भारती एयरटेल मोटे तौर पर भारत में 30,000 करोड़ रुपये और अफ्रीका में 1 अरब डॉलर (9,000 करोड़ रुपये) का पूंजीगत खर्च करेगी। इसके साथ ही वह डेटा सेंटरों में निवेश बढ़ाएगी, जो 1 गीगावॉट क्षमता से कहीं ज्यादा होगा। भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन और भारती एयरटेल के प्रवर्तक सुनील मित्तल ने पिछले सप्ताह निवेशकों के साथ बातचीत में यह जानकारी दी।
देश की दूसरी सबसे बड़ी दूरसंचार सेवा प्रदाता के सर्वप्रमुख ने कहा कि शेयर धारकों के हितों को सबसे ऊपर रखा जाएगा। कंपनी लाभांश जारी करने के लिए क्रमिक वृद्धि की नीति अपनाएगी, जिसे धीरे-धीरे बढ़ाया जाएगा। कंपनी मौके तभी लेगी, जब वह आकर्षक दांव होगा।
मित्तल ने यह भी कहा कि सूचीबद्ध कंपनी में 41 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाली भारती टेलीकॉम (बीटीएल) असल में भारती के स्वामित्व की मुख्य कंपनी होगी। इसके अलावा सिंगापुर की मुख्य शेयरधारक सिंगटेल और भारती ग्रुप के बीच शेष लगभग 8 प्रतिशत हिस्सेदारी व्यवस्थित तरीके से बाजार में आएगी और अगले कुछ सालों में उसे बेच दिया जाएगा। इस हिस्सेदारी में से 7 प्रतिशत सिंगटेल के पास और 1 प्रतिशत मित्तल परिवार के पास है।
निवेशकों के साथ इस बातचीत के बाद बोफा के विश्लेषकों ने एक नोट में कहा, ‘सिंगटेल बिक्री करती रहेगी और मित्तल के अनुसार इसे बेचने में शायद 3 से 4 साल लग सकते हैं। बीटीएल आखिरकार भारती का स्वामित्व रखने वाली अकेली प्रवर्तक कंपनी होगी।’
मित्तल ने यह भी कहा कि एयरटेल प्रमुख कारोबार को बढ़ाएगी और भारत या अफ्रीका दोनों में ही ग्रामीण या शहरी बाजार में कोई जगह नहीं छोड़ेगी। कंपनी लाभांश बढ़ाना जारी रखेगी और उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां क्रमिक वृद्धि वाली नीति लागू होगी, वहां लाभांश भी बढ़ेगा।
बोफा ने नोट में कहा, ‘इसके बाद वित्तीय सेवाओं, अफ्रीका में नए इलाकों और अगर मौजूदा पैठ के बाहर कोई खास विकल्प सामने आते हैं, तो प्रमुख कारोबार से इतर मौके मिलेंगे। कंपनी शेयर धारकों की राय का सम्मान करेगी और तभी दांव लगाएगी जब उन्हें दांव बहुत आकर्षक लगेंगे।’