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Reliance Power का तगड़ा कमबैक! मुनाफे और कर्जमुक्ति से बढ़ा बाजार का भरोसा, दो हफ्ते में 12% चढ़ा स्टॉक

Reliance Power की कुल आय बढ़कर ₹2,159.44 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹1,998.79 करोड़ थी।

Last Updated- February 10, 2025 | 10:24 AM IST
Anil Ambani Reliance Power QIP
Representative image

अनिल अंबानी की रिलायंस पावर ने नुकसान से मुनाफे तक का बड़ा मोड़ लेते हुए अक्टूबर-दिसंबर 2024 तिमाही में ₹41.95 करोड़ का प्रॉफिट दर्ज किया है। एक साल पहले 1,136.75 करोड़ रुपये के भारी नुकसान में डूबी इस कंपनी ने अब तेजी से वापसी कर ली है। बढ़ती आमदनी और ऑपरेशनल खर्चों में कटौती के दम पर कंपनी ने ये कामयाबी हासिल की है, जो इसके वित्तीय भविष्य के लिए उम्मीद की नई किरण लेकर आई है। रेगुलेटरी फाइलिंग में यह जानकारी सामने आई है।

रिलायंस पावर की कुल आय बढ़कर ₹2,159.44 करोड़ हो गई, जो पिछले साल इसी तिमाही में ₹1,998.79 करोड़ थी। वहीं, कंपनी के खर्च घटकर ₹2,109.56 करोड़ रह गए, जबकि पिछले साल की तीसरी तिमाही में ये ₹3,167.49 करोड़ थे। 31 दिसंबर 2024 तक कंपनी की नेट वर्थ ₹16,217 करोड़ दर्ज की गई।

रिलायंस पावर बनी पूरी तरह कर्जमुक्त

रिलायंस पावर ने अपनी वित्तीय यात्रा में नया अध्याय जोड़ते हुए स्टैंडअलोन बेसिस पर पूरी तरह कर्जमुक्त (Debt-Free) बनने का ऐलान किया है। अप्रैल से दिसंबर 2024 के बीच कंपनी ने 4,217 करोड़ रुपए का भारी-भरकम कर्ज चुका दिया।

कंपनी ने एक बयान में कहा कि उसने शून्य बैंक कर्ज (Zero Bank Debt) का दर्जा हासिल कर लिया है, यानी अब कंपनी पर किसी भी निजी या सरकारी बैंक का कोई कर्ज बाकी नहीं है।

इस बड़ी सफलता के पीछे रणनीतिक कदमों की लंबी लिस्ट है। कंपनी ने ICICI बैंक, एक्सिस बैंक, DBS और IDBI बैंक जैसे बड़े कर्जदाताओं का पूरा बकाया चुका दिया। एसेट ऑप्टिमाइजेशन और पूंजी निवेश (Capital Infusion) ने बैलेंस शीट को और मजबूत किया, जिससे ये संभव हो पाया।

कहानी यहीं खत्म नहीं होती। रिलायंस पावर की सब्सिडियरी Rosa Power Supply Company ने भी एक बड़ा कारनामा करते हुए सिंगापुर की Värde Partners को 1,318 करोड़ रुपए एडवांस में चुका दिए और खुद भी कर्जमुक्त हो गई।

ये कर्जमुक्ति न केवल कंपनी की वित्तीय ताकत को दर्शाती है, बल्कि भविष्य में इसके विकास के रास्ते को और मजबूत बनाएगी।

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Reliance Power की नेट वर्थ और महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट्स में कामयाबी

Reliance Power ने तीसरी तिमाही के अंत में अपनी कुल नेट वर्थ ₹16,217 करोड़ ($1,894 मिलियन) दर्ज की है। कंपनी की परफॉरमेंस में बड़े पावर प्रोजेक्ट्स और नई डील्स का अहम योगदान रहा है।

टॉप परफॉर्मेंस देने वाले पावर प्लांट्स

मध्य प्रदेश में स्थित 3,960 मेगावाट का Sasan Ultra Mega Power Project देश के सबसे बेहतरीन परफॉर्मिंग पावर प्लांट्स में गिना गया। इसने 93% PLF (Plant Load Factor) हासिल कर अपनी क्षमता का प्रभावी प्रदर्शन किया। वहीं, उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर में 1,200 मेगावाट का Rosa Power Plant लगभग 97% उपलब्धता पर काम करता रहा, जो इसे बेहद भरोसेमंद बनाता है।

सोलर एनर्जी में बड़ी डील

कंपनी की सब्सिडियरी Reliance NU Suntech Private Ltd को Solar Energy Corporation of India (SECI) से 930 मेगावाट प्लस 1,860 MWH के सोलर बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) प्रोजेक्ट का कॉन्ट्रैक्ट मिला है। यह प्रोजेक्ट कंपनी की रिन्युएबल एनर्जी क्षेत्र में मजबूत उपस्थिति को दर्शाता है।

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कंपनी के शेयरों की ताजा स्थिति

Reliance Power Ltd के शेयर में आज (10 फरवरी) हल्की गिरावट देखी गई। सुबह 09:45 बजे, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर Reliance Power का शेयर 0.69 फीसदी फिसलकर ₹41.55 के स्तर पर कारोबार करता दिखा। पिछले दो हफ्तों में Reliance Power के शेयर का भाव NSE पर ₹36.71 से बढ़कर ₹41.72 प्रति शेयर हो गया है। इस दौरान कंपनी के शेयर में करीब 12% से अधिक की तेजी देखने को मिली।

2025 में Reliance Power ने Neeraj Parakh को दी ये जिम्मेदारी

अनिल अंबानी अपनी कंपनी के बिजनेस को बढ़ाने के लिए लगातार एक्टिव हैं। उनकी कंपनी रिलायंस पावर (Reliance Power) ने 2025 में नीरज पारख (Neeraj Parakh) को कंपनी का नया सीईओ (CEO) नियुक्त किया। इस बात की जानकारी कंपनी ने एक एक्सचेंज फाइलिंग मे दी थी।

यह नियुक्ति 20 जनवरी से लागू हुई और नीरज पारख अगले तीन साल तक इस पद पर बने रहेंगे। कंपनी ने बताया कि नीरज पारख को एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर और सीईओ की जिम्मेदारी दी गई है।

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अनिल अंबानी: बुलंदियों से दिवालियापन तक का सफर

कभी 70,000 करोड़ की वैल्यू वाली Reliance Capital, HDFC से बड़ी कंपनी थी। अनिल अंबानी 2007 में टाटा ग्रुप से भी बड़ी कंपनियों के मालिक और दुनिया के छठे सबसे अमीर शख्स थे। लेकिन 2019 में उन्हें यूके की अदालत में खुद को दिवालिया घोषित करना पड़ा।

2008 की ग्लोबल फाइनेंशियल क्राइसिस ने मुश्किलें शुरू कीं। इसके बावजूद ADAG ग्रुप ने Dreamworks, Zapak, Pipavav Shipyard जैसी जगहों पर भारी इन्वेस्टमेंट किए, जो बाद में भारी पड़े। Care Ratings ने Reliance Capital को डिफॉल्ट रेटिंग में डाल दिया और अंबानी का साम्राज्य ढह गया।

अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले ADAG समूह ने जब इंफ्रास्ट्रक्चर, खासकर रिलायंस पावर, डिफेंस और मीडिया सेक्टर में विस्तार किया, तो यह फैसला कंपनी की वित्तीय स्थिति पर भारी पड़ गया। गलत समय पर कारोबार में एंट्री लेने की वजह से नुकसान और बढ़ गया।

रिलायंस कम्युनिकेशंस (Rcom), जिसे कंपनी के लिए मुनाफे का मुख्य जरिया माना जा रहा था, भी ज्यादा कर्ज (ओवर लिवरेज) की वजह से घाटे में चली गई। इसके अलावा, Rcom का पुरानी कोड डिवीजन मल्टीपल एक्सेस (CDMA) तकनीक पर काम करना भी नुकसान का बड़ा कारण बना, क्योंकि पूरी टेलीकॉम इंडस्ट्री GSM तकनीक पर शिफ्ट हो चुकी थी।

अन्य समूह की कंपनियां भी अपने-अपने स्तर पर चुनौतियों का सामना कर रही थीं, लेकिन रिलायंस कैपिटल की सबसे बड़ी समस्या थी गलत प्रबंधन और रिलेटेड-पार्टी ट्रांजैक्शंस। रिलायंस कैपिटल की दो मुख्य लोन देने वाली कंपनियां—रिलायंस होम फाइनेंस और रिलायंस कमर्शियल फाइनेंस—डिफॉल्ट कर गईं। इसका मुख्य कारण था इन कंपनियों द्वारा समूह से जुड़ी कंपनियों को दिए गए लोन, जो समय पर नहीं लौटाए गए।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने हाल ही में अनिल अंबानी और ADAG समूह के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ जो कार्रवाई की है, वह रिलायंस होम फाइनेंस द्वारा किए गए इन्हीं संदिग्ध लोन ट्रांजैक्शंस से जुड़ी है।

Reliance Capital की मुश्किलें तब बढ़ीं जब IL&FS और DHFL के डूबने से बाजार में पैसों की कमी हो गई। गवर्नेंस की समस्याओं के कारण FY19 की बैलेंस शीट पर ऑडिटर PWC ने साइन करने से मना कर दिया। इसके बाद नवंबर 2021 में RBI ने कंपनी का बोर्ड हटा दिया और दिवालिया प्रक्रिया शुरू कर दी।

अनिल अंबानी ने 2002 में पिता धीरूभाई अंबानी की मौत के बाद फाइनेंशियल सर्विसेज, पावर और टेलीकॉम का कारोबार संभाला था।

First Published - February 10, 2025 | 10:23 AM IST

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