अब आप स्विगी (Swiggy) से खाना मंगाएंगे तो आपको हर ऑर्डर पर बतौर प्लेटफॉर्म शुल्क 2 रुपये देने पड़ सकते हैं। फूड एग्रीगेटर प्लेटफॉर्म स्विगी सभी यूजर्स से यह शुल्क वसूलने जा रही है चाहे ऑर्डर बड़ा हो या छोटा। फिलहाल यह शुल्क बेंगलूरु और हैदराबाद में लगाया गया है। बाद में कंपनी अन्य क्षेत्रों में भी इसका विस्तार कर सकती है। इसके जरिये कंपनी अपने खर्च पर काबू करना चाहती है।
पिछले हफ्ते कई चरणों में शुरू किया गया यह शुल्क फिलहाल केवल फूड डिलिवरी पर ही वसूला जाएगा। स्विगी की क्विक कॉमर्स इकाई इंस्टामार्ट के जरिये मंगाए जाने वाले ऑर्डर पर यह शुल्क नहीं लग रहा है। मगर फूड डिलिवरी में यह स्विगी वन के ग्राहकों पर भी लागू होगा। स्विगी वन कंपनी की सबस्क्रिप्शन योजना है, जिसके सदस्यों से ऑर्डर पर डिलिवरी शुल्क नहीं लिया जाता।
स्विगी के प्रवक्ता ने कहा, ‘यह प्लेटफॉर्म शुल्क सभी फूड ऑर्डर पर लिया जाने वाला मामूली शुल्क है। इससे हमें अपना प्लेटफॉर्म चलाने और उसे बेहतर बनाने में मदद मिलेगी। साथ ही इससे उपयोगकर्ताओं को ऐप का बिना दिक्कत अनुभव दिलाने के लिए सुविधाएं बेहतर करने में भी मदद मिलेगी।’
बेंगलूरु की इस डेकाकॉर्न (10 अरब डॉलर से अधिक मूल्य की कंपनी) ने कहा है कि उसके फूड डिलिवरी एवं क्विक कॉमर्स कारोबार को मुनाफे में आने में अनुमान से अधिक समय लग जाएगा। प्लेटफॉर्म शुल्क लगाने से कंपनी को अतिरिक्त आमदनी होगी, जिससे उसे अपने खर्च की कुछ हद तक भरपाई करने में मदद मिलेगी।
एचएसबीसी के विश्लेषकों के अनुसार वित्त वर्ष 2022 में स्विगी का खर्च बढ़कर 3,900 करोड़ रुपये हो गया, जबकि उसकी प्रमुख प्रतिस्पर्द्धी जोमैटो ने इस दौरान महज 700 करोड़ रुपये खर्च किए। केवल दो कंपनियों के वर्चस्व वाले फूड डिलिवरी बाजार में जोमैटो ने वित्त वर्ष 2022 के बाद करीब 13 फीसदी हिस्सेदारी हासिल कर ली है।
एचएसबीसी ने पिछले महीने एक नोट में कहा था कि वित्त वर्ष 2023 की चौथी तिमाही में गुरुग्राम की इस कंपनी के पास 56 फीसदी बाजार हिस्सेदारी थी। इसमें उसे जोमैटो गोल्ड लॉयल्टी कार्यक्रम से काफी मदद मिली। स्विगी के पास 44 फीसदी बाजार हिस्सेदारी थी।
विश्लेषकों को लग रहा है कि दोनों कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी में अंतर आगे और बढ़ सकता है। उनका कहना है कि अगले वित्त वर्ष के अंत तक जोमैटो की बाजार हिस्सेदारी बढ़कर 57 फीसदी हो सकती है, जबकि स्विगी की बाजार हिस्सेदारी घटकर 43 फीसदी रह सकती है।
मामूली दिखने वाले 2 रुपये के इस प्लेटफॉर्म शुल्क के जरिये स्विगी अच्छी खासी रकम जुटा सकती है क्योंकि वह रोजाना 15 लाख से अधिक ऑर्डर पहुंचाती है। वह इस रकम का उपयोग अपने मुख्य कारोबार को रफ्तार देने में कर सकती है। स्विगी ने यह कदम तब उठाया है, जब वह सूचीबद्ध होने की तैयारी कर रही है।
कंपनी ने जनवरी में चुनौतीपूर्ण आर्थिक माहौल और कारोबार में नरमी का हवाला देते हुए अपने 6,000 में से 380 कर्मचारी बाहर कर दिए थे। स्विगी का घाटा वित्त वर्ष 2022 में 2.24 गुना बढ़कर 3,628.9 करोड़ रुपये हो गया, जो वित्त वर्ष 2021 में 1,616.9 करोड़ रुपये ही था। उसकी लागत करीब 224 फीसदी बढ़ गई, जिसके कारण घाटा भी बढ़ गया। वित्त वर्ष 2022 में कंपनी का खर्च बढ़कर 9,748.7 करोड़ रुपये हो गया, जो एक साल पहले 4,292.8 करोड़ रुपये था।