एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व को मूल्य वृद्धि से दम

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 11, 2022 | 9:16 PM IST

रोजमर्रा के इस्तेमाल की वस्तुएं (एफएमसीजी) बनाने वाली कंपनियों ने चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान राजस्व में औसतन दो अंकों की वृद्धि दर्ज की हैं। हालांकि तिमाही के दौरान मार्जिन और मात्रात्मक बिक्री पर दबाव बरकरार रही क्योंकि महंगाई के कारण उपभोक्ता अपने खर्च में कटौती कर रहे हैं। कच्चे माल में तेजी के कारण लागत पर दबाव को कम करने के लिए एफएमसीजी कंपनियों द्वारा की गई मूल्य वृद्धि से उपभोक्ताओं को अपने खपत में कटौती करनी पड़ रही है। अधिकतर एफएमसीजी कंपनियों के वित्तीय नतीजों में यह रुझान दिखा।
लक्स साबुन सहित तमाम उत्पाद बनाने वाली प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान यूनिलीवर का राजस्व दिसंबर तिमाही में 10.3 फीसदी बढ़कर 13,439 करोड़ रुपये हो गया। हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में कम खपत के कारण मात्रात्मक वृद्धि नकारात्मक रही लेकिन शहरी मांग के बल पर एफएमसीजी कंपनी ने तिमाही के दौरान कुल मात्रात्मक बिक्री में 2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की। इस दौरान एचयूएल का मार्जिन 105 आधार अंक बढ़कर 25.8 फीसदी हो गया।
पैराशूट नारियल तेल बनाने वाली कंपनी मैरिको ने भी तीसरी तिमाही के दौरान घरेलू बाजार में मात्रात्मक बिक्री में स्थिरता दर्ज की। हालांकि तिमाही के दौरान कंपनी का राजस्व 13.4 फीसदी बढ़कर 2,407 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले की समान अवधि में 2,122 करोड़ रुपये रहा था।
फिलिप कैपिटल ने अपनी एक रिपोर्ट में कहा, ‘वित्त वर्ष 2022 की तीसरी तिमाही के लिए मैरिको के वित्तीय नतीजे हमारे अनुमान से कमतर रहे। इसकी मुख्य वजह प्रमुख कच्चे माल की कीमतों में तेजी (राइस ब्रान तेल में 29 फीसदी, एलएलपी में 17 फीसदी, एचडीपीई में 24 फीसदी की तेजी) और महंगाई का पूरा बोझ ग्राहकों के कंधों पर न डालने संबंधी प्रबंधन की रणनीति रही।’
मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज ने भी एफएफसीजी कंपनियों के वित्तीय नतीजों की अपनी एक समीक्षा रिपोर्ट में कहा कि अधिकतर कंपनियों ने पिछली दो से तीन तिमाहियों के दौरान की गई मूल्य वृद्धि और कमजोर आधार के बल पर बिक्री में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की है।
डाबर इंडिया का राजस्व तीसरी तिमाही के दौरान 7.8 फीसदी बढ़कर 2,942 करोड़ रुपये हो गया जबकि उसके भारतीय एफएमसीजी कारोबार की मात्रात्मक बिक्री में महज 2 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। डाबर इंडिया के सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, ‘तिमाही के दौरान 13 फीसदी की अप्रत्याशित मुद्रास्फीति और कमजोर ग्राहक धारणा के कारण कुल मिलाकर कारोबारी परिदृश्य काफी चुनौतीपूर्ण रहा। हमने मामूली मूल्य वृद्धि और लागत में कटौती के उपायों के जरिये महंगाई के प्रभाव को कुछ हद तक कम किया।’
गोदरेज कंज्यूमर प्रोडक्ट्स की बिक्री चालू वित्त वर्ष की तीसरी तिमाही के दौरान 8.2 फीसदी बढ़कर 3,274 करोड़ रुपये हो गई। तिमाही के दौरान कंपनी का परिचालन राजस्व 4.52 फीसदी बढ़कर 3,208 करोड़ रुपये हो गया जो एक साल पहले की समान अवधि में 3,070 करोड़ रुपये रहा था।
तिमाही के दौरान कच्चे माल में तेजी के कारण ब्रिटानिया इंडस्ट्रीज के शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज की गई। उसका शुद्ध लाभ 18.6 फीसदी घटकर 371 करोड़ रुपये रह गया जबक राजस्व 13.7 फीसदी बढ़कर 3,531 करोड़ रुपये हो गया। कंपनी के प्रबंध निदेशक वरुण बेरी ने कहा कि कंपनी ने मात्रात्मक बिक्री में ऊपरी एकल अंक में वृद्धि दर्ज की है जो उद्योग से अधिक है।
आईटीसी का प्रदर्शन दूसरों से अलग रहा। हालांकि कंपनी अपनी मात्रात्मक बिक्री के आंकड़ों का खुलासा नहीं करती है लेकिन तिमाही के दौरान उसके समेकित राजस्व में 30 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई। इसे मुख्य तौर पर सिगरेट कारोबार में सुधार से बल मिला।

First Published : February 13, 2022 | 11:31 PM IST