हरित ऊर्जा पर ध्यान बढऩे के साथ घरेलू बिजली उपकरण विनिर्माता अब अक्षय ऊर्जा उत्पादकों की जरूरतों के मुताबिक रणनीति बनाने में लगे हैं। भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स (बीएचईएल), थर्मेक्स और लार्सन ऐंड टुब्रो (एलऐंडटी) भारत में ताप बिजली कंपनियों की मुख्य आपूर्तिकर्ता हैं और अब वे अपने तरीके से हरित ऊर्जा की ओर बढ़ रही हैं।
उदाहरण के लिए एक दशक पहले भेल की ग्राहक बिजली कंपनियां थीं, जो प्रमुख रूप से ताप बिजली उत्पादक होते थे। अब स्थिति बदल गई है। जून में विश्लेषकों की ओर से सौर ऊर्जा क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा को लकेर पूछे गए सवाल के जवाब में भेल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक नलिन सिंघल ने कहा, ‘हम उन क्षेत्रों को देख रहे हैं, जहां आगे प्रतिस्पर्धा कम है। हम दरअसल सीख रहे हैं कि हम उस क्षेत्र में रहे हैं जो बहुत प्रतिस्पर्धी हो गया है।’ सिंघल ने कहा कि रक्षा, एयरोस्पेस और रेलवे ऐसे क्षेत्र हैं, जिनकी ओर भेल ध्यान केंद्रित कर रही है।
भारत ने 2022 तक अक्षय ऊर्जा क्षमता बढ़ाकर 175 गीगावॉट और 2030 तक 450 गीगावॉट करने का लक्ष्य रखा है, जो बाजार के लिए एक अवसर है। इस समय भेल का सौर ऊर्जा पोर्टफोलियो 1.2 गीगावॉट का है। कंपनी अक्षय ऊर्जा में मुनाफा बढ़ाने पर काम कर रही है। एलारा कैपिटल के वाइस प्रेसिडेंट रूपेश सांखे ने कहा, ‘ताप आधारित बीटीजी कंपोनेंट के विनिर्माताओं जैसे भेल और एलऐंडटी के पास ऑर्डर आने कम हो गए हैं।’
भेल की प्रतिस्पर्धी निजी क्षेत्र की कंपनी एलऐंडटी अक्षय ऊर्जा की ओर जाने की रणनीति बना रही है। कंपनी ने वित्त वर्ष 2020 की सालाना रिपोर्ट में कहा, ‘अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग और इस क्षेत्र के कुछ ठेके आवंटित किए जाने से गति मिली है। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा प्रायोजित सौभाग्य पहल से विद्युतीकरण बढऩे से मदद मिली है।’
हाल में निवेशकों के लिए प्रस्तुति में एलऐंडटी ने कहा कि उसका ग्रीन प्रोडक्ट पोर्टफोलियो 31,765 करोड़ ररुपये का है। बहरहाल एलऐंडटी अब तक ताप बिजली इंजीनिरिंग खरीद और निर्माण (ईपीसी) पोर्टफोलियो से हटी नहीं है। इसकी सालाना रिपोर्ट में अक्षय ऊर्जा में तेज वृद्धि को ताप बिजली क्षेत्र के लिए जोखिम के रूप में रखा गया है।
दरअसल एलऐंडटी को उम्मीद है कि ताप बिजली देश में बिजली का प्रमुख स्रोत बना रहेगा। अपनी सालाना रिपोर्ट में कंपनी ने कहा है कि नैशनल इन्फ्रास्ट्रक्चर की कतारबद्ध योजनाओं में वित्त वर्ष 25 तक 292 गीगावॉट क्षमता की ताप बिजली परियोजनाएं हैं। साथ ही पुरानी होती परियोजनाएं और प्रदूषण को रोकने में अक्षम परियोजनाओं से संकेत मिलता है कि देश के बिजली उत्पादन में ताप बिजली की स्थिति अहम बनी रहेगी। थर्मेक्स एक और कंपनी है, जो ग्राहकों की मांग के मुताबिक अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रही है। थर्मेक्स में संयुक्त प्रबंध निदेशक आशिष भंडारी बदलाव से बहुत चिंतित नहीं हैं। उनका कहना है कि पहले जिस तरह से फैक्टरियों ने ताप बिजली परियोजनाओं का इस्तेमाल किया, अब उनका इस्तेमाल अक्षय ऊर्जा के लिए होगा।
भंडारी ने कहा, ‘हमने हाल में एक ऐप्लीकेशन पेश किया, जो हमारे पेपर इंडस्ट्री के ग्राहकों को कचरे के लिए बॉयलर मुहैया कराता है, जो हीट रिकवरी के लिए होता है। उसी संयंत्र में यह उपलब्ध कराया गया, जिसका इस्तेमला 10 साल पहले ताप बिजली के लिए इस्तेमाल होता था। यह बदलाव आसानी से किया गया है।’ उन्होंने कहा, ‘यहां तक कि मौजूदा ताप संयंत्रों को भी स्वच्छ और ज्यादा प्रभावी बनाए जाने की संभावना है।’
थर्मेक्स एक समय में ताप बिजली उद्योग की आपूर्तिकर्ताओं में से एक थी। थर्मेक्स की चेयरपर्सन मेहर पद्मजी ने कहा, ‘इस समय हमारी बड़ी, स्वतंत्र बिजली संयंत्रों में हिस्सेदारी नहीं है, अब हमारी हिस्सेदारी निजी इस्तेमाल के बिजली संयंत्रों में ज्यादा है। अब अक्षय ऊर्जा या कचरे से बनने वाली बिजली की ओर से मांग ज्यादा आ रही है।’
वहीं एबीबी जैसी कंपनियों ने बिजली क्षेत्र के कारोबार से पूरी तरह से निकलने का फैसला किया है। जुलाई में कंपनी ने हिताची के साथ समझौता कर पावर ग्रिड कारोबार से विनिवेश का काम पूरा कर लिया। एबीबी ने एक बयान में कहा, ‘विनिवेश से एबीबी को प्रमुख बाजारों व उपभोक्ताओं की जररूरतों जैसे उद्योग व परिवहन के विद्युतीक रण, ऑटोमेटेड मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल सॉल्यूशंस और बढ़ी हुई टिकाऊ उत्पादकता पर ध्यान केंद्रित करने का मौका मिला है। ‘
पावर ग्रिड जैसी कंपनियों के लिए हरित ऊर्जा पर ध्यान देने का मतलब ज्यादा ऑर्डर मिलने से है। इसमें हरित ऊर्जा गलियारों (जीईसी) का विचार दिया है, जो अक्षय ऊर्जा के लिए वैकल्पिक पारेषण व्यवस्था होगी। पहले चरण में जीईसी के तहत सरकारी कंपनी पॉवर ग्रिड कॉर्पोरेशन द्वारा करीब 20 गीगावॉट के लिए पारेषण क्षमता तैयार की जा रही है।