पंगु करने वाली दूसरी लहर के बाद अस्पताल क्षेत्र सितंबर में पटरी पर आया, क्योंकि मरीज गैर-कोविड चिकित्सा के लिए आने लगे। देश के दूसरे सबसे बड़े अस्पताल नेटवर्क मणिपाल हॉस्पिटल्स के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी दिलीप जोस ने वर्ष 2022 के परिदृश्य के संबंध में सोहिनी दास से बातचीत की
वर्ष 2021 कितना खराब रहा?
दूसरी लहर अत्यंत परीक्षण वाली अवधि थी। बुनियादी ढांचे पर गंभीर दबाव के अलावा, महत्त्वपूर्ण वस्तुओं की आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के कारण नकदी प्रवाह बाधित हुआ। हमारी अग्रिम मोर्चे की क्लीनिकल टीमों की मांगें और भी अधिक चुनौतीपूर्ण थीं। लेकिन एक बड़ी सकारात्मक बात भी रही। जहां एक ओर अस्पताल आगे रहे, वहीं दूसरी ओर फार्मा, मेडटेक और बीमा कंपनियों सहित स्वास्थ्य सेवा के संपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र ने स्फूर्त प्रतिक्रिया देने के लिए सहयोग किया। उम्मीद है यह रफ्तार कायम रहेगी और एक देश के रूप में हम किसी भी अन्य महामारी, अगर ऐसा होता है, से निपटने के लिए बेहतर स्थिति में होंगे।
वर्ष 2022 के लिए ओमीक्रोन क्या भविष्यवाणी कर रहा है?
ओमोक्रोन की स्थिति अभी विकसित ही हो रही है, लेकिन शुरुआती संकेत अशुभ हैं। हालांकि इस समय मामलों की संख्या कम है, लेकिन वृद्धि दर खतरे का संकेत दे रही है और विशेषज्ञ तीसरी लहर की चेतावनी दे रहे हैं, जो शायद दूसरी से बड़ी हो। अगर तीसरी लहर बड़ी निकलती है, तो यह इस क्षेत्र के सुधार के लिए एक झटका होगा।
यह वैश्विक महामारी विस्तार योजनाओं को किस तरह प्रभावित कर रही है?
यह सच है कि आगे निवेश करने से पहले स्थिति का आकलन करने के लिए खास तौर पर वर्ष 2020 में एक विराम रहा। अलबत्ता जैसे-जैसे महामारी और उपचार के विकल्पों के संबंध में अधिक स्पष्टता आई और टीके उपलब्ध होने लगे, तो इस बात का विश्वास रहा कि भले ही दो या तीन वर्षों तक असर रहे, पर बुनियादी चीजें बरकरार रहने की संभावना है।
क्या आपको लगता है कि वर्ष 2022 कोविड या गैर-कोविड कारोबार से संचालित होगा?
हमने सितंबर 2021 से गैर-कोविड रोगियों की संख्या में उल्लेखनीय सुधार देखा है। हालांकि इसका एक हिस्सा विशेषज्ञता वाले कुछ क्षेत्रों में रुकी हुई मांग के मद्देनजर रहा हो, लेकिन दिसंबर की शुरुआत तक इसकी निरंतरता ने इस बात का संकेत दिया है कि अगर तीसरी लहर बड़ी चिंता का विषय नहीं बनती है, तो अगले साल अस्पतालों में ज्यादातर गैर-कोविड मरीजों का इलाज होते देखा जाएगा। हालांकि मामलों के तेजी वृद्धि को देखते हुए इस स्थिति में बदलावा आ सकता है।
महामारी के दौरान चिकित्सा पर्यटन को नुकसान हुआ है। वर्ष 2022 के लिए क्या दृष्टिकोण है?
वर्ष 2019 की तुलना में पिछले साल विदेशी मरीजों का केवल एक अंश ही नजर आया। अक्टूबर में इस स्थिति में बदलाव होना ही शुरू हुआ था और ऐसा लग रहा था कि अंतरराष्ट्रीय यात्रा शुरू होने के बाद सामान्य सुधार निकट ही है। अब यात्रा पर नए प्रतिबंधों की वजह से हम शायद चार से छह महीने और पीछे धकेल दिए गए हैं। एक और अधिक संरचनात्मक चिंता की बात यह है कि क्या किफायती चिकित्सा की यात्रा के लिए भारत को गंतव्य के रूप में देखने वाले देश उन अन्य देशों का विकल्प चुनेंगे, जो अब इस तरह के यातायात के लिए खुले हों। हालांकि भारत का मूल्य लाभ जोरदार है, लेकिन उपचार की जरूरत और लंबे इंतजार से उनकी पसंद पर असर पड़ सकता है।