facebookmetapixel
Advertisement
विशाखापट्टनम स्टील प्लांट में खौफनाक हादसा, 1600 डिग्री पिघले स्टील की चपेट में आने से 8 मजदूरों की मौतRBI Data: जनवरी-मार्च तिमाही में भारत का करंट अकाउंट सरप्लस $7.1 अरब रहा, लेकिन सालाना घाटा बढ़ाPF का पूरा 100% पैसा कब निकाल सकते हैं? जानिए EPFO के 4 सबसे खास और जरूरी नियमरिटायरमेंट के बाद मिलने वाले लीव एनकैशमेंट पर कितनी टैक्स छूट मिलेगी? जानें इसको लेकर क्या हैं नियमAI की अगली लड़ाई रोबोट्स में, दुनिया के 85% Humanoid Robots बना रहा चीनITR Filing 2026: शेयर, म्युचुअल फंड और प्रॉपर्टी से हुई कमाई पर कैसे भरें टैक्स, जानें आसान तरीकाऔद्योगिक और वेयरहाउसिंग रियल एस्टेट बूम, पहली तिमाही में मांग 13 फीसदी बढ़ीITR Filing 2026: पेंशन और फैमिली पेंशन में कन्फ्यूजन? ITR भरते समय ये गलती पड़ सकती है भारीखाड़ी संकट बढ़ा तो बढ़ेंगी मुश्किलें, भारत के पास 76-80 दिनों का तेल भंडार: हरदीप सिंह पुरीबदल रही निवेश की आदतें, अब बाजार में घरेलू बचत का बड़ा हिस्सा

Pharmaceutical industry: निर्यात के लिए फार्मा उद्योग की नजर ब्रिटेन और अमेरिका पर

Advertisement

Pharmaceutical industry: फार्मेक्सिल के अनुसार वित्त वर्ष 25 में ब्रिटेन निर्यात का आशाजनक केंद्र है।

Last Updated- May 31, 2024 | 10:25 PM IST
Floor price for API imports may boost local offtake of pharma inputs

वित्त वर्ष 25 के दौरान भारत की नजर 31 अरब डॉलर के फार्मास्युटिकल निर्यात पर है। इसके लिए ब्रिटेन और अमेरिका उसके सबसे बड़े लक्ष्य हैं। वित्त वर्ष 24 में भारत ने 27.9 अरब डॉलर के औषधि उत्पादों का निर्यात किया था जो एक साल पहले की तुलना में 9.6 प्रतिशत अधिक रहा।

फार्मास्युटिकल एक्सपोर्ट्स प्रमोशन काउंसिल (फार्मेक्सिल) के महानिदेशक उदय भास्कर ने कहा कि समूह का लक्ष्य ब्रिटेन को एक अरब डॉलर का निर्यात करने का है जहां किफायती जेनेरिक दवा की मांग बढ़ रही है।

उन्होंने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया ‘पिछले महीने हम बैठकों के लिए ब्रिटेन में थे। हम नवंबर या उसके आसपास बेल्जियम, नीदरलैंड और ब्रिटेन में रोड शो करने की भी योजना बना रहे हैं।’

भास्कर ने कहा कि सार्वजनिक वित्तीय सहायता वाली ब्रिटेन की नैशनल हेल्थ सर्विस (एनएचएस) कमी के कारण नुस्खों के अनुसार तुरंत दवा देने में असमर्थ है और उसका उद्देश्य स्वास्थ्य देखभाल की लागत कम करना है। इस कदम से किफायती जेनेरिक दवाओं की मांग बढ़ेगी।

ब्रिटेन, अमेरिका से उम्मीद

फार्मेक्सिल के अनुसार वित्त वर्ष 25 में ब्रिटेन निर्यात का आशाजनक केंद्र है। वित्त वर्ष 24 में ब्रिटेन को भारत का दवा निर्यात पिछले साल की तुलना में 21.1 प्रतिशत बढ़कर 78.432 करोड़ डॉलर हो गया। पिछले वर्ष 8.28 प्रतिशत तक की गिरावट के बाद यह इजाफा हुआ है।

भारत के औषधि निर्यात में ब्रिटेन की हिस्सेदारी 2.82 प्रतिशत है। भारतीय दवा निर्यात में अमेरिका की हिस्सेदारी 31 प्रतिशत है और यह बाजार बढ़ भी रहा है। दवाओं की कमी (जेनेरिक दवा विनिर्माता टेवा फार्मास्युटिकल्स ने अमेरिका में अपने कुछ संयंत्रों में उत्पादन बंद कर दिया) के कारण वित्त वर्ष 24 में अमेरिका को भारतीय निर्यात में पिछले साल के मुकाबले 15.6 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

भास्कर ने कहा कि अमेरिका भारतीय दवा विनिर्माताओं के लिए एक ‘दमदार शक्ति’ बना रहेगा क्योंकि वहां 90 प्रतिशत से ज्यादा नुस्खे सस्ती जेनेरिक दवाओं वाले होते हैं। साल 2022 में अमेरिका में दिए गए 10 में से चार नुस्खों के लिए भारतीय कंपनियों ने आपूर्ति की थी।

अन्य देशों में भी मौका

भारतीय दवा कंपनियां अफ्रीका, खास तौर पर नाइजीरिया और सीआईएस देशों पर भी नज़र रख रही हैं, जिसमें रूस और पूर्व सोवियत संघ के कुछ अन्य देश शामिल हैं। ये सभी ऐसे क्षेत्र हैं, जहां उनका कारोबार दबाव में है।

भारत के फार्मास्युटिकल निर्यात में अफ्रीका की हिस्सेदारी लगभग 14.19 प्रतिशत है। फार्मेक्सिल ने नवंबर 2023 में नाइजीरिया, बेनिन, इथियोपिया और तंजानिया में प्रतिनिधिमंडल भेजा था। इस दिसंबर में दक्षिण अफ्रीका, जाम्बिया और मोजाम्बिक में प्रतिनिधिमंडल भेजने की योजना है।

Advertisement
First Published - May 31, 2024 | 10:25 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement