कोरोनावायरस के नए वेरिएंट के प्रकोप और पाबंदियों के मद्देनजर निकट भविष्य की चिंताएं बढ़ गई हैं लेकिन मुंबई की रियल एस्टेट फर्म फीनिक्स मिल्स की मध्यावधि संभावनाओं के लिए बाजार की धारणा सकारात्मक है। विभिन्न दौर के वित्त पोषण, विस्तार योजना और चालू वित्त वर्ष के अंत तक खपत में उल्लेखनीय वृद्धि की उम्मीद भारत के सबसे बड़े मॉल ऑपरेटर के लिए महत्त्वपूर्ण कारक हैं।
पिछले महीने फीनिक्स मिल्स ने वैश्विक निवेश फंड कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड (सीपीपीआईबी) के साथ एक करार किया। इसके तहत निवेशक मुंबई के लोअर परेल में ऑफिस-रिटेल परियोजना द राइज में 49 फीसदी हिस्सेदारी के लिए 1,350 करोड़ रुपये का निवेश करेंगे।
इसमें सीपीपीआईबी ने पहले किस्त के तौर पर 780 करोड़ रुपये का निवेश किया है। यह रकम अगले चार साल के पूंजीगत खर्च के लिए पर्याप्त होगी। आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के अनुसार, इस निवेश के साथ ही कंपनी ने 2020-21 की दूसरी तिमाही और 2021-22 की तीसरी तिमाही के बीच 4,350 करोड़ रुपये के वित्त पोषण के लिए करार किए हैं। अगले चार वर्षों के दौरान फीनिक्स मिल्स की नजर खुदरा क्षेत्र में अपनी पैठ को दोगुना करते हुए 1.3 करोड़ वर्ग फुट करने पर रहेगी जिसमें 80 लाख वर्ग फुट सीपीपीआईबी और जीआईसी पोर्टफोलियो का हिस्सा है।
आईआईएफएल रिसर्च के मोहित अग्रवाल ने कहा कि सीपीपीआईबी और जीआईसी जैसे वैश्विक निवेशकों को आकर्षक मूल्य पर लाने और खुदरा/ऑफिस प्लेटफॉर्म स्थापित करने संबंधी कंपनी की क्षमता से दीर्घावधि वृद्धि की संभावनाएं स्पष्ट तौर पर दिख रही हैं।
दूसरा सकारात्मक पहलू यह है कि शुद्ध ऋण का स्तर आधे से अधिक घटकर 1,380 करोड़ रुपये रह गया है जो दो साल पहले करीब 4,000 करोड़ रुपये था।
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कोरोनावायरस का नया ओमीक्रोन वेरिएंट का प्रभाव कैसा रहेगा लेकिन कंपनी के अनुसार नवंबर में खपत वैश्विक महामारी पूर्व स्तर पर लौट चुकी है। इसके अलावा किराये में छूट को भी अब वापस ले लिया गया है और उम्मीद की जा रही है कि किरायेदार अगली तिमाही तक पूरे किराये का भुगतान करेंगे। खपत में सुधार और किराये में वृद्धि होने के साथ ही 2022-23 की आय में भी सुधार दिखेगा।
आईसीआईसीआई सिक्योरिटीज के इक्विटी अनुसंधान विश्लेषक अधिदेव चट्टोपाध्याय का मानना है कि विस्तार योजनाओं के मद्देनजर कंपनी की वार्षिक किराया आय में 2019-20 से 2024-25 के दौरान सालाना 14 फीसदी की वृद्धि होगी। वित्त वर्ष 2020 में किराया आय करीब 1,000 करोड़ रुपये रही थी जो वित्त वर्ष 2025 तक करीब 1,950 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।