facebookmetapixel
Advertisement
बंधन लाइफ ने लॉन्च किया नया ULIP ‘आईइन्‍वेस्‍ट अल्टिमा’, पेश किया आकर्षक मिड-कैप फंडभारत-अमेरिका व्यापार समझौते से सोयाबीन के भाव MSP से नीचे फिसले, सोया तेल भी सस्ताअब डाकिया लाएगा म्युचुअल फंड, NSE और डाक विभाग ने मिलाया हाथ; गांव-गांव पहुंचेगी सेवाTitan Share: Q3 नतीजों से खुश बाजार, शेयर 3% चढ़कर 52 वीक हाई पर; ब्रोकरेज क्या दे रहे हैं नया टारगेट ?गोल्ड-सिल्वर ETF में उछाल! क्या अब निवेश का सही समय है? जानें क्या कह रहे एक्सपर्टAshok Leyland Q3FY26 Results: मुनाफा 5.19% बढ़कर ₹862.24 करोड़, रेवेन्यू भी बढ़ाUP Budget 2026: योगी सरकार का 9.12 लाख करोड़ का बजट पेश, उद्योग और ऊर्जा को मिली बड़ी बढ़त$2 लाख तक का H-1B वीजा शुल्क के बावजूद तकनीकी कंपनियों की हायरिंग जारीFIIs अब किन सेक्टर्स में लगा रहे पैसा? जनवरी में ₹33,336 करोड़ की बिकवाली, डिफेंस शेयरों से दूरीIMPS vs NEFT vs RTGS: कौन सा है सबसे तेज और सस्ता तरीका? जानिए सब कुछ

अब संदिग्ध लेनदेन की जांच के घेरे में पतंजलि, 2 महीने में मांगा जवाब

Advertisement

रामदेव की कंपनी के इन लेनदेन को असामान्य और संदिग्ध माना गया। हालांकि, जांच शुरुआती चरण में होने के कारण खास आंकड़े का खुलासा नहीं किया गया है।

Last Updated- May 30, 2025 | 10:13 PM IST
Patanjali

केंद्र सरकार ने कई वित्तीय लेनदेन के मामले में योग गुरु बाबा रामदेव की कंपनी पतंजलि आयुर्वेद से स्पष्टीकरण मांगा है। ब्लूमबर्ग की एक खबर के अनुसार केंद्रीय आर्थिक खुफिया एजेंसियों ने इन लेनदेन को संदिग्ध बताया है। कॉरपोरेट मामलों के मंत्रालय ने इस बारे में कंपनी को नोटिस जारी किया है और वह संभावित तौर पर रकम की हेरफेर और कॉरपोरेट प्रशासन के उल्लंघन की जांच कर रहा है।

Also Read: अमेरिकी शुल्क बहाली और IT शेयरों में गिरावट के दबाव में सेंसेक्स 182 अंक टूटा, निफ्टी भी फिसला

रामदेव की कंपनी के इन लेनदेन को असामान्य और संदिग्ध माना गया। हालांकि, जांच शुरुआती चरण में होने के कारण खास आंकड़े का खुलासा नहीं किया गया है। मंत्रालय का जवाब देने के लिए पतंजलि को दो महीने का वक्त दिया गया है। उल्लेखनीय है कि पतंजलि लगातार नियामकीय जांच का सामना कर रही है। हालिया जांच से पतंजलि आयुर्वेद और उसकी सहयोगियों की कानूनी और नियामकीय चुनौतियां और बढ़ गई हैं। पिछले साल कंपनी की एक इकाई को कर उल्लंघन और गलत रिफंड दावों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया था।

इसके अलावा पारंपरिक औषधियों की इस कंपनी को उत्पादों के भ्रामक विज्ञापनों को बढ़ावा देने के लिए भी काफी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है। कंपनी कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के इलाज का भी दावा करती है। सर्वोच्च न्यायालय ने औषधि और चमत्कारिक उपचार (आपत्तिजनक विज्ञापन) अधिनियम, 1954 के उल्लंघनों का हवाला देते हुए कंपनी पर विभिन्न बीमारियों के इलाज के रूप में अपने उत्पादों को बढ़ावा देने पर रोक लगा दी थी।

Advertisement
First Published - May 30, 2025 | 9:52 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement