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फंड के लिए बिकेगी मायटास की हिस्सेदारी!

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Last Updated- December 11, 2022 | 7:40 AM IST

मुसीबतों से घिरी कंपनी, मायटास समूह का नया बोर्ड अब पैसों का इंतजाम करने के लिए एड़ी चोटी का जोड़ लगा रहा है। इसके लिए बोर्ड बैंकों से तो कर्ज के खातिर बात कर रहा है।
उसने कंपनी की इक्विटी बेचने जाने की संभावनाओं से भी इनकार नहीं किया है। सरकार द्वारा नियुक्त बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. के. रामलिंगम ने बताया, ‘देखिए, आज हमारे सामने सबसे बड़ी चुनौती इस कंपनी को फिर से अपने पैरों पर खड़ा करने की है। इसके लिए हमें पैसे की जरूरत है। इसीलिए हमने कॉर्पोरेट डेट रिस्ट्रक्चर (सीडीआर) का मसौदा तैयार करके अपने बैंकरों के सामने पेश किया है।
साथ ही, हमारे 500 करोड़ रुपये ग्राहकों के पास फंसे हुए हैं। हम इस पैसे को निकालने की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं। साथ ही, हम बैंकों से भी ताजा कर्ज लेने की कोशिश कर रहे हैं।’ इसके लिए बोर्ड कंपनी की हिस्सेदारी भी बेच सकती है।
इस बाबत सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक और इंस्टीटयूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंट ऑफ इंडिया के पूर्व अध्यक्ष वेद जैन ने बताया कि, ‘इसके लिए कंपनी की हिस्सेदारी बेचे जाने से भी इनकार नहीं कर रहे हैं। हम सारे पहलुओं पर विचार कर रहे हैं।’ गौरतलब है कि मायटास की 85 फीसदी हिस्सेदारी प्रवर्तक के कब्जे में है।
हैदराबाद मेट्रो के बारे में पूछे जाने पर रामलिंगम ने कहा कि, ‘हमने आंध्र सरकार से इस बारे में पैसे जुटाने की प्रक्रिया को पूरी करने के खातिर छह महीने की मांग की है। दरअसल, राज्य सरकार ने सत्यम कांड के बाद कुछ मुद्दे उठाए है, जिसका जवाब हमें अभी देना है।
साथ ही, बैंकों से भी हमने कर्ज की मांग की है। वैसे, हैदराबाद मेट्रो के मुद्दे पर हमने नौ मई को बोर्ड की बैठक बुलाई है। इसमें हम इससे जुड़े हर पहलू पर विचार करेंगे। इसके अलावा, हमारी दूसरी परियोजनाओं पर इस वक्त काम चल रहा है।’
सीडीआर के बारे में जैन ने कुछ भी खुलासा करने से इनकार कर दिया। हालांकि, उन्होंने यह जरूर बताया कि, ‘ कंपनी के सिर पर इस वक्त 1,700 करोड़ रुपये का कर्ज है।’ दूसरी तरफ, रामलिंगम ने बताया कि, ‘हमारी हालत अब भी काफी मजबूत है। 15 हजार करोड़ रुपये के हैदराबाद मेट्रो प्रोजेक्ट को अगर छोड़ भी दें, तो भी हमारा ऑर्डर बुक 8,500 करोड़ रुपये का है। ये ऑर्डर हमें 24 महीनों में पूरे करने हैं।’
यह पहले के मुकाबले कम है। बोर्ड में सरकार द्वारा नियुक्त निदेशक अनिल के. अग्रवाल ने कहा, ‘इसकी बड़ी वजह मंदी और सत्यम कांड है। खास तौर पर सत्यम कांड की वजह से कंपनी अपनी परियोजनाओं को भी वक्त पर पूरा नहीं कर पाएगी।’ रामलिंगम ने बताया, ‘कंपनी के बड़े ग्राहकों से मैं खुद जाकर मिल रहा हूं। वे हमारा साथ दे रहे हैं। सरकार से भी हमें पूरा सहयोग मिल रहा है।’

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First Published - May 5, 2009 | 9:38 PM IST

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