मंदी के इस दौर में भी इंजीनियरिंग सेक्टर की नामी कंपनी लार्सन ऐंड टुर्बो (एलऐंडटी) तरक्की करने में पीछे नहीं है।
इसकी एक बानगी तब देखने को मिली, सिर्फ मार्च के आखिरी हफ्ते में ही कंपनी को एक अरब डॉलर के ऑर्डर मिले। इसके साथ ही कंपनी का ऑर्डर बैकलॉग भी दिसंबर के 68 हजार करोड़ रुपये से 13 फीसदी चढ़कर 31 मार्च को 77 हजार करोड़ के स्तर पर पहुंच गया।
उसके पास 5,177 करोड़ रुपये के ये ऑर्डर मैंगलोर रिफाइनरी ऐंड पेट्रोकेमिकल्स (एमआरपीएल), टाटा स्टील, भूटान के पुनातसंगच्चू पनबिजली परियोजना, पावरग्रिड कॉर्पोरेशन, रेल विकास निगम, भारतीय रेलवे और न्यूक्लिर पावर कॉर्पोरेशन (एनपीसीएल) की तरफ से आए।
कंपनी के मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) वाई.एम. देवस्थली का कहना है कि, ‘हमने अपने पोर्टफोलिया में विस्तार किया है। एक साथ कई सेक्टरों के लिए काम करने की हमारी क्षमता की वजह से ही हमें मंदी में भी इतने मोटे ऑर्डर मिले हैं। हमें पूरी उम्मीद है कि बीते वित्त वर्ष में भी हमारी कमाई और मुनाफे पर मंदी को कोई असर नहीं पड़ेगा।’
कंपनी के पास करीब 75 फीसदी ऑर्डर इंजीनियरिंग और कंस्ट्रक्शन सेक्टर से आए हैं, जबकि बाकी के ऑर्डर भारी इंजीनियरिंग उद्योग से आए हैं। कंपनी सूत्रों के मुताबिक कंपनी के पास जितना बैकलॉग है, उसमें से 20 फीसदी ऑर्डर विदेशों से आए हैं।
हाल के दिनों में कई ब्रोक्रेज हाउसों ने कहा था कि मंदी की वजह से एलऐंडटी की रफ्तार भी धीमी पड़ सकती है। इस वजह से उसके पास ऑर्डर आने की रफ्तार धीमी पड़ सकती है।
एडेलवाइस ने हाल ही में एलऐंडटी के शेयरों की रेटिंग को कम कर दिया था। वहीं सिटीग्रुप ने भी इसकी रेटिंग को कम करके इसके शेयरों को बेचने का सुझाव दिया था। क्रेडिट सुइस ने भी इसके बारे में ऐसा भी सुझाव दिया था।