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आरइन्फ्रा ने केपीएमजी को हटाया

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Last Updated- December 15, 2022 | 8:23 PM IST

रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर (आरइन्फ्रा) ने नई दिल्ली में अपनी दो बिजली वितरण कंपनियों में 51 फीसदी हिस्सेदारी की बिक्री के लिए केपीएमजी को नियुक्त किया है। लेकिन अब आरइन्फ्रा ने हितों के टकराव का हवाला देते हुए केपीएमजी को बिक्री प्रक्रिया से बाहर कर दिया है।
केपीएमजी को इन दोनों बिजली वितरण कंपनियों के लिए किसी उपयुक्त खरीदार को तलाशने का काम सौंपा गया था लेकिन वह संभावित खरीदारों से कोई अच्छा प्रस्ताव हासिल करने में विफल रही। टाटा, अदाणी और सीईएससी सहित कई कंपनियां बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना के लिए बोली लगाने की योजना बना रही थीं लेकिन आरइन्फ्रा द्वारा अधिक मूल्यांकन मांगे जाने का हवाला देते हुए उन्होंने अपने कदम वापस ले लिए थे।
सरकारी बिजली उत्पादक कंपनी एनटीपीसी ने दिल्ली बिजली नियामक को पत्र लिखकर कहा है कि वह दोनों कंपनियों (बीएसईएस राजधानी और बीएसईएस यमुना) के लिए बोली लगाने के लिए तैयार है बशर्ते पूरी बोली प्रक्रिया पारदर्शी हो। इन दोनों बिजली वितरण कंपनियों में दिल्ली सरकार की 49 फीसदी हिस्सेदारी है।
इस मामले के करीबी एक बैंकर ने कहा कि उभरते हितों के टकराव के कारण आपसी सहमति से केपीएमजी को इस प्रक्रिया से दूर रखने का निर्णय लिया गया है। केपीएमजी के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया। बीएसईएस के प्रवक्ता ने हितों के टकराव पर कोई टिप्पणी नहीं की।
बिक्री प्रक्रिया से केपीएमजी को हटाने का मतलब साफ है कि रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को पूरी प्रक्रिया नए सिरे से शुरू करनी पड़ेगी। बैंकरों ने कहा कि कोरोनावायरस वैश्विक महामारी के कारण कई विदेशी संभावित बोलीदाताओं ने भी फिलहाल सुरक्षित दांव लगाने का निर्णय लिया है। एक बैंकर ने कहा, ‘इसके अलावा इन दोनों वितरण कंपनियों पर बिजली उत्पादक कंपनियों का कुल मिलाकर करीब 16,000 करोड़ रुपये का बकाया है। इससे भी बिक्री प्रक्रिया प्रभावित हुई है।’
इन दोनों बिजली वितरण कंपनियों को पूर्वी और दक्षिणी दिल्ली क्षेत्र के लिए बिजली वितरण लाइसेंस प्राप्त है। इन क्षेत्रों में 40 लाख से अधिक उपभोक्ता मौजूद हैं। रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर का शेयर आज 17.45 रुपये पर बंद हुआ जबकि एक साल पहले कंपनी का शेयर 100 रुपये के स्तर पर कारोबार कर रहा था।
संभावित बोलीदाताओं में टाटा पावर के पास नई दिल्ली में पहले से ही एक बिजली वितरण कंपनी है जबकि सीईएससी पड़ोस के नोएडा क्षेत्र में बिजली की आपूर्ति करती है। अदाणी समूह मुंबई में बिजली की आपूर्ति कर रहा है। उसने 18,000 करोड़ रुपये के एक सौदे के तहत रिलायंस इन्फ्रास्ट्रक्चर से बीएसईएस मुंबई का अधिग्रहण किया था।
सरकारी कंपनी एनटीपीसी अपनी पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक इकाई एनटीपीसी विद्युत व्यापार निगम (एनवीवीएन) के जरिये बिजली की खुदरा बिक्री कर सकती है। एनवीवीएन के पास सबसे अधिक बिजली कारोबार का लाइसेंस प्राप्त है जिससे वह बिजली खरीद अनुबंध कर सकती है।
एनटीपीसी ने इससे पहले भी बिजली वितरण कारोबार में कदम रखने के कई प्रयास किए हैं। वह बीएसईएस कंपनियों को करीब 1,500 मेगावॉट बिजली की बिक्री करती है।
दिलचस्प है कि दोनों बीएसईएस कंपनियां इस मुद्दे पर भी कानूनी लड़ाई लड़ रही हैं कि क्या नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) को उनके बहीखाते की जांच करने का अधिकार है। बैंकर ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की अगली सुनवाई के लिए फिलहाल कोई तिथि निर्धारित नहीं है लेकिन यदि सर्वोच्च न्यायालय द्वारा सीएजी को ऑडिट करने का अधिकार दिया जाता है तो 2002 से ही कंपनी के बहीखाते की जांच शुरू हो जाएगी। बैंकर ने कहा कि इससे नए मालिक के लिए मुकदमेबाजी का कहीं अध्धिक झंझट पैदा हो जाएगा। 

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First Published - June 1, 2020 | 11:39 PM IST

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