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मार्जिन कम होने की वजह से ही बचे हैं हम मंदी के दौर में

Last Updated- December 07, 2022 | 4:44 PM IST

केबल और वायर बनाने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनियों में शुमार केईआई इंडस्ट्रीज इनका निर्यात करने वाली चुनिंदा शुरुआती कंपनियों में भी शुमार है।


तकरीबन 1,000 करोड़ रुपये की यह कंपनी बुनियादी ढांचा क्षेत्र में बढ़ रही गतिविधियों और बिजली की जबरदस्त मांग के बीच अपने लिए कारोबारी संभावनाएं देख रही है। कंपनी के सीएमडी अनिल गुप्ता से उनकी विस्तार योजनाओं के बारे में ऋषभ कृष्ण सक्सेना ने बातचीत की। पेश हैं मुख्य अंश :

केबल और वायर के उद्योग में विस्तार की आपको क्या संभावनाएं दिखती हैं? इसमें आप केईआई के लिए कितनी गुंजाइश देख रहे हैं?

इस कारोबार में अभी लगातार इजाफा तय है। रियल एस्टेट, बुनियादी ढांचा और ऊर्जा उत्पादन जैसे उद्योगों में सबसे जरूरी हिस्सा केबल और वायर ही होते हैं। इनके बिना इन उद्योगों की कोई भी परियोजना आगे नहीं बढ़ सकती है। इसलिए हमारे लिए तो माहौल खुशगवार ही है।

केबल और वायर उद्योग का आकार तकरीबन 16,000 करोड़ रुपये है। हर साल इसमें 30 फीसद का इजाफा हो रहा है। हमारी हिस्सेदारी तकरीबन 10 फीसद है और अगले तीन साल में हमें यह आंकड़ा 15 फीसद तक पहुंचने की उम्मीद है। सीमेंट, रिफाइनरी, विनिर्माण और बिजली के क्षेत्र में निवेश से हमारे कारोबार में अच्छी खासी बढ़ोतरी होना स्वाभाविक है।

दुनिया के कई देश कड़ी मौद्रिक नीतियों की मार झेल रहे हैं, जिसका असर उद्योगों पर भी पड़ा है। आपको नहीं लगता कि कुछ परियोजनाएं लटकने से आपके कारोबार को धक्का लगेगा या लागत बढ़ने से नुकसान होगा?

पहली बात, बुनियादी ढांचे या ऊर्जा के क्षेत्र की परियोजनाएं रुक ही नहीं सकतीं। भारत में भी सरकार हवाई अड्डा बनाने या विद्युत संयंत्र लगाने पर पूरा ध्यान दे रही है। हां, रियल एस्टेट में जरूर कुछ परियोजनाएं रुक रही हैं। लेकिन हमारे कारोबार में इसकी हिस्सेदारी कम है।

दूसरी बात लागत की आती है। हम मार्जिन को लेकर कभी बहुत संवेदनशील नहीं रहे। अपने उत्पादों पर हम महज 6 फीसद मार्जिन लेते हैं। इस बात को हमारे ग्राहक भी जानते हैं। यही वजह है कि लागत बढ़ने पर हम सीधे दाम बढ़ा देते हैं और ग्राहक भी उसको स्वीकार कर लेते हैं। इसीलिए नुकसान का कोई सवाल ही नहीं उठता।

विस्तार के लिए केईआई किन क्षेत्रों पर जोर दे रही है?

हमने हमेशा से निर्यात पर ज्यादा ध्यान दिया है। इस समय भी हमारी विस्तार की योजनाएं निर्यात के इर्द गिर्द घूम रही हैं। हम अगले 2 साल में अपने कारोबार को 2,000 करोड़ रुपये तक पहुंचाना चाहते हैं। इसके लिए 225 करोड़ रुपये का निवेश विस्तार पर किया जा चुका है और इतना ही अगले दो साल में और किया जाएगा। हां, अब हम हाउसिंग वायर के कारोबार में भी कदम रख रहे हैं।

केईआई के कुल कारोबार में अभी निर्यात की कितनी हिस्सेदारी है? इसे बढ़ाने के लिए कंपनी क्या कर रही है?

अभी हमारे कारोबार में निर्यात की 15 फीसद हिस्सेदारी है। हम अगले 2 साल में इसे बढ़ाकर 25 फीसद तक करना चाहते हैं। हम खास तौर पर हाई टेंशन (एचटी) केबल पर ध्यान दे रहे हैं। चोपनकी में हमारा संयंत्र है, जहां बने उत्पादों को निर्यात किया जाता है। इसमें हमने 75 करोड़ रुपये की लागत से विस्तार कर रहे हैं और सितंबर 2008 से यहां एचटी केबल भी बनने लगेंगे।

चोपनकी में अभी 10,000 किलोमीटर केबल का सालाना उत्पादन हो सकता है। हम मुख्य तौर पर खाड़ी देशों मसलन दुबई, सऊदी अरब और जर्मनी, फ्रांस, इटली, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका, ब्रिटेन, साइप्रस और मेक्सिको को निर्यात कर रहे हैं। लेकिन इनकी फेहरिस्त भी बढ़ रही है।

बेहतर प्रौद्योगिकी हासिल करने के लिए आप क्या कर रहे हैं?

विस्तार के लिए प्रौद्योगिकी बेहतर बनाना भी जरूरी है। इसके लिए हम कुछ अंतरराष्ट्रीय कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं। इनमें कोरिया की कंपनी भी शामिल है। उसके साथ तकनीकी करार किया जाएगा या साझा उपक्रम लगाया जाएगा।

हाउसिंग वायर के बाजार में अब तक केईआई का नाम कहीं नहीं दिखता। इसमें पैठ बनाने के लिए आपकी क्या योजनाएं हैं?

इसे हम अपने लिए बहुत अहम बाजार मान रहे हैं। हालांकि इस क्षेत्र में हम तीन उत्पाद पहले ही उतार चुके हैं, लेकिन इस पर ध्यान देना हमने अब शुरू किया है। इसके लिए हम खुदरा बाजार में भी खुद को ब्रांड के तौर पर स्थापित करने की कवायद में लगे हैं। अपने वितरक नेटवर्क को मजबूत करने की हमारी योजना है।

देश में हमारे 18 बड़े वितरक और तमाम डीलर हैं। इन वितरकों की संख्या हम चालू वित्त वर्ष में 50 करना चाहते हैं। इसके अलावा हम सिलवासा के अपने संयंत्र की क्षमता में भी लगभग 65 फीसद इजाफा कर रहे हैं, जो हाउसिंग वायर की जरूरतों को ही पूरा करेगा।

कारोबार के दूसरे किन क्षेत्रों में आप दखल बढ़ा रहे हैं?

एचटी केबल बनाने की क्षमता बढ़ाने के लिए हम अपने भिवाड़ी संयंत्र में विस्तार कर ही रहे हैं। इसके अलावा हम ठेके पर विद्युत सबस्टेश तैयार करने के लिए ईपीसी डिवीजन भी बना चुके हैं। यह डिवीजन साल में लगभग चार सबस्टेशन तैयार कर रहा है और हम इसकी क्षमता में भी लगातार इजाफा कर रहे हैं। इसमें रिलायंस एनर्जी और जयपुर विद्युत वितरण निगम लिमिटेड हमारे बड़े ग्राहकों में शुमार हैं।

आपको सबसे ज्यादा कारोबार किन क्षेत्रों से मिलता है?

हमारी कंपनी को बिजली और रिफाइनरी उद्योग से ज्यादा कारोबार हासिल होता है। रिलायंस एनर्जी, टाटा पावर, एनटीपीसी, पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन, इंडियन ऑयल जैसी कंपनियां हमारे बड़े ग्राहकों की सूची में शामिल हैं। राज्य विद्युत वितरण कंपनियां भी हमारी ग्राहक हैं।

First Published - August 13, 2008 | 12:59 AM IST

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