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Q3 में अमेरिकी बाजार ने भारतीय फार्मा पर डाला दबाव, जेनेरिक दवाओं की कीमतें बनीं बड़ी चुनौती

अमेरिकी बाजार में दबाव के बीच सिप्ला कमजोर, अलेम्बिक फार्मा मजबूत प्रदर्शन करती रही।

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अंजलि सिंह   
Last Updated- February 08, 2026 | 4:59 PM IST

वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही (Q3FY26) में अमेरिकी बाजार भारतीय दवा कंपनियों के लिए राहत की बजाय दबाव का कारण बना रहा। अमेरिका में जेनेरिक दवाओं की कीमतों पर लगातार दबाव, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुछ कंपनियों से जुड़े उत्पाद संबंधी मुद्दों के चलते इस बाजार से आने वाली कमाई कमजोर बनी रही।

हालांकि, इस चुनौतीपूर्ण माहौल के बीच भारतीय फार्मा कंपनियां नुकसान की भरपाई के लिए जटिल और नवोन्मेषी दवाओं के लॉन्च पर तेजी से फोकस करती नजर आईं।

FY27 तक बनी रह सकती है कीमतों पर मार

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिकी जेनेरिक दवा बाजार में कीमतों पर दबाव जल्द खत्म होने की उम्मीद कम है। प्राइमस पार्टनर्स के सीईओ और सह-संस्थापक निलय वर्मा के अनुसार, FY27 तक भी इस दबाव के पूरी तरह खत्म होने के संकेत नहीं हैं।

उनका कहना है कि तीखी प्रतिस्पर्धा, वितरण चैनलों का एकीकरण और जेनेरिक दवाओं का कमोडिटी बन जाना, कीमतों को नीचे की ओर धकेलता रहेगा। इसका सीधा असर भारतीय फार्मा कंपनियों की ग्रोथ पर पड़ सकता है।

नई रणनीति से मिल सकती है राहत

हालांकि तस्वीर पूरी तरह निराशाजनक भी नहीं है। विशेषज्ञों के मुताबिक, आने वाले 12 से 24 महीनों में कंपनियों का फोकस जटिल और विशिष्ट दवाओं पर बढ़ने से स्थिति में सुधार हो सकता है।

पेप्टाइड्स, इंजेक्टेबल्स, बायोसिमिलर और स्पेशियल्टी ड्रग्स जैसे सेगमेंट में प्रतिस्पर्धा अपेक्षाकृत कम और कीमत तय करने की क्षमता ज्यादा होती है। यही कारण है कि इन क्षेत्रों में विस्तार से जेनेरिक दवाओं की कमजोरी की भरपाई संभव मानी जा रही है।

Sun Pharma के अमेरिकी कारोबार में तीसरी तिमाही में सुस्ती

सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज की तीसरी तिमाही (Q3) में अमेरिकी बाजार में परफॉर्मेंस लगभग स्थिर रही। कंपनी की अमेरिका में फॉर्मुलेशन बिक्री सालाना आधार पर सिर्फ 0.6 प्रतिशत बढ़कर 477 मिलियन डॉलर पर पहुंची। हालांकि, इनोवेटिव दवाओं से मिली बढ़त को जेनेरिक दवाओं में बढ़ती प्रतिस्पर्धा ने काफी हद तक संतुलित कर दिया।

कंपनी की कुल समेकित आय में अमेरिका का योगदान इस तिमाही में करीब 27.5 प्रतिशत रहा। इस दौरान सन फार्मा ने अमेरिकी बाजार में तीन नए जेनेरिक उत्पाद पेश किए। इसके साथ ही एडवांस्ड क्यूटेनियस स्क्वैमस सेल कार्सिनोमा के इलाज के लिए Unloxcyt और Leqselvi को भी लॉन्च किया गया।

प्रबंधन के अनुसार, इन नई इनोवेटिव दवाओं को लेकर डॉक्टरों की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक रही है और डिस्ट्रीब्यूटर्स से शुरुआती ऑर्डर भी मिलने शुरू हो गए हैं। कंपनी को उम्मीद है कि आने वाले समय में ये उत्पाद अमेरिकी बाजार में ग्रोथ को नई गति दे सकते हैं।

डॉ. रेड्डीज की नॉर्थ अमेरिका आय में गिरावट, रेव्लिमिड की बिक्री में कमी प्रमुख कारण

डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज की नॉर्थ अमेरिका यूनिट ने इस तिमाही में सालाना आधार पर 12 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की है। Q3 में इस क्षेत्र की आमदनी लगभग 2,964 करोड़ रुपये रही, जबकि वित्तीय वर्ष के नौ महीनों में भी 12 प्रतिशत की कमी देखी गई।

इस गिरावट का मुख्य कारण रेव्लिमिड (लेनालिडोमाइड) की बिक्री में कमी और प्रमुख उत्पादों में दामों में लगातार गिरावट है। रेव्लिमिड कभी कंपनी की प्रमुख आय का स्रोत था, लेकिन अब कई जेनरिक कंपनियों के प्रवेश और कीमतों में तेज कमी के चलते इसने डॉ. रेड्डीज़ के अमेरिकी कारोबार पर दबाव डाला है।

हालांकि चुनौती के बावजूद कंपनी ने अपनी उत्पाद पाइपलाइन को मजबूत बनाए रखा है। इस तिमाही में डॉ. रेड्डीज़ ने छह नए उत्पाद लॉन्च किए और चार नई ANDA फाइलिंग्स अमेरिकी एफडीए के साथ की हैं।

विश्लेषकों के अनुसार, रेव्लिमिड की बिक्री में कमी से अमेरिकी बाजार में दबाव तो बढ़ा है, लेकिन नई उत्पाद लॉन्च और निरंतर फाइलिंग से कंपनी की लम्बी अवधि की योजना को मजबूती मिल रही है।

सिप्ला की अमेरिकी बाजार में कमी, अलेम्बिक फार्मा ने दिखाई मजबूती

फार्मा कंपनी सिप्ला की नॉर्थ अमेरिका बिज़नेस इस तिमाही में दबाव में रही। कंपनी की अमेरिकी आय में सालाना आधार पर 22 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,485 करोड़ रुपये तक रह गई। मुख्य वजह बनी लैनरीओटाइड दवा की सप्लाई में व्यवधान। वहीं, भारत में कंपनी का कारोबार स्थिर बना रहा, लेकिन अमेरिकी बाजार की कमजोरी ने कुल प्रदर्शन को प्रभावित किया।

सिप्ला प्रबंधन ने विश्वास जताया है कि मध्य अवधि में स्थिति सुधर सकती है। FY27 के लिए कंपनी की मजबूत पाइपलाइन में चार बड़े श्वसन रोग संबंधी लॉन्च (जैसे gAdvair), gVictoza की योजना और कई पेप्टाइड उत्पाद शामिल हैं।

वहीं, अलेम्बिक फार्मास्युटिकल्स ने अमेरिकी जेनेरिक्स बाजार में अपने प्रतिद्वंदियों से बेहतर प्रदर्शन किया। कंपनी की अमेरिकी बिक्री में 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई और यह 553 करोड़ रुपये तक पहुंची। इस सफलता के पीछे नए उत्पाद लॉन्च और मौजूदा उत्पादों की बिक्री में बढ़ोतरी रही, जबकि कीमतों में दबाव जारी रहा।

इस तिमाही में अलेम्बिक ने अमेरिका में दो नए उत्पाद लॉन्च किए और सात ANDA अनुमोदन प्राप्त किए, जिससे कुल अनुमोदन संख्या 232 हो गई। कंपनी ने संकेत दिया कि नए उत्पादों से-driven विकास 7-8 प्रतिशत सालाना की दर से जारी रह सकता है, विशेष रूप से इंजेक्टेबल्स, प्री-फिल्ड सिरिंज और आंखों की दवाओं के उत्पादन में निवेश के कारण।

First Published : February 8, 2026 | 4:59 PM IST