दूरसंचार उपकरण निर्माताओं और कंपनियों को राहत देते हुए दूरसंचार विभाग ने सोमवार की शाम संशोधित अधिसूचना के जरिये भारत में 4जी/5जी उत्पादों की अनिवार्य टेस्टिंग एवं प्रमाणन की तारीख एक साल तक बढ़ाकर 1 जुलाई 2023 कर दी है।
दूरसंचार कंपनियों और उपकरण निर्माताओं ने यह स्पष्ट किया है कि 1 जुलाई की समय-सीमा (पहले निर्धारित) पर यदि अमल किया गया तो इससे इस साल के अंत से 5जी सेवाओं की पेशकश चुनौतीपूर्ण हो जाएगी, क्योंकि 4जी/5जी उत्पादों की टेस्टिंग के लिए बाहरी लैब पर्याप्त नहीं हैं। इसलिए यदि दूरसंचार कंपनियां नीलामी के बाद उपकरणों के लिए आदेश देती हैं तो इनके आयात में 6-8 महीने तक का विलंब होगा।
नए टेस्टिंग एवं प्रमाणन नियमों के तहत, माइक्रोवेव, रेडियो, राउटर जैसे उपकरण का आयात 1 जुलाई के बाद देश के अंदर किसी बाहरी पार्टी की लैब के प्रमाणन के बगैर नहीं किया जा सकेगा। इन्हें सुरक्षा, उत्सर्जन और अन्य तकनीकी मानकों पर टेलीकम्युनिकेशन इंजीनियरिंग सेंटर द्वारा भी प्रमाणित कराए जाने की जरूरत होगी।
लेकिन ये प्रयोगशालाएं अभी भी देश में ऐसी जांच में सक्षम नहीं हैं, इसलिए दूरसंचार कंपनियों को डर है कि खरीद या आयात के ऑर्डरों से संबंधित नेटवर्क बाधित होगा। पिछले शुक्रवार से पहले ही नए उपकरण के लिए आयात कई वैश्विक विक्रेताओं द्वारा रोक दिया गया था, क्योंकि समय-सीमा कुछ ही सप्ताह दूर थी।
समय-सीमा बढ़ने से सिर्फ 5जी उपकरण आयात के लिए राहत भी मिलेगी, जिसे समान प्रक्रिया से गुजरना होगा, जो 1 जनवरी 2023 निर्धारित की गई थी। इस आदेश के साथ अब इसे आगे बढ़ाया जाएगा।
यह निर्णय दूरसंचार विभाग और उन हितधारकों के बीच लंबी बातचीत के बाद लिया गया था, जिन्होंने समय सीमा बढ़ाने या उसे तब तक स्थगित रखने का सुझाव दिया था जब तक कि थर्ड पार्टी टेस्टिंग लैब देश में पर्याप्त तौर पर उपलब्ध न हों। सरकार ने हितधारकों को आश्वस्त किया था कि कम से कम एक लैब जुलाई तक परिचालन में लाई जाएगी, लेकिन यह भारी मांग के लिहाज से पर्याप्त नहीं थी।
दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि जहां नए उत्पादों की खरीदारी जुलाई की समय सीमा के दायरे में आएगी।
दूरसंचार उपकरण निर्माताओं के संगठन (टेमा) ने सुझाव दिया था कि अनिवार्य टेस्टिंग नियम गैर-जरूरी हैं और इनसे परहेज किया जाना चाहिए।
टेमा का तर्क है कि नई विश्वसनीय उत्पाद नीति के साथ दूरसंचार कंपनियों द्वारा सभी दूरसंचार उत्पादों को पहले ही इसके दायरे में लाया जा चुका है। किसी शेष उत्पाद को भारतीय मानक ब्यूरो के दायरे में खरीदा जा सकेगा। सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) ने 6 महीने के विस्तार को कहा था। कंपनियां 18 महीने तक का समय विस्तार चाहती थीं।