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बॉन्ड इश्यू से धन जुटाएगी टाटा मोटर्स

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Last Updated- December 11, 2022 | 12:15 PM IST

व्यावसायिक वाहनों की देश की सबसे बड़ी निर्माता टाटा मोटर्स बॉन्ड इश्यू के जरिए 5,000 करोड़ रुपये उगाहने जा रही है।
यह राशि जगुआर और लैंड रोवर के अधिग्रहण के लिए शेष बचे 2 अरब डॉलर (करीब 10,000 करोड़ रुपये) के ब्रिज लोन को चुकता करने में खर्च किए जाएंगे।
धन उगाही की प्रक्रिया से जुड़े सूत्रों ने बताया कि भारतीय स्टेट बैंक अन्य बैंकों के साथ गारंटी दे रहा है। एसबीआई की सहयोगी एसबीआई कैप्स की इसमें अग्रणी भूमिका है। घटनाक्रम से जुड़े एक बैंकर ने बताया कि ये बॉन्ड इसी महीने जारी किए जाएंगे।
सूत्रों ने कहा कि एसबीआई कैप्स भारतीय जीवन बीमा निगम जैसे संस्थागत निवेशकों से इन बॉन्डों की खरीदारी के लिए बातचीत कर रही थी। इस बैंकर ने बताया कि इन बॉन्डों की परिपक्वता अवधि 2 से 7 साल हो सकती है।
टाटा मोटर्स के प्रवक्ता ने बताया कि कंपनी इस बारे में कुछ भी नहीं कहना चाहती। बचे कर्ज की आधी राशि का जुगाड़ जहां बॉन्ड इश्यू के जरिए किया जाएगा, वहीं आधी राशि सावधि कर्ज के जरिए जुटाए जाएगी।
उल्लेखनीय है कि टाटा मोटर्स ने फोर्ड के इन दोनों ब्रांडों जगुआर और लैंड रोवर को खरीद लिया है। पिछले साल जून में इसका अधिग्रहण करने की खातिर टाटा मोटर्स ने 3 अरब डॉलर (अभी के मुताबिक करीब 15,000 करोड़ रुपये) का ब्रिज लोन लिया था।
जनवरी में टाटा मोटर्स ने बताया कि उसने करीब 1 अरब डॉलर (5,000 करोड़ रुपये) का ऋण चुकता कर दिया है। कंपनी ने इसके लिए राइट्स इश्यू और टाटा स्टील, टाटा टेलीसर्विसेज सहित समूह की अन्य कंपनियों में अपनी हिस्सेदारी बेचने का सहारा लिया। गौरतलब है कि बाकी बची 2 अरब डॉलर की राशि 1 जून तक चुकाई जानी है।
कंपनी की शुरुआती योजना थी कि विदेशी इक्विटी इश्यू और कंपनी का निवेश बेच कर धन का इंतजाम किया जाएगा। लेकिन यह योजना मूर्तरूप नहीं ले सकी क्योंकि बाजार की स्थिति प्रतिकूल हो गई। इस वजह से टाटा मोटर्स को अपने कर्जदाताओं से कर्ज को रिफाइनैंस कराने के लिए बातचीत करनी पड़ी।
एक बैंकर के मुताबिक, अब इस योजना को नए सिरे से बनाया जा रहा है क्योंकि कर्ज का बड़ा हिस्सा बॉन्ड के जरिए जुटाया जाएगा। हालांकि लंदन इंटरबैंक ऑफर रेट थोड़ा सस्ता हुआ है। फिर भी भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों से धन जुटाना मुश्किल बना हुआ है।
3 अरब डॉलर का कर्ज जुटाने में सिटीसमूह और जेपी मॉर्गन मुख्य प्रबंधक थे। इसमें एसबीआई, स्टैंडर्ड चार्टर्ड, बीएनपी परिबास और टोक्यो मित्सुबिशी यूएफएच ने भी योगदान दिया था।

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First Published - May 8, 2009 | 10:57 PM IST

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