facebookmetapixel
DARPG डेटा में खुलासा: 2025 में श्रम मंत्रालय को मिलीं शिकायतें, कुल ग्रीवांस में 15.5% हिस्सेदारी‘हम ब्लैकमेल नहीं होने वाले’, टैरिफ पर EU और ब्रिटेन का ट्रंप को जवाब: यह फैसला रिश्तों में दरार डालेगाQ3 Preview: घरेलू बिक्री बढ़ी, दवा कंपनियों की Q3 आमदनी में 8-11% तक उछालUPI को ग्लोबल बनाने की जरूरत, छोटे मर्चेंट्स के लिए सेटलमेंट को सही करना जरूरी: Pay10 के फाउंडरवर्कप्लेस पर तेजी से बढ़ रहा है AI का इस्तेमाल, लेकिन ट्रेनिंग में पीछे छूट रही हैं कंपनियां: रिपोर्टMauni Amavasya 2026: प्रयागराज में संगम पर उमड़ी करोड़ों की श्रद्धालुओं की भीड़, शंकराचार्य विवाद में फंसेदुनिया भर में बढ़ रही भारतीय दवाओं की मांग, नाइजीरिया और ब्राजील बने नए बड़े ठिकानेMarket Outlook: इस हफ्ते शेयर बाजार की चाल तय करेंगे Q3 नतीजे और ग्लोबल संकेतMCap: मार्केट में SBI और Infosys का जलवा, Reliance समेत कई कंपनियों की वैल्यू में गिरावटनेविल टाटा की सर रतन टाटा ट्रस्ट में नियुक्ति की कोशिश फिर फेल, बोर्ड मीटिंग क्वोरम पूरा न होने से रद्द

बैंक कर्मचारियों के वेतन पर होगी बात

Last Updated- December 15, 2022 | 4:54 AM IST

सरकारी बैंकों का प्रबंधन 22 जुलाई को मजदूर संगठन के नेताओं के साथ वेतन को लेकर बातचीत बहाल करने जा रहा है। कोरोनावायरस के प्रसार से आर्थिक गतिविधियां प्रभावित होने के बाद पहली बार यह बातचीत होने जा रही है।
बैंक प्रबंधन का प्रतिनिधित्व करने वाले इंडियन बैंक एसोसिएशन (आईबीए) 22 जुलाई को मुंबई में वार्ता समिति की बैठक रखी है। यह करीब 5 महीने बाद वेतन पर बातचीत को लेकर पहली बैठक होने जा रही है। इसके पहले कोरोनावायरस के कारण की गई देशबंदी के पहले 29 फरवरी को बैठक हुई थी।
इस बैठक का महत्त्व बहुत ज्यादा है क्योंकि यह पहला मौका होगा, जब कोविड-19 का बैंकों की स्थिति पर पड़े असर को ध्यान में रखते हुुए बात होगी। कुछ निजी बैंकों और सरकारी बैंकों में वेतन में बदलाव  नवंबर 2017 से ही लंबित है, जो अक्टूबर 2022 तक 5 साल के लिए होगा।
आईबीए की टीम का नेतृत्व यूनियन बैंक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी राजकिरण राय जी करेंगे, जो  वार्ता समिति के चेयरमैन हैं। वहीं बैंक यूनियनों का यूनाइटेड फोरम बैंक कर्मचारियों की ओर से बैठक में हिस्सा लेगा।
पहले की बैठक में आईबीए ने वेतन में बढ़ोतरी की अपनी पेशकश पे स्लिप लागत पर 15 प्रतिशत कर दी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो बैंकों के वेतन के बिल में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी की पेशकश की गई थी, जिनमें वेतन व मिलने वाले अन्य मानदेय जैसे पेंशन व भुगतान वाली छुट्टी शामिल होती है। इससे बैंकों पर करीब 8,000 करोड़ रुपये बोझ पडऩे का अनुमान है। लेकिन इसमें कोविड-19 के असर पर उस समय विचार नहीं किया गया था।
फरवरी की बैठक के पहले बैंक यूनियनों ने मार्च में 3 दिन की हड़ताल बुलाई थी, जो बातचीत आगे बढऩे के कारण टाल दी गई थी। पिछले 3 साल में असंतोषजनक वेतन वृद्धि को लेकर हड़ताल का आयोजन करने वाले यूनियन के नेताओं का कहना है कि अब नए सिरे से बातचीत होगी।
बैंक यूनियन के एक शीर्ष नेता ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, ‘महामारी का निश्चित रूप से बैंकों की भुगतान क्षमता पर असर पड़ेगा, खासकर ऐसी स्थिति में जब हम लाखों बैंक कर्मचारियों के वेतन पर बात करने जा रहे हैं।’
पिछले कुछ दिनों में आईबीए ने यूनियन के नेताओं से अनौैपचारिक बातचीत की है। यूनियन के नेता ने कहा, ‘अब कोविड-19 असर को शामिल किए बगैर वेतन पर कोई बातचीत बेमानी होगी। निजी क्षेत्र ने भी लागत को तार्किक बनाने के कदम उठाए हैं, साथ ही केंद्र सरकार भी अपने कर्मचारियों को अतिरिक्त महंगाई भत्ता नहीं दे रही है।’

First Published - July 14, 2020 | 12:07 AM IST

संबंधित पोस्ट