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कॉरपोरेट कार्य मंत्रालय (एमसीए) कारोबार पर प्रक्रिया व अनुपालन बोझ कम करने की कवायद में है। सूत्रों ने कहा कि कंपनी अधिनियम और लिमिटेड लायबिलिटी पार्टनरशिप (एलएलपी) ऐक्ट में संशोधन करने के लिए मंत्रालय कॉरपोरेट संशोधन विधेयक का प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। मंत्रालय ने दोनों अधिनियमों में व्यापक बदलावों को शामिल करते हुए कैबिनेट नोट को अंतिम रूप दे दिया है।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, “फॉर्मों को युक्तिसंगत बनाया जा रहा है। व्यापक कारोबार सुगमता के लिए अपराधों को कम करने पर का भी प्रस्ताव है।’ बजट सत्र के दूसरे भाग में दिवाला एवं ऋणशोधन अक्षमता संशोधधन विधेयक भी पेश किए जाने की संभावना है। वरिष्ठ अधिकारी ने आगे कहा, ‘हमने प्रस्तावित विधेयक पर प्रवर समिति की अधिकांश सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है।’
चार्टर्ड अकाउंटेंट्स, कॉस्ट अकाउंटेंट्स और कंपनी सेक्रेटरीज सहित पेशेवर सेवाओं को नियंत्रित करने वाले सभी अधिनियमों में भी मंत्रालय की ओर से जल्द ही बदलाव के प्रस्ताव लाए जाने की उम्मीद है। यह संशोधन भारत में वैश्विक मल्टी डिसिप्लीनरी प्रैक्टिस फर्म बनाने के लिए उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों पर आधारित होंगे।
उदाहरण के लिए अभी भारत में मौजूदा नियम सीए, सीएस, वकीलों और एक्चुअरीज जैसे पेशेवरों को एकल फर्म संरचना के तहत एक साथ काम करने की अनुमति नहीं देते हैं। अंतरराष्ट्रीय फर्में एकीकृत सेवाएं प्रदान करती हैं। ऐसे मंर भारत की फर्मों की अंतरराष्ट्रीय फर्मों से समझौते करने व काम करने की क्षमता प्रभावित होती है। सरकार कानून में संशोधन करके इन चिंताओं को दूर करना चाहती है।
मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि कंपनी अधिनियम में संशोधन करके राष्ट्रीय वित्तीय रिपोर्टिंग प्राधिकरण को इसके कार्यकारी बोर्ड के बाहर के कुछ कार्यों को सौंपने के लिए अधिक शक्तियां देने पर विचार कर रहा है ताकि उसकी जांच और अनुशासनात्मक कार्यों का विभाजन किया जा सके।
मंत्रालय ने ने 2023 में प्रतिस्पर्धा अधिनियम में संशोधन किया था। इसमें नए दौर के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए प्रावधान लाए गए थे।