्द करेगी। केंद्रीय बिजली नियामक आयोग (सीईआरसी) द्वारा एनटीपीसी की दादरी बिजली इकाई के साथ बीएसईएस का पीपीए खत्म करने की अनुमति दिए जाने के बाद यह सामने आया है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बीएसईएस उन इकाइयों के साथ अपना पीपीए खत्म करने की योजना बना रही है, जो 25 साल पुराने और महंगे हैं। 
 
बीएसईएस छह ताप बिजली संयंत्रों, ऊंचाहार, फरक्का, औरैया गैस, अंता, कहलगांव और दादरी गैस पावर स्टेशनों के साथ अपना पीपीए खत्म करने की प्रक्रिया में है। यह सभी संयंत्र सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड के हैं। कंपनी की गणना के मुताबिक इन संयंत्रों के साथ बिजली की खरीद लागत 6 रुपये प्रति यूनिट या इससे ज्यादा है। सूत्रों ने कहा कि इन संयंत्रों से बीएसईएस को 800 मेगावॉट बिजली की आपूर्ति होती है और इनकी जगह अक्षय ऊर्जा संयंत्रों से उत्पादित बिजली ली जाएगी। 
 
एक अधिकारी ने कहा कि डिस्कॉम का अनुमान है कि इन पीपीए को खत्म करने से 800 करोड़ रुपये की बचत होगी। अधिकारी ने कहा, ‘महंगी बिजली की जगह सस्ते हरित ईंधन से दिल्ली के उपभोक्ताओं के सालाना 800 करोड़ रुपये बचेंगे, जो 25 साल की अवधि में 20,000 करोड़ रुपये होगा।’  इस महीने की शुरुआत में सीईआरसी ने बीएसईएस को अनुमति दे दी थी कि वह एनटीपीसी की दादरी-1 बिजली संयंत्र से बिजली आपूर्ति में अपनी हिस्सेदारी का आवंटन खत्म करने के लिए बिजली मंत्रालय से संपर्क करे। इस बिजली से औसतन 6.50 रुपये प्रति यूनिट के भाव बिजली आपूर्ति होती है, जो दिल्ली को मिलने वाली सबसे महंगी बिजली में से एक है। 
 
सीईआरसी ने अपने शुल्क नियम-2019 में डिस्कॉम को अनुमति दी है कि उन्हें 25 साल से पुराने बिजली संयंत्रों के साथ बिजली खरीदने से इनकार करने का पहला अधिकार है। इसके बाद बीएसईएस ने नवंबर, 2020 में दादरी-1 बिजली संयंत्र से बिजली खरीद रोकने की मांग की। इसे सीईआरसी ने मंजूरी दे दी और बाद में दिल्ली बिजली नियामक आयोग (डीईआरसी) ने भी इसे मंजूरी दे दी थी। 

First Published - July 16, 2021 | 6:07 PM IST

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