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लाभांश की मांग से खराब होगी पीएसयू की सेहत

Last Updated- December 14, 2022 | 9:16 PM IST

केंद्र सरकार ने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों से ज्यादा इक्विटी लाभांश मांगा है और यह भी कहा है कि वह बीच-बीच में लाभांश का भुगतान करे ताकि अन्य राजस्व में हुई कमी की भरपाई हो। हालांकि सूचीबद्ध पीएसयू की बैलेंस शीट व लाभ से पता चलता है कि वहां बहुत ज्यादा गुंजाइश नहीं है।
पिछले पांच साल में अग्रणी सूचीबद्ध पीएसयू मसलन ओएनजीसी, इंडियन ऑयल, एनटीपीसी, पावर ग्रिड कॉरपोरेशन, कोल इंडिया और एनएमडीसी आदि ने या तो लाभांश भुगतान बरकरार रखा है या फिर उसमें इजाफा किया है जबकि मंदी के कारण उनके लाभ में कमी आई है और कर्ज बढ़ा है।
बिजनेस स्टैंडर्ड के नमूने में शामिल 55 सूचीबद्ध पीएसयू ने वित्त वर्ष 20 में करीब 47,000 करोड़ रुपये का इक्विटी लाभांश दिया जबकि उनका शुद्ध लाभ 82,750 करोड़ रुपये रहा। यह बताता है कि लाभांश भुगतान का अनुपात 57 फीसदी रहा, जो एक साल पहले 70 फीसदी था पर बाकी भारतीय कंपनी जगत के मुकाबले यह ज्यादा है।
निफ्टी-50 में शामिल अग्रणी सूचीबद्ध फर्मों ने औसतन अपने शुद्ध लाभ का करीब 45 फीसदी वित्त वर्ष 20 में इक्विटी लाभांश के तौर पर वितरित किया। पिछले पांच साल में 55 सूचीबद्ध पीएसयू ने संचयी तौर पर 2.75 लाख करोड़ रुपये का इक्विटी लाभांश दिया जबकि उनका संचयी शुद्ध लाभ 3.85 लाख करोड़ रुपये था, जो बताता है कि भुगतान का अनुपात रिकॉर्ड 71.5 फीसदी रहा। निफ्टी-50 की फर्मों के भुगतान अनुपात 32 फीसदी के मुकाबले यह दोगुने से ज्यादा है।
पीएसयू की तरफ से चुकाई गई रकम उनकी तरफ से शेयर पुनर्खरीद के लिए सरकार को दी गई रकम से अलग है। वित्त वर्ष 2017 व वित्त वर्ष 2020 के बीच पीएसयू ने संचयी तौर पर शेयर पुनर्खरीद पर करीब 41,000 करोड़ रुपये खर्च किए। यह पिछले पांच साल में कुल लाभांश भुगतान अनुपात को औसतन 82 फीसदी पर पहुंचा देता है।
ज्यादातर लाभांश जिंस उत्पादकों और औद्योगिक कंपनियों मसलन ओएनजीसी, कोल इंडिया, एनटीपीसी, पावर ग्रिड, बीएचईएल, इंडियन ऑयल और बीपीसीएल जैसी कंपनियों ने दिए। ये गैर-वित्तीय पीएसयू ने संयुक्त रूप से करीब 42,000 करोड़ रुपये इक्विटी लाभांश के तौर पर दिए, जिनकी हिस्सेदारी सभी सूचीबद्ध सरकारी स्वामित्व वाली कंपनियों के कुल लाभांश भुगतान 89 फीसदी बैठता है।
वित्त वर्ष 20 में इन गैर-वित्तीय पीएसयू का लाभांश भुगतान सालाना आधार पर 22 फीसदी कम रहा जबकि उनके शुद्ध लाभ में 40 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। कमजोर लाभ और ज्यादा लाभांश भुगतान के कारण इन पीएसयू की उधारी में तेज बढ़ोतरी हुई है।
मार्च 2020 में इन पीएसयू के संयुक्त सकल कर्ज 8.74 लाख करोड़ रुपये था जबकि एक साल पहले यह 7.25 लाख करोड़ रुपये रहा था और मार्च 2015 के आखिर में 4.3 लाख करोड़ रुपये रहा था। पिछले पांच साल में पीएसयू की उधारी में सालाना 15.3 फीसदी चक्रवृद्धि की रफ्तार से बढ़ोतरी हुई है जबकि उनकी हैसियत में पांच फीसदी, सालाना बिक्री की रफ्तार में 7 फीसदी का इजाफा हुआ है। साथ ही उनके शुद्ध लाभ में गिरावट दर्ज हुई है।
पिछले पांच साल में उनका कर्ज-इक्विटी अनुपात दोगुने से ज्यादा होकर मार्च 2020 में 0.87 गुने पर पहुंच गया, जो मार्च 2015 के आखिर में 0.42 गुना था। विश्लेषकों ने कहा कि अगर पीएसयू पर ज्यादा लाभांश के लिए दबाव डाला जाता है तो वे और उधारी लेने के लिए बाध्य होंगे। इससे उनके पूंजीगत खर्च का चक्र पटरी से उतर सकता है।

एस्‍कॉर्ट्स बढ़ाएगी ट्रैक्टर उत्पादन की क्षमता
कृषि उपकरण और इंजीनियरिंग क्षेत्र की प्रमुख कंपनी एस्‍कॉर्ट्स लिमिटेड मौजूदा मजबूत मांग को पूरा करने के लिए अपनी ट्रैक्टर उत्पादन क्षमता को बढ़ाकर वार्षिक 1.8 लाख इकाई करने की योजना बना रही है। कंपनी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इसके लिए वित्त वर्ष के बाकी हिस्से में 100 करोड़ रुपये का निवेश किया जाएगा।     कंपनी की वार्षिक उत्पादन क्षमता इस समय 1.2 लाख इकाई है और उसे उम्मीद है कि चालू वित्त वर्ष में ट्रैक्टर उद्योग कम से कम दो अंकों में बढ़ेगा, जबकि पहले एक अंकों में वृद्धि का अनुमान था। एस्कॉर्ट समूह के सीएफओ भारत मदान ने यह जानकारी दी। भाषा

First Published - November 15, 2020 | 9:08 PM IST

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