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सत्यम की हुई जगहंसाई, निदेशकों की खिंचाई

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Last Updated- December 08, 2022 | 10:03 AM IST

मायटास मामले में सत्यम कंप्यूटर की किरकिरी होने के बाद अब कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों को आलोचना झेलनी पड़ रही है।


सत्यम द्वारा दो प्रमोटर कंपनियों को खरीदने के फैसले को उद्योग जगत के प्रमुख और स्वतंत्र निदेशक गलत बता रहा हैं और उनका कहना है कि इस पूरे प्रकरण में कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों ने अपनी जिम्मेदारियां ठीक तरीके से नहीं निभाईं। शेयरधारकों और ग्राहकों के भारी विरोध को देखते हुए सत्यम ने अधिग्रहण के फैसले को वापस ले लिया था।

गोदरेज समूह के अध्यक्ष आदि गोदरेज ने इस मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा कि स्वतंत्र निदेशकों को अपना पक्ष मजबूती के साथ रखना चाहिए। गोदरेज के अनुसार, ‘निदेशकों की अपनी स्वतंत्र भूमिका होती है और उन्हें इसी को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।’

सत्यम के निदेशक मंडल, जिसमें 5 स्वतंत्र निदेशक भी शामिल हैं, ने मंगलवार को मिल कर संस्थापक के उस प्रस्ताव को मंजूरी दे दी थी ।

जिसमें मायटास इन्फ्रास्ट्रक्चर में 51 फीसदी हिस्सेदारी और मायटास प्रॉपर्टीज के अधिग्रहण की बात कही गई थी। जिन दोनों कंपनियां के अधिग्रहण की बात कही गई थी वे सत्यम के अध्यक्ष बी रामालिंग राजू के रिश्तेदारों की हैं।

सत्यम कंप्यूटर के बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक टी आर प्रसाद ने बताया, ‘हमारा उद्देश्य शेयरधारकों का भरोसा जीतना था। हमनें इस पर विचार किया और हमें यही लगा कि यह फैसला लंबे समय में कंपनी के हितों के मुताबिक होगा।’

सॉफ्टवेयर कंपनी के दूसरे कारोबारों में कदम रखने के फैसले को स्वतंत्र निदेशकों से मंजूरी मिल चुकी है, इस पर उन्होंने कहा, ‘कई बार उद्यमी कुछ ऐसे विकल्प लेकर आते हैं जो परंपरा से अलग हट कर हों।’

सत्यम ने मायटास इन्फ्रा और मायटास प्रॉपर्टीज को खरीदने के लिए 1.6 अरब डॉलर की पेशकश की थी, जिसमें से 1.3 अरब डॉलर तो मायटास प्रॉपर्टीज को खरीदने के लिए चुकाए जाने थे। मायटास प्रॉपर्टीज रियल एस्टेट की कंपनी है जिसके पास डीएलएफ के बराबर जमीन सुरक्षित है।

प्रसाद ने पूछा, ‘अगर हम लार्सन ऐंड टूब्रो और पुंज लॉयड जैसी कंपनियां खरीदना भी चाहते तो क्या यह हमारे लिए मुमकिन हो पाता?’ उन्होंने कहा कि स्वतंत्र निदेशक होने के नाते उन सभी जमीन और उससे जुड़ी संपत्तियों की खरीद के लिए अपनी शर्तों को रखा था।

हालांकि, सत्यम ने अधिग्रहण का जो फैसला लिया था उसे निवेशकों ने तुरंत ही शेयर बाजारों के जरिए खारिज कर दिया था जब कंपनी के शयरों में रिकॉर्ड गिरावट दर्ज की गई थी। इस घटना के 12 घंटों के भीतर ही कंपनी को अपने फैसले को वापस लेना पड़ा था।

वहीं निदेशकों के इस फैसले के बारे में गोदरेज ने कहा कि कारोबारी फैसले सिद्धांतों को ध्यान में रखकर लेने चाहिए नियमों को ध्यान में रखकर नहीं।

स्वतंत्रता पर उठने लगी आवाज

आदि गोदरेज : निदेशकों की अपनी स्वतंत्र भूमिका होती है और उन्हें इसी को ध्यान में रखते हुए फैसले लेने चाहिए।

टी आर प्रसाद : हमारा उद्देश्य शेयरधारकों का भरोसा जीतना था। हमने इस पर विचार किया और हमें यही लगा कि यह फैसला लंबे समय में कंपनी के हित में है।

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First Published - December 18, 2008 | 11:32 PM IST

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