उद्योग

को-वर्क एआई ने बढ़ाई उत्पादकता, लेकिन सेवा कंपनियों का काम बरकरार

एआई टूल उत्पादन बढ़ा रहे हैं, लेकिन आईटी सेवा कंपनियों की जटिल भूमिका और जरूरत बरकरार है।

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शिवानी शिंदे   
Last Updated- February 16, 2026 | 8:10 AM IST

भारतीय आईटी सेवा फर्मों के शेयरों में पिछले कुछ दिनों में शायद सबसे बड़ी गिरावटों में से एक देखी गई है। बिकवाली की इस गिरावट से देश के बेंचमार्क इक्विटी सूचकांक पर भी असर पड़ा है। आईटी सेवा उद्योग की एक अंक में वृद्धि और एन्थ्रोपिक के कॉ-वर्क जैसे एआई टूल के असर की वजह से कई लोग उद्योग के अस्तित्व पर ही सवाल उठा रहे हैं। हालांकि नैसकॉम के अध्यक्ष राजेश नांबियार इन चिंताओं को खारिज करते हैं। शिवानी शिंदे के साथ वीडियो पर हुई बातचीत में उन्होंने आईटी उद्योग की वृद्धि और भूमिका का बचाव किया। संपादित अंश …

एन्थ्रोपिक के को-वर्क जैसे टूल के असर को आप किस तरह देखते हैं? कई लोगों का मानना है कि यह उद्योग के लिए अस्तित्व का संकट हो सकता है।
इसमें कोई शक नहीं है कि क्लाउड को-वर्क जैसे मॉडलों ने उत्पादकता और प्रदर्शन में खासा सुधार दिखाया है। ये टूल स्पष्ट रूप से विकसित हो रहे हैं और प्रदर्शित कर रहे हैं कि वे केवल कोडिंग असिस्टेंट होने की तुलना में आगे निकल चुके हैं। वे समूचे वर्कफ्लो और ज्ञान-प्रधान कार्यों को सुव्यवस्थित करने लगे हैं। उस बदलाव को स्वीकार किया जाना चाहिए। किसी एजेंट के रूप में ये प्रणालियां जो कर सकती हैं, उसमें तेजी से उछाल आई है। जिस रफ्तार से वे अब ऐसी उत्पादकता तैयार कर सकते हैं, जिनमें पहले पारंपरिक सॉफ्टवेयर डेवलपमेंट चक्र में दिन, महीने या साल तक लगते थे, वह उल्लेखनीय है। इसमें कोई संदेह नहीं है कि उत्पादकता में सार्थक लाभ होगा। यह मानना सही नहीं है कि क्लाउड कॉ-वर्क या इसी तरह की एजेंटिक प्रणाली जैसे नए जमाने के टूल आसानी से ‘प्लग ऐंड प्ले’ कर सकते हैं और इस जटिलता को बदल सकते हैं। हालांकि ये टूल शक्तिशाली हैं, लेकिन वे उस जटिल एंटरप्राइज संदर्भ को पूरी तरह से प्रतिस्थापित नहीं कर सकते हैं, जिसमें सेवा फर्में काम करती हैं।

क्या अतीत में हमने इसी तरह का तकनीकी बदलाव देखा है जिससे मिलती-जुलती चिंताएं पैदा हुई हों, लेकिन आखिर में वह किसी श्रेणी या कारोबारी मॉडल को खत्म करने के बजाय उद्योग का हिस्सा बन गया हो?

इसकी सबसे करीबी मिसाल ईआरपी (एंटरप्राइज़ रिसोर्स प्लानिंग) लहर होगी, जब ओरेकल और एसएपी जैसे एंटरप्राइज प्लेटफॉर्म मुख्य धारा बन गए थे। उस समय यह पक्का यकीन था कि पूरजोर वाले एंटरप्राइज रिसोर्स प्लानिंग सिस्टम यानी अनिवार्य रूप से सास युग की शुरुआत, परंपरागत कोडिंग को पूरी तरह से खत्म कर देगा। सेवा कंपनियों का काम छिन जाएगा। वास्तव में हुआ इसके उलट। सिस्टम इंटीग्रेटरों की मांग पहले की तुलना में पांच गुना तक बढ़ गई। सर्विस कंपनियों ने इंटीग्रेशन, कस्टमाइजेशन और मेंटेनेंस के जरिये ईआरपी वेंडर्स की तुलना में कहीं ज्यादा मूल्य सृजन किया, जो ईआरपी वेंडर के सामान्य क्रियान्वयन में होता। मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आज की एआई लहर वैसी ही है, लेकिन यह उपयोगी समानता है।

अगर एआई टूल एंटरप्राइज सिस्टम में गहराई से शामिल हो जाते हैं और उत्पादकता में लगातार फायदा देते हैं, तो क्या सिस्टम इंटीग्रेटर की लंबे समय की जरूरत कम नहीं हो जाएगी? एक बार जब एंटरप्राइज इन क्षमताओं को अपना लेते हैं, तो एसआई पार्टनर्स के लिए क्या संरचनात्मक भूमिका रह जाती है?

मुझे नहीं लगता कि जरूरत गायब हो जाती है, यह बदल जाती है। एंटरप्राइज को आज के काम से बहुत अलग काम करने के लिए एसआई पार्टनर की जरूरत होगी। डेटा रेडीनेस जैसी किसी बुनियादी चीज को लें। कई एंटरप्राइज डेटाबेस दशकों से विकसित हुए हैं। एआई सिस्टम के लिए उस डेटा को तैयार करना, उसे साफ करना, उसकी संरचना तैयार करना, प्रशासन और उसका पालन सुनिश्चित करना, ये अपने आप में एक बहुत बड़ा काम है। एआई टूल के मौजूद होने मात्र से ही यह स्वचालित रूप से नहीं होता है।

First Published : February 16, 2026 | 8:10 AM IST